भारतीय जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
अस्मिता डे ने शुक्रवार को महिलाओं के 48 किग्रा फाइनल में कनाडा की हेइडी क्वाच को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में भारत को पहला मेडल दिलाया। अस्मिता डे ने सेमीफाइनल में स्कॉटलैंड की समर शॉ को ‘यूको’ से हराकर महिलाओं के 48 किग्रा फाइनल में अपनी जगह पक्की की थी। इसके साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के चार गोल्ड सहित 18 पदक हो गए हैं।
23 वर्षीय त्रिपुरा की अस्मिता डे फाइनल शुरू होने पर थोड़े पीछे रह गई थी। उन्हें एक यूको मिला और पेनल्टी का भी सामना करना पड़ा। जिसकी वजह से कनाडा की हीडी क्वाच मैच पर हावी हो गईं। लेकिन अस्मिता ने कमाल की वापसी की। उन्होंने बीच मुकाबले में बहुत आक्रामक खेल दिखाया और चार मिनट के मैच के आधे समय के बाद स्कोर 1-1 बराबर कर दिया। नियमित समय के दौरान दोनों जूडोका लगातार तीखे हमलों के बावजूद कोई निर्णायक स्कोर नहीं बना पाए। इससे मैच गोल्डन स्कोर पीरियड में चला गया, जहां पहला स्कोर करके अस्मिता ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
अस्मिता डे का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में सफर
महिला 48 किग्रा वर्ग में युवा खिलाड़ी अस्मिता डे ने बेहद रोमांचक मुकाबले में स्कॉटलैंड की समर शॉ को ‘युको’ के आधार पर हराकर फाइनल में प्रवेश किया। एक समय हार की कगार पर पहुंच चुकीं अस्मिता ने शानदार वापसी करते हुए जीत दर्ज की। स्वर्ण पदक के मुकाबले में उनका सामना कनाडा की हेइडी क्वाच से होगा। इससे पहले अस्मिता ने स्कॉटलैंड की ईवा इविंग को ‘इप्पोन’ से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई थी। जूडो में ‘इप्पोन’ को सर्वोच्च स्कोर माना जाता है जिसके मिलते ही मुकाबला समाप्त हो जाता है। ‘युको’ अपेक्षाकृत कम अंक वाला स्कोर है।






