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mirabai chanu story: जिस दिन मीराबाई ने अपना गोल्ड मेडल जीता, उसके अगले दिन उनसे यही उम्मीद थी कि वह थोड़ा आराम करेंगी और खुद को रिलैक्स करेंगी. आखिरकार, यह उनका लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड था. ग्लासगो में मौजूद कुछ रिपोर्टर्स ने उन्हें चुपचाप एसईसी के ट्रेनिंग सेंटर की ओर जाते देखा. सबने उनसे पूछा भी कि आखिर वह क्या करने जा रही हैं. मीराबाई चानू का जवाब था “ट्रेनिंग करने जा रही हैं
मेडल जीतने के अगले दिन ही मीरा-बाई चानू ने शुरु किया एशियाई गेम्स की तैयारी
नई दिल्ली. कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान मीराबाई चानू पर काफी कुछ लिखा गया है, और एशियन गेम्स से पहले तक ये सब चलता रहेगा लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कॉमनवेल्थ में चानू का चैंपियन की तरह खेलना हम सभी के लिए एक अहम आई-ओपनर है—खासतौर पर उन युवा खिलाड़ियों के लिए, जो खुद के लिए और भारत के लिए बड़ा नाम बनाने का सपना देखते हैं.
जिस दिन मीराबाई ने अपना गोल्ड मेडल जीता, उसके अगले दिन उनसे यही उम्मीद थी कि वह थोड़ा आराम करेंगी और खुद को रिलैक्स करेंगी. आखिरकार, यह उनका लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड था. ग्लासगो में मौजूद कुछ रिपोर्टर्स ने उन्हें चुपचाप एसईसी के ट्रेनिंग सेंटर की ओर जाते देखा. सबने उनसे पूछा भी कि आखिर वह क्या करने जा रही हैं. मीराबाई चानू का जवाब था “ट्रेनिंग करने जा रही हैं, सर. एक भी दिन ट्रेनिंग मिस नहीं कर सकतीं. एक चैंपियन से ही ऐसे जवाब की उम्मीद की जा सकती है.
मंजिल अभी और भी है
मैं कॉमनवेल्थ गेम्स पर रुकना नहीं चाहती मीराबाई चानू दृढ़ता से कहा “मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स है और मैं आपको भरोसा दिला सकती हूं कि मैं वहां अच्छा करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ूंगी. अचानक उनकी आंखों में एक अलग ही दृढ़ता नजर आई वह मस्तीभरी मीराबाई से बिल्कुल अलग, एक बेहद संजीदा और लक्ष्य के प्रति समर्पित एथलीट.चानू के कोचने कहा कि यही वह भूख है, जिसकी मैं बात करता हूं मीराबाई के अंदर जीतने की आग है, और वही उन्हें आगे बढ़ाती है.
वर्ल्ड-बीटर बनने के अलग होना जरूरी
मीराबाई चानू के कोच विजय ने कहा कि वर्ल्ड-बीटर बनने के लिए आपको अलग होना पड़ता है, उन्होंने कहा कि हां, आपने कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड जीता है, लेकिन आप संतुष्ट नहीं हो सकते. आपको उस गोल्ड को भूलकर एशियन गेम्स के लिए ट्रेनिंग शुरू करनी होगी, जो कहीं ज्यादा कठिन प्रतियोगिता है. हम चाहते हैं कि यह सोच हर खिलाड़ी में हो. सिर्फ एक मीराबाई क्यों? बाकी खिलाड़ी भी उनसे सीखें ताकि और भी कई मीराबाई बन सकें लेकिन सच्चाई यह है कि मीराबाई चानू जैसी कोई दूसरी नहीं है.
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राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …
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