संवाददाता@विशाल टंडन…..
— उद्यान एवं कृषि विभाग की योजनाओं का मिला लाभ, अब दूसरे जिलों के किसान भी लेने पहुंच रहे हैं खेती की जानकारी

रॉबर्ट्सगंज विकासखंड के ग्राम कुशी के प्रगतिशील किसान मानसिंह ने परंपरागत खेती छोड़ पपीते की मिश्रित खेती अपनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। कभी रोजगार की तलाश में महाराष्ट्र गए मानसिंह आज अपने गांव में आधुनिक खेती के जरिए अच्छी आय अर्जित कर अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
ग्रेजुएशन के बाद मानसिंह महाराष्ट्र में एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में कार्य करते थे। वहां विभिन्न राज्यों के किसानों से मुलाकात और आधुनिक खेती की जानकारी ने उनकी सोच बदल दी। उन्होंने महसूस किया कि यदि अपने गांव की जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से खेती की जाए तो बाहर नौकरी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
इसी सोच के साथ वह गांव लौट आए और उद्यान विभाग तथा कृषि विभाग से संपर्क कर पपीते की खेती शुरू की। विभागीय योजनाओं का लाभ लेते हुए उन्होंने करीब साढ़े तीन एकड़ भूमि में लगभग 3,500 पपीते के पौधे लगाए।
कृषि विभाग से आधुनिक कृषि यंत्र और तकनीकी प्रशिक्षण का लाभ भी मिला, जिससे उनकी खेती और बेहतर होती गई। मानसिंह बताते हैं कि उनके खेत में तैयार होने वाला लाल गूदे वाला पपीता एक्सपोर्ट क्वालिटी का होता है, जो लंबे समय तक ताजा रहता है और बाजार में 10 से 20 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।

उन्होंने बताया कि पपीते का पौधा करीब आठ महीने में फल देना शुरू कर देता है तथा प्रत्येक पौधे से औसतन 40 किलोग्राम तक उत्पादन मिलता है। केवल पपीते से ही लागत निकालने के बाद करीब दो लाख रुपये वार्षिक शुद्ध आय होती है। वहीं पौधों के बीच खाली स्थान में लहसुन,गोभी, सुरन,हल्दी,प्याज़ व अन्य सब्जियों की मिश्रित खेती कर कुल आय लगभग चार लाख रुपये प्रतिवर्ष तक पहुंच जाती है।
मानसिंह बताते हैं कि उनकी खेती में मुख्य रूप से जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है। लगभग छह वर्ष पहले तक वे धान, गेहूं, मिर्च और टमाटर की पारंपरिक खेती करते थे, लेकिन लगातार नुकसान के बाद उन्होंने मिश्रित खेती अपनाई। आज उनकी सफलता से प्रेरित होकर सोनभद्र सहित आसपास के जिलों के किसान भी उनके खेत पर पहुंचकर आधुनिक खेती की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।





