नई दिल्ली: कहते हैं किस्मत कभी-कभी वहां ले जाती जहां हम नहीं जाना चाहते हैं. ऐसी कहानी है लंबे कद काठी के शॉट पुट यानी गोला फेंक खिलाड़ी समरदीप सिंह गिल का, जिन्होंने फेडरेशन कप में 20.46 मीटर का थ्रो कर कॉमनवेल्थ गेम्स का टिकट पक्का किया. सिर्फ टिकट नहीं, समरदीप ने दिग्गज तजिंदरपाल सिंह तूर को हराया जो पिछले एक दशक से भारत में शॉट पुट खेलों में अपना दबदबा कायम किए हुए थे.बता दें कि समरदीप सिंह के गोला फेंक खिलाड़ी बनने की कहानी बहुत रोचक है.
दरअसल, समरदीप एथलेटिक्स में नहीं आना चाहते थे. समरदीप स्कूली दिनों में एक मिडियम पेसर गेंदबाज थे और उनका सपना था कि वह एक क्रिकेटर बने. इसके लिए वह मैदान पर कड़ी मेहनत भी करते थे. यही कारण है कि समरदीप ने जिला स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था. समरदीप के पिता महेंद्र सिंह गिल एक ऐसे नौकरी में थे जहां समय-समय पर तबादला होता रहता था. इसकी वजह से समरदीप के खेल पर भी असर पड़ा, जिससे क्रिकेट उनसे दूर हो गया.
रतलाम में समरदीप ने पहली बार उठाया गोला
समरदीप के पिता की पोस्टिंग जब रतलाम में हुई तो वह चाहते थे कि उनका बेटा फिट रहे और उन्होंने उसे रेलवे ग्राउंड भेजना शुरू कर दिया. वहां जगमिंदर नाम के एक कोच थे. वहीं पास में एक शॉटपुट पड़ा हुआ था. समरदीप ने उसे उठा लिया. यहीं से उनकी शॉटपुटर बनने का सफर शुरू हुआ. समरदीप के लिए शुरुआती साल इतने आसान नहीं थे. अपने जूनियर करियर के दौरान टखने की चोट ने उन्हें काफी पीछे धकेल दिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. समरदीप ने टखने की सर्जरी कराई और फिट होकर फिर से वापसी की.
‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में समरदीप के मौजूदा कोच संदीप सिंह ने कहा, “उनकी तकनीक उतनी अच्छी नहीं थी और सर्कल में घूमते समय उनके टखने में चोट लग गई. लेकिन सर्जरी के बाद वह मेरे पास ट्रेनिंग के लिए आए और यहीं से समरदीप के चौंपियन बनने का सफर शुरू हुआ.” संदीप के मार्गदर्शन में सुधार बहुत तेजी से हुआ. 2024 तक समरदीप ने पहली बार 19 मीटर का आंकड़ा पार कर लिया था. अगले साल उनकी पहली बड़ी और धमाकेदार जीत आई इंटर-स्टेट चैंपियनशिप में जहां उन्होंने 19.82 मीटर का थ्रो किया जो उस समय उनका पर्सनल बेस्ट था. सिर्फ इतना ही नहीं, समरदीप ने पहली बार तूर को हराया था. इस जीत ने उन्हें एक ऐसे इवेंट में एक गंभीर दावेदार के रूप में स्थापित कर दिया जो सालों से सिर्फ एक ही व्यक्ति के नाम रहा था.
नेशनल रिकॉर्ड होल्डर हैं तजिंदरपाल सिंह तूर
तूर ने लगभग एक दशक के बेहतर हिस्से में भारतीय शॉटपुट पर अपना दबदबा बनाए रखा है. उनके नाम 21.77 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड है जो उन्होंने 2023 में बनाया था, और वह दो बार के एशियाई खेलों के चैंपियन हैं. सालों तक कोई भी लगातार उनके करीब नहीं आ सका. हालांकि, करनवीर सिंह ने उम्मीद जगाई थी लेकिन वे इसे बरकरार नहीं रख पाए. तूर 21.03 मीटर के सीजन के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रांची पहुंचे थे. यानी वह कमजोर नहीं पड़े थे, बल्कि उन्हें पहली बार इतनी कड़ी चुनौती मिल रही थी. रविवार को वह 20.07 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहे.
तूर से समरदीप सिंह लेते हैं प्रेरणा
बता दें कि समरदीप सिंह ने अपने पूरे करियर में तूर का अध्ययन किया है और उनकी सराहना की है इस जीत को लेकर काफी संभलकर बोले. “मैं तजिंदर पाजी को एक प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखता. उन्हें देखकर मुझे प्रेरणा मिलती है. उनके जैसा सेंटर ऑफ बैलेंस किसी और के पास नहीं है.” उन्होंने आगे कहा, “मेरे थ्रो के दौरान, वह लगातार मेरा हौसला बढ़ाते रहते हैं और मुझे बेहतर करने के लिए कहते हैं. जब भी मैं उनके साथ प्रतिस्पर्धा करता हूं उनके कोच भी मुझे सुझाव देते रहते हैं कि कहां सुधार करना है.”
6 फीट 5 इंच के समरदीप का कद इस खेल के लिए बिल्कुल उपयुक्त है. उनके कोच संदीप ने कहा, “इस लंबाई से उन्हें काफी अच्छी रीच मिलती है और उनका शरीर शॉटपुट के लिए एकदम सही है.” उनका मानना है कि अभी उनकी क्षमताओं का शिखर बहुत दूर है. सर्कल में उनके मूवमेंट को सुधारने जैसे तकनीकी बदलाव अभी बाकी हैं हम उस पर काम करेंगे.”
राष्ट्रमंडल खेलों में समरदीप पर मेडल जीतने की जिम्मेदारी
राष्ट्रमंडल खेलों की टीम में तूर की अनुपस्थिति के कारण, समरदीप इन खेलों में भारत की शॉटपुट की उम्मीदों का भार संभालेंगे. उन्होंने कहा, “मैं खुश हूं कि इससे मुझे अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा. मैं वहां अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ सुधारने और पदक जीतने की पूरी कोशिश करूंगा.” यह उस एथलीट के लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, जिसने इस साल की शुरुआत तक 19.82 मीटर से आगे गोला नहीं फेंका था.
