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Opinion on doping in Indian Wrestling: मेडल जीतने से पहले डोप टेस्ट में हार रहे भारत के पहलवान! आखिर जिम्मेदार कौन?

Admin by Admin
September 11, 2026
in खेल
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Opinion on doping in Indian Wrestling: मेडल जीतने से पहले डोप टेस्ट में हार रहे भारत के पहलवान! आखिर जिम्मेदार कौन?


Last Updated:September 11, 2026, 00:25 IST

एशियन गेम्स से ठीक पहले तीन-तीन पहलवानों के डोप टेस्ट में फेल होना कई सवाल खड़े करते हैं. कौन से सप्लीमेंट खिलाड़ियों को दिए जा रहे हैं? उनकी जांच कौन करता है? कैंप में एंटी डोपिंग नियम बताए जाते हैं या नहीं? और सबसे अहम सवाल अगर कोई खिलाड़ी डोप टेस्ट में पॉजिटिव आता है तो ये सिर्फ उसकी जिम्मेदारी है या उस पूरे सिस्टम की.

मेडल जीतने से पहले डोप टेस्ट में हार रहे भारत के पहलवान! आखिर जिम्मेदार कौन?Zoom

एशियन गेम्स से पहले डोप टेस्ट में भारतीय पहलवान फेल

नई दिल्ली: जरा सोचकर देखिए और खुद पर हंसिए कि जो देश ओलंपिक की मेजबानी मांग रहा हो, वह अपने खिलाड़ियों को डोपिंग से नहीं बचा पा रहा. भारतीय कुश्ती के लिए इससे ज्यादा शर्मनाक और क्या होगा. अगले हफ्ते से शुरू होने जा रहे एशियन गेम्स से ठीक पहले उसके तीन-तीन पहलवान बिना मैट पर उतरे ही डिस्क्वालीफाई कर दिए गए. मेंस फ्रीस्टाइल 86KG वेट कैटेगरी में मुकुल दहिया और ग्रीको रोमन 130 किग्रा वर्ग के दीपांशु के बाद अब दीपक भी डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए हैं. यानी भारत ने सिर्फ तीन प्लेयर्स नहीं गंवाए हैं बल्कि कुछ वेट कैटेगरी में उसकी चुनौती ही खत्म हो गई.

चलिए आपको थोड़ी और आसान भाषा में समझा देते हैं कि अपने एथलीट्स को मेडल के लिए दांव-पेंच सिखाना छोड़कर अब हमारे कोच और खेल अधिकारी ये हिसाब लगाने में बिजी हैं कि किस वेट कैटेगरी में डोपिंग की वजह से जगह खाली हो गई. इस घटना ने पूरे खेल सिस्टम पर सवाल उठा दिया है. एशियन गेम्स सिर पर है. अगले कॉमनवेल्थ गेम्स के हम मेजबान हैं. 2036 ओलंपिक की मेजबानी के दावेदार हैं और हमारे कैम्प्स में खिलाड़ी डोपिंग कर रहे हैं.

ये सिर्फ पहलवानों की गलती मानकर फाइल बंद कर देने का मामला नहीं है. सवाल हैं कि एक खिलाड़ी इंटरनेशनल इवेंट से पहले प्रतिबंधित पदार्थ के साथ कैसे टीम तक पहुंच गया? अगर खिलाड़ी अनजान था तो उसे जानकारी देने की जिम्मेदारी किसकी थी? अगर सप्लीमेंट या दवा के जरिए गलती हुई तो उसकी मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी किसकी थी?

ये सिर्फ डोपिंग का मामला नहीं है बल्कि हमारे स्पोर्ट्स कल्चर पर भद्दा मजाक है. कहने को भले ही कुश्ती व्यक्तिगत खेल है, लेकिन कुश्ती में खिलाड़ी के साथ फिजियो, डॉक्टर, सपोर्ट स्टाफ की लंबी-चौड़ी टीम होती है. और उन सबसे ऊपर होता है ‘महासंघ’. लेकिन इंडिया है साहब! यहां जब आग लगती है तभी कुंआ खोदा जाता है. पूरा सिस्टम सिर्फ गलती के बाद ही जागता है.

अगर आप खेल प्रेमी हैं या न्यूज चैनल/अखबार/वेबसाइट जैसी किसी भी संस्था के माध्यम से ‘खबरदार’ यानी कि समाचार पढ़ते हैं तो जानते होंगे कि भारतीय खेल में डोपिंग आम बात है. 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स से ठीक पहले भारत के चार पहलवान डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे और उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया था. भारत में एथलीटों के बीच सप्लीमेंट, ड्रग्स और प्रतिबंधित पदार्थों को लेकर कोई जागरुकता नहीं है. यहां ‘राम राज्य’ चल रहा है यानी जिसे जो मन आए वो करो. सवाल उठता है कि नेशनल कैम्प्स में प्लेयर्स को सिर्फ ट्रेनिंग कराई जाती है या ये भी पढ़ाया-लिखाया जाता है कि शरीर में क्या डालना है और क्या नहीं?

सवाल पहलवानों पर भी उठने चाहिए क्योंकि अगर उन्हें ये भी नहीं पता कि वह इंटरनेशनल इवेंट्स के दौरान वह शरीर में क्या डाल सकते हैं और क्या नहीं तो मामला बेहद गंभीर है. क्योंकि इंटरनेशनल रेसलर सिर्फ ताकत और तकनीक से तैयार नहीं होता उसके एंटी डोपिंग नियमों की भी पूरी जानकारी होनी चाहिए.

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Anshul TalmaleDeputy News Editor

अंशुल तलमले फरवरी 2025 से नेटवर्क18 ग्रुप में डिप्टी न्यूज एडिटर की जर्सी पहनकर स्पोर्ट्स डेस्क की कप्तानी कर रहे हैं. यहां स्पोर्ट्स कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल डायरेक्शन एंड स्ट्रे…

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Location :

New Delhi,Delhi

First Published :

September 11, 2026, 00:25 IST



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