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वर्ल्ड कप में मैच के बाद जापानी दर्शक क्यों कर रहे स्टेडियम की सफाई, कैसे सीखते हैं ये आदतें

Admin by Admin
June 16, 2026
in खेल
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वर्ल्ड कप में मैच के बाद जापानी दर्शक क्यों कर रहे स्टेडियम की सफाई, कैसे सीखते हैं ये आदतें
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फीफा वर्ल्ड कप में जापान ने नीदरलैंड के खिलाफ पहला मैच टैक्सस के एटी एंड टी स्टेडियम में रोमांचक तरीके से ड्रा खेला. इसके बाद जो हुआ, उसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. जापान के दर्शकों ने मैच के बाद पूरे स्टेडियम को साफ किया. फिर उसके बाद वो वहां से बाहर निकले. वहां फुटबॉल प्रशंसक स्टेडियमों को पूरी तरह से साफ-सुथरा छोड़कर जाने के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं. पिछले कई वर्ल्ड कप में उन्हें ऐसा करते देखा जा चुका है. केवल यही नहीं मैच देखते हुए जापानी प्रशंसक ना तो विरोधी टीम को हूट करते हैं और ना ही कभी कोई हंगामा. जापानियों में ये बातें आखिर कैसे आती हैं, जिन्हें हमें भी सीखना चाहिए.

डलास के एटी एंड टी स्टेडियम में जापान के प्रशंसक जैसे ही मैच खत्म हुआ, तो वो अपने आसपास की जगह को साफ करने में लग गए. वो कूड़ा उठा रहे थे. उसे बड़े प्लास्टिक बैग में भरकर फेंक रहे थे, जिन्हें वे मैच में अपने साथ लाए थे. जापानी फैंस की शालीनता, अनुशासन और सम्मानजनक व्यवहार की वजह से वे हर टूर्नामेंट में दिल जीत लेते हैं. मैच हारने या जीतने पर भी उनका बर्ताव एक जैसा रहता है.

ना हूटिंग ना गाली गलौच

जापानी दर्शक विरोधी टीम को हूट या नकारात्मक चीयरिंग नहीं करते. ये भी उनकी स्पोर्ट्समैनशिप और संस्कृति का एक और सुंदर पहलू है. अमेरिका में चल रहे फीफा वर्ल्ड कप में जापानी फैंस ने अपनी टीम को जोरदार सपोर्ट किया, लेकिन विरोधी खिलाड़ियों या फैंस के खिलाफ कोई हूटिंग, गाली-गलौज या नेगेटिव चैंट्स नहीं किए. इसकी बजाय वे शालीनता से सपोर्ट करते हैं. मैच के बाद अक्सर विरोधी टीम के फैंस से दोस्ती भी कर लेते हैं.

जापानी दर्शक हमेशा से वर्ल्ड कप फुटबॉल में स्टेडियम को साफ करके जाने के लिए जाने जाते हैं. (AI Photo)

तब हार के बाद भी सफाई करके निकले थे

जापान के प्रशंसक सबसे पहले 2018 में रूस में हुए विश्व कप में अपने साफ-सुथरे व्यवहार के लिए वायरल हुए थे. यहां तक कि उस प्रतियोगिता में एक दर्दनाक हार के बाद भी. उन्हें प्री क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम ने मैच के आखिरी मिनट में हराया था, जबकि वे दो गोल से आगे थे.

उस मैच के बाद जापान के खिलाड़ियों ने अपने चेंजिंग रूम को भी बहुत साफ-सुथरा छोड़ा. उसमें रूसी भाषा में ‘धन्यवाद’ लिखा हुआ एक हस्तलिखित नोट भी रखा. चार साल बाद कतर वर्ल्ड कप में भी यही स्थिति थी, जहां जापान ने जर्मनी और स्पेन के खिलाफ अपनी कुछ सबसे यादगार जीत हासिल कीं. ग्रुप ई में टॉप पर रही.

जापानी लोगों के लिए यह एक सामान्य बात है. जब वो किसी जगह को छोड़ते हैं तो उसे पहले से अधिक साफ-सुथरा करके छोड़ते हैं. उनकी इस आदत की तारीफ हर कोई करता है. जापानी फैंस जहां भी जाते हैं, चाहे वो क्लब मैच हो या फ्रेंडली या फिर वर्ल्ड कप का मुकाबला, वो हमेशा स्टेडियम और कभी-कभी ड्रेसिंग रूम भी साफ करके जाते हैं.

जापान में बच्चों को स्कूल से ही सफाई के महत्व के बारे में बताया जाता है. बच्चे स्कूल में अपनी क्लास रूम और दूसरी जगहों की सामूहिक सफाई करते हैं

क्यों करते हैं ऐसा

जापान में स्कूल से बच्चों को सिखाया जाता है कि “जो जगह इस्तेमाल की, उसे बेहतर या कम से कम वैसी ही छोड़ो”. उनकी संस्कृति कहती है कि दिखावा मत करो बल्कि आदत डालो. जब इस वर्ल्ड कप में भी जापानी दर्शकों ने ऐसा ही किया तो सोशल मीडिया में लोग उनकी प्रशंसा करने के लिए उमड़ पड़े. ये भी कहा गया कि दुनिया को इससे सीखना चाहिए. जापानी संस्कृति में सम्मान और सामूहिक सद्भाव सबसे महत्वपूर्ण है. विरोध को भी सम्मानजनक तरीके से व्यक्त किया जाता है.

जापान में स्कूलों में एक खास व्यवस्था है -“ओ-सोजी” यानि सामूहिक सफाई. ये कोई सज़ा नहीं, बल्कि पाठ्यक्रम का हिस्सा है. बच्चे कक्षाओं, गलियारों और यहां तक कि शौचालयों की सफाई एक साथ करते हैं. इसे एक खेल की तरह अनुभव कराया जाता है, ताकि ये एक आदत और साझा जिम्मेदारी बन जाए. इससे उनमें अपने इस्तेमाल की जगह को साफ रखने की भावना विकसित होती है.

जापानी संस्कृति में “मेइवाकू” यानि दूसरों के लिए परेशानी से बचना बहुत ज़रूरी है. स्टेडियम की सफाई इसी सोच का विस्तार है. ये एक सार्वजनिक स्थान के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करने का तरीका है.

ये व्यवहार जापानी कहावत “तात्सु तोरी अतो वो दोरोसाज़ु” (जाता पक्षी अपना निशान मैला नहीं करता) को भी दिखाता है, यानी जाने से पहले जगह को वैसा ही छोड़ना जैसा मिला था. इसके अलावा, शिंटो और बौद्ध धर्म में सफाई को मानसिक शुद्धि और सम्मान का प्रतीक माना जाता है.

क्या जापानियों के घर सबसे साफ होते हैं?

जापानी घर अपनी साफ-सफाई और व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध हैं. यहां सफाई कोई बड़ा काम नहीं है. हर चीज़ की अपनी एक निश्चित जगह होती है. परिवार के सभी सदस्य रोज़ाना 10 मिनट निकालकर चीज़ों को उनकी जगह रखते हैं. सतहों को साफ करते हैं. यह एक आदत है, कोई बोझ नहीं.

जापानी घरों में बाहर के जूते उतारकर अंदर “इनडोर शूज़” या मोज़े पहने जाते हैं, ताकि बाहर की गंदगी अंदर न आए. घर में बच्चों को भी अपना सामान संभालने और सफाई में हिस्सा लेने की शिक्षा दी जाती है, जो उन्हें जीवन का एक कौशल सिखाता है.

जापान की वो बातें जो सीखने लायक हैं

समय की पाबंदी – जापान में समय का सम्मान करना दूसरों का सम्मान करना है. ट्रेनें अगर कुछ सेकेंड भी लेट हो गईं तो ड्राइवर और गार्ड सभी पैसेंजर्स से माफी मांगते हैं. देर होना दूसरों के समय की बर्बादी माना जाता है. ये अनुशासन और विश्वसनीयता का प्रतीक है.

सम्मान और विनम्रता – झुककर अभिवादन और विनम्र शब्दों का इस्तेमाल करके वो दूसरों का सम्मान करते हैं. समूह की सद्भावना को हमेशा व्यक्तिगत इच्छा से ऊपर रखते हैं. दा बोलकर दिखावे की कोशिश नहीं करते

स्वच्छता और व्यवस्था – सड़कें बिना कचरा डिब्बों के भी साफ रहती हैं क्योंकि लोग कचरा अपने पास रखकर ठीक जगह फेंकते हैं. ये चीज वो घर से लेकर हर जगह लागू करते हैं.

कड़ी मेहनत और परफेक्शनिज्म – वो कड़ी मेहनत और समर्पण दिखाते हैं. धैर्य रखते हैं. छोटी-छोटी चीजों में भी ध्यान देते हैं.



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