संवाददाता@रामबली मिश्रा……

चंद्रप्रभा साहित्यिक संस्था, चकिया के तत्वावधान में आदित्य पुस्तकालय में मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार मनोज द्विवेदी ‘मधुर’ ने वाणी वंदना प्रस्तुत कर किया। इसके बाद विभिन्न कवियों ने देशभक्ति, प्रकृति, सामाजिक सरोकार, लोकभाषा और समकालीन विषयों पर अपनी रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं की खूब वाहवाही बटोरी।
काव्य पाठ की शुरुआत मनोज द्विवेदी ‘मधुर’ ने हिंदी की महिमा पर आधारित रचना से की। धर्मेंद्र त्रिपाठी, राजेश विश्वकर्मा ‘राजू’, बंधु पाल ‘बंधु’, प्रदीप पाठक, आनंद माया मार्गदर्शक, अलियार प्रधान, राजेंद्र प्रसाद जूनियर, हरिवंश सिंह ‘बवाल’, जगजीवन, रामप्रवेश ‘झाऊ’, गौरी शंकर मौर्य और मिथिलेश सिंह सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी-अपनी कविताओं के माध्यम से समाज, संस्कृति, मानवीय संवेदनाओं और लोकजीवन को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में राजेश विश्वकर्मा ‘राजू’ की कविता “बदरवा अब न जिया तरसाओ” विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। गोष्ठी की अध्यक्षता बंधु पाल ‘बंधु’ ने की, जबकि संचालन हरिवंश सिंह ‘बवाल’ ने किया। अंत में आयोजकों ने सभी साहित्यकारों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया।





