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Manu Bhaker broken after Jaspal rana death: मनु भाकर की मां सुमेधा भाकर ने कहा कि उनकी बेटी इस समय कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है. कोच जसपाल राणा के मौत की खबर सुनते ही मनु स्तब्ध रह गईं. वह इस समय देहरादून में हैं. जहां वह ट्रायल देने के लिए गई हुई हैं.मनु के साथ में उनकी मां भी हैं. मां ने बताया कि मनु के लिए इस वक्त कुछ भी कह पाना मुमकिन नहीं है.
जसपाल राणा की मौत से स्तब्ध हैं मनु भाकर.
नई दिल्ली. भारतीय खेल जगत आज गहरे शोक में डूब गया है. पेरिस ओलंपिक 2024 में दो कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचने वाली देश की स्टार निशानेबाज मनु भाकर के मार्गदर्शक, गुरु और महान निशानेबाज जसपाल राणा का शुक्रवार को दिल का दौरा पड़ने से असामयिक निधन हो गया. 49 वर्षीय जसपाल राणा के अचानक चले जाने से न केवल खेल प्रेमियों की आंखें नम हैं, बल्कि उनका सबसे प्रिय शिष्य और उनका परिवार इस गहरे सदमे से उबर नहीं पा रहा है. इस दुखद घड़ी में मनु भाकर की मां सुमेधा भाकर ने भरे गले से बताया कि मनु अभी इस स्थिति में नहीं है कि वह अपने ‘सर’ के निधन पर कुछ भी कह सके. यह क्षति उनके लिए इतनी व्यक्तिगत और गहरी है कि शब्द कम पड़ गए हैं.
जसपाल राणा (Jaspal Rana) और मनु भाकर (Manu Bhaker) का रिश्ता सिर्फ एक कोच और खिलाड़ी का नहीं था. यह रिश्ता था अटूट विश्वास, कड़ी तपस्या और खोए हुए सम्मान को वापस पाने की एक जिद का. एक समय ऐसा आया था जब मनु भाकर का हौसला डगमगा रहा था, लेकिन जसपाल राणा ने अपनी इस होनहार शिष्या का हाथ थामा।.उन्होंने न केवल मनु की तकनीक को सुधारा, बल्कि मानसिक रूप से उन्हें एक चट्टान की तरह मजबूत बनाया. इसी जुगलबंदी का नतीजा था कि पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से लिखवा दिया. जब मनु के गले में दो-दो ओलंपिक पदक सजे, तो पोडियम के पीछे खड़े जसपाल राणा की आंखों में एक संतुष्टि और गर्व के आंसू थे. आज जब मनु सफलता के शिखर पर हैं, तब उनका यह मार्गदर्शक हमेशा के लिए शांत हो गया.
जसपाल राणा की मौत से स्तब्ध हैं मनु भाकर.
मां बोलीं-स्तब्ध है मनु भाकर
देहरादून में इस समय राष्ट्रीय निशानेबाजी शिविर चल रहा है, जहां मनु भाकर आगामी विश्व कप के ट्रायल्स के लिए पसीना बहा रही थीं. शुक्रवार को भी उन्होंने अपने ट्रायल्स पूरे ही किए थे कि तभी इस वज्रपात जैसी खबर ने सब कुछ थाम दिया. मनु भाकर की मां सुमेधा ने कहा, ‘मनु के लिए इस वक्त कुछ भी कह पाना मुमकिन नहीं है. वह इस स्थिति में ही नहीं है कि अपने जज्बातों को शब्दों में ढाल सके. हम दोनों इस समय देहरादून में ही हैं. जैसे ही हमें यह खबर मिली, हम दिल्ली के लिए निकलने वाले थे, लेकिन हमें यहीं रुकने के लिए कहा गया क्योंकि सर का पार्थिव शरीर भी उनकी जन्मभूमि उत्तराखंड ही लाया जा रहा है.’ सुमेधा की आवाज में छिपा दर्द यह बताने के लिए काफी था कि पूरा परिवार इस समय किस कदर टूट चुका है. गुरु का जाना एक खिलाड़ी के लिए उसके सुरक्षा कवच के छिन जाने जैसा होता है, और मनु इस समय इसी शून्य को महसूस कर रही हैं.
देवभूमि में अंतिम विदाई की तैयारियां
जसपाल राणा का जन्म उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों में हुआ था, और नियति उन्हें अपने अंतिम सफर के लिए भी इसी देवभूमि में वापस ले आई है. उनके पार्थिव शरीर को देहरादून स्थित उनके निवास स्थान और उनके द्वारा स्थापित शूटिंग रेंज में रखा जाएगा, ताकि उनके परिजन, देश के तमाम एथलीट्स और उनके चाहने वाले अपने इस नायक के अंतिम दर्शन कर सकें. मनु भाकर भी अपने गुरु को अंतिम विदाई देने के लिए देहरादून में ही मौजूद रहेंगी. जिस शूटिंग रेंज की आवाजों के बीच दोनों ने देश को गौरवान्वित करने के सपने बुने थे, आज उसी जगह सन्नाटा पसरा है और आंखें नम हैं.
एक युग का अंत
जसपाल राणा ने महज एक खिलाड़ी के रूप में ही देश को अनगिनत मेडल नहीं दिलाए (जिसमें एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक शामिल हैं), बल्कि एक कोच के रूप में उन्होंने भारत में निशानेबाजी की पूरी एक नई नस्ल तैयार की. उनका कड़क स्वभाव, अनुशासन और खेल के प्रति उनका समर्पण ही उनकी पहचान था. 49 साल की उम्र जाने की उम्र नहीं होती. अभी मनु और जसपाल राणा की इस जोड़ी को देश के लिए न जाने कितने और कीर्तिमान स्थापित करने थे, कितने और पदकों पर कब्जा करना था. लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था. जसपाल राणा भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन मनु भाकर के हर उस शॉट में उनकी दी हुई सीख जिंदा रहेगी जो आने वाले समय में देश के लिए मेडल जीतेगी. जब-जब मनु पोडियम पर खड़ी होंगी, उनकी नजरें अपने उस गुरु को जरूर ढूंढेंगी जो हमेशा पीछे खड़े होकर मुस्कुराया करते थे. देश अपने इस महान सपूत और द्रोणाचार्य को हमेशा नमन करता रहेगा.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें






