मुख्य संवाददाता@सौरभ गोस्वामी…..
— चर्चा है कि अब भी बड़ा सवाल है कि लाखों रुपए की लागत से हो रहे नाली निर्माण का औचित्य क्या है, जबकि निकासी ही फाइनल नहीं हुई

ओबरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 15 स्थित ओम चौराहे पर नाली निर्माण को लेकर चल रहा विवाद प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सुलझ गया। बुधवार को नायब तहसीलदार रजनीश यादव, लेखपाल अमित कुमार सिंह, नगर पंचायत कर्मियों और ओबरा थाना पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया गया।
इस कार्रवाई में नाली निर्माण की जद में आ रहे मकान, बाउंड्रीवाल और दुकानें शामिल थीं। स्थानीय लोगों के अनुसार, ठेकेदार नाली निर्माण कार्य मनमाने तरीके से करा रहा था। नाली का निर्माण मकानों, बाउंड्रीवालों और दुकानों की जद में आ रहा था, फिर भी काम जारी रखा गया। इससे प्रभावित लोगों ने नगर पंचायत ओबरा एसडीएम को लिखित शिकायत देकर कार्य रुकवाया था।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि आपत्तियों और शिकायतों के बावजूद ठेकेदार ने दोबारा जबरन काम शुरू कर दिया। इसके बाद कुछ ग्रामीण नगर पंचायत ओबरा पहुंचे और अधिकारियों को मामले से अवगत कराया। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कर कार्रवाई शुरू की।

नगर पंचायत द्वारा संबंधित लोगों को पहले ही अतिक्रमण हटाने के निर्देश देते हुए नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, नोटिस के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। इसके बाद नायब तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व टीम, नगर पंचायत और पुलिस बल की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया गया, जिससे नाली निर्माण कार्य का मार्ग प्रशस्त हो गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि सार्वजनिक हित और विकास कार्यों में बाधा डालने वाले अतिक्रमणों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि नगर पंचायत के विकास कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाएगा।
बहरहाल चर्चा है कि नाली निर्माण का कार्य भले ही सुलझ गया हो लेकिन अब भी बड़ा सवाल है कि लाखों रुपए की लागत से हो रहे नाली निर्माण का औचित्य क्या है, जबकि निकासी ही फाइनल नहीं हुई।





