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मुंबई में इनकम टैक्स संभालने वाला एक अफसर जब मैट पर उतरता है तो बड़े-बड़े सूरमा पानी मांगने लगते हैं. बात हो रही है सतना के प्रतीक सिंह की जिन्होंने पुणे में आयोजित कूडो नेशनल चैंपियनशिप में लगातार 10वां गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया. टैक्स वसूलने वाले इस जांबाज खिलाड़ी की इस ऐतिहासिक कामयाबी ने पूरे मध्य प्रदेश को गर्व से भर दिया है.
सतना: खेल की दुनिया में चैंपियन बनना शायद आसान हो सकता है लेकिन उस नंबर वन की कुर्सी पर लगातार 10 साल तक बैठे रहना सबसे मुश्किल काम है. जरा सोचिए एक ऐसा खिलाड़ी जो पूरे एक दशक से अपने खेल में बादशाहत कायम किए हुए हैं. हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के गोल्डन बॉय के नाम से जाने जाने वाले सतना के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रतीक सिंह की. हाल ही में 16 मई से 22 मई 2026 तक महाराष्ट्र के पुणे में कूडो नेशनल चैम्पियनशिप कप का भव्य आयोजन किया गया था.
इस टूर्नामेंट में देश के 26 राज्यों से आए धाकड़ खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया. लेकिन जब सतना के शेर प्रतीक मैट पर उतरे तो सब फीके पड़ गए. प्रतीक ने सीनियर -240 पीआई वर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने चार कठिन मुकाबलों में जबरदस्त जीत हासिल की जिसमें राजस्थान और गुजरात के खिलाड़ियों के खिलाफ दो शानदार नॉकआउट जीत भी शामिल रहीं. इसी के साथ उन्होंने लगातार 10वीं बार राष्ट्रीय चैम्पियन बनने का बड़ा गौरव हासिल किया.
चैंपियन बने रहना हकीकत में आसान नहीं
प्रतीक इससे पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का परचम लहरा चुके हैं और देश का नाम रोशन कर चुके हैं. लोकल 18 से एक खास और आमने-सामने की बातचीत में उन्होंने कहा यह मेरे साथ-साथ पूरे शहर के लिए बहुत गर्व की बात है कि उनके यहां से कोई लड़का 10वीं बार नेशनल चैंपियन बना है. उनका मानना है कि एक एथलीट के लिए सबसे बड़ा टारगेट अपनी कंटीन्यूटी को बनाए रखना होता है. हर बार नए चैलेंज के अलावा नए युवा और फुर्तीले खिलाड़ी भी कम्पटीशन में आते हैं. कई बार आपको गंभीर चोट लग जाती है ऐसे में अपनी चैंपियन वाली जगह को बचाए रखना सच में बहुत ज्यादा मुश्किल हो जाता है.
पसीने से लिखी जाती है सफलता की कहानी
प्रतीक ने बताया कि एक दशक तक चैंपियन बने रहना बोलने और सुनने में जितना आसान लगता है, हकीकत में ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. इसके लिए उन्हें हर रोज सुबह 5 बजे उठकर ग्राउंड पर कड़ी मेहनत और पसीना बहाना पड़ता है. उनकी दिन भर की ट्रेनिंग में फिजिकल, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, स्किल डेवलप और टेक्निकल ट्रेनिंग जैसी अहम चीजें शामिल होती हैं. यही ट्रेनिंग का कठिन सेशन शाम को 4:30 बजे से शुरू होकर रात 9 बजे तक लगातार चलता है. कई गंभीर इंजरीज का दर्द सहने के अलावा उन्हें अपनी निजी जिंदगी में फैमिली फंक्शन और शादियों जैसे कई खास पलों का सैक्रिफाइस भी करना पड़ता है
आयकर विभाग का मिला भरपूर साथ
अपनी खेल की उपलब्धियों के साथ-साथ प्रतीक अपनी पेशेवर जिंदगी में भी सफल हैं. वर्तमान में वे मुंबई में आयकर विभाग में स्पोर्ट्स कोटा के तहत अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उन्होंने खुशी जताते हुए बताया कि इस चैंपियनशिप से गोल्ड मेडल लेकर लौटने के बाद मुझे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों से भी खूब बधाइयां मिलीं. विभाग का हमेशा पूरा सहयोग रहता है, समय आने पर ड्यूटी लीव आसानी से मिल जाती है जिससे मैं अपने गेम की प्रैक्टिस कर पाता हूं और टूर्नामेंट खेल पाता हूं. अंत में उन्होंने कहा कि जब जिंदगी का पहला मेडल जीता था तो उम्मीद नहीं थी कि वो इतने सालों तक जीत मेंटेन रख पाएंगे लेकिन आज इसी खेल ने उन्हें एक अच्छी सरकारी नौकरी और समाज में भरपूर इज्जत भी दिलाई है.
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