नई दिल्ली. फुटबॉल के सबसे बड़े महाकुंभ में इस बार ‘गोल्डन बूट’ की रेस सिर्फ एक ट्रॉफी हासिल करने की जंग नहीं रह गई है, बल्कि यह इतिहास के पन्नों में अपना नाम अमर करने की एक महागाथा बन चुकी है. टूर्नामेंट अपने सबसे रोमांचक मोड़ पर है, जहां दुनिया के सर्वश्रेष्ठ छह गोल स्कोरर में से पांच खिलाड़ी अब भी मैदान में डटे हुए हैं. हर मैच के साथ समीकरण बदल रहे हैं. धड़कनें बढ़ रही हैं. और फुटबॉल प्रेमियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर कौन सा सूरमा इस चमचमाती ट्रॉफी को अपने घर ले जाएगा.
इस रेस में सबसे आगे दो ऐसे नाम चल रहे हैं जिन्हें फुटबॉल की दुनिया में किसी परिचय की जरूरत नहीं है. अर्जेंटीना के जादुई सुपरस्टार लियोनेल मेस्सी (Lionel Messi) और फ्रांस के रफ्तार के सौदागर किलियन एमबाप्पे (Kylian Mbappe). इन दोनों ही खिलाड़ियों ने मौजूदा टूर्नामेंट में 8-8 गोल दागकर तहलका मचा रखा है. लेकिन अगर बारीक आंकड़ों पर नजर डालें, तो फ्रांस के एमबाप्पे फिलहाल अर्जेंटीना के कप्तान से एक कदम आगे नजर आते हैं. एमबाप्पे ने अपने 8 गोल करने के लिए मैदान पर मेस्सी से कम समय लिया है. उन्होंने कुल 563 मिनट खेलते हुए यह मुकाम हासिल किया है, और साथ ही अपनी टीम के लिए 3 असिस्ट (गोल करने में मदद) भी किए हैं. दूसरी ओर, मेस्सी ने मैदान पर 607 मिनट बिताए हैं और उनके नाम 2 असिस्ट दर्ज हैं.
ये 5 खिलाड़ी गोल्डन बूट जीत की रेस में है.
दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों के बीच सिर्फ इस टूर्नामेंट के गोल्डन बूट की ही लड़ाई नहीं है, बल्कि विश्व कप के सर्वकालिक इतिहास में सर्वाधिक गोल करने का एक जादुई रिकॉर्ड बनाने की भी होड़ मची है. मेस्सी ने अब तक के अपने सभी विश्व कप करियर को मिलाकर कुल 21 गोल दागे हैं, जबकि युवा एमबाप्पे महज 20 गोल के साथ उनके कंधों पर सांस ले रहे हैं. यह जंग अनुभव और युवा जोश की एक ऐसी दास्तान है जो सदियों तक याद रखी जाएगी.
हालैंड की विदाई और इंग्लैंड के शेरों की दहाड़
इस सुनहरी रेस में तीसरे नंबर पर नॉर्वे के गोल मशीन एर्लिंग हालैंड का नाम आता है. हालैंड ने टूर्नामेंट में अपनी धाक जमाते हुए 537 मिनट के खेल में शानदार 7 गोल दागे. हालांकि, उनके प्रशंसकों के लिए निराशा की बात यह रही कि वे अपनी टीम को आगे नहीं ले जा सके और नॉर्वे की टीम टूर्नामेंट से बाहर हो गई. बिना किसी असिस्ट के 7 गोल करने वाले हालैंड की चुनौती भले ही खत्म हो गई हो, लेकिन उन्होंने इस रेस को शुरुआत में जो रफ्तार दी, उसने बाकी खिलाड़ियों को पसीना बहाने पर मजबूर कर दिया.
हालैंड के बाहर होने के बाद अब इंग्लैंड के दो जांबाज खिलाड़ी इस रेस को त्रिकोणीय और चतुष्कोणीय बनाने में जुटे हैं. इंग्लैंड के युवा सनसनी जूड बेलिंगहम और अनुभवी कप्तान हैरी केन दोनों ही 6-6 गोल करके रेस में पूरी तरह बने हुए हैं. जूड बेलिंगहम ने 574 मिनट मैदान पर बिताकर 6 गोल दागे हैं और उनके नाम 1 असिस्ट भी है. वहीं, टीम के भरोसेमंद स्ट्राइकर हैरी केन ने 627 मिनट खेलते हुए 6 गोल और 1 असिस्ट के साथ अपनी दावेदारी मजबूत रखी है. इंग्लैंड के ये दोनों शेर किसी भी वक्त पासा पलटकर मेस्सी और एमबाप्पे के समीकरणों को बिगाड़ने का माद्दा रखते हैं.
फ्रांस और स्पेन के ‘छुपे रुस्तम’
गोल्डन बूट की इस दौड़ में केवल शीर्ष चार या पांच खिलाड़ी ही नहीं हैं, बल्कि कुछ ऐसे ‘छुपे रुस्तम’ भी हैं जो किसी भी क्षण बड़ा उलटफेर कर सकते हैं. फ्रांस के स्टार खिलाड़ी औस्मान डेम्बेले 5 गोल करके शीर्ष खिलाड़ियों के ठीक पीछे खड़े हैं. अगर आने वाले मैचों में एमबाप्पे को विपक्षी टीमें रोकती हैं, तो डेम्बेले फ्रांस के लिए एक्स-फैक्टर साबित हो सकते हैं.
वहीं, स्पेन के मिकेल ओयार्ज़ाबल भी इस रेस में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं. ओयार्ज़ाबल ने अब तक 4 गोल किए हैं. स्पेनिश टीम के इस स्टार खिलाड़ी के पास अभी एक बड़ा मौका है. यदि स्पेन की टीम सेमीफाइनल के कड़े मुकाबले में फ्रांस को शिकस्त देने में कामयाब हो जाती है, तो ओयार्ज़ाबल को अपने गोल की संख्या बढ़ाने के लिए फाइनल का मंच मिलेगा, जिससे वे गोल्डन बूट के दावेदारों को कड़ी चुनौती दे सकते हैं.
अंतिम क्षणों का रोमांच
जैसे-जैसे नॉकआउट मुकाबले अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं, गोल्डन बूट की यह रेस और अधिक रणनीतिक होती जा रही है. मैदान पर बिताया गया एक-एक मिनट, खिलाड़ियों द्वारा दिए गए असिस्ट और उनका गोल स्कोरिंग फॉर्म अब बेहद मायने रखता है. क्या मेस्सी अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर एक और स्वर्णिम अध्याय लिखेंगे, या एमबाप्पे अपनी रफ्तार से इतिहास को दोबारा परिभाषित करेंगे? या फिर इंग्लैंड का कोई खिलाड़ी बाजी मार ले जाएगा? फुटबॉल जगत की सांसें थमी हुई हैं, क्योंकि इस रेस का अंत बेहद रोमांचक होने वाला है.






