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Sonbhadra । ओबरा तहसील क्षेत्र स्थित सोन नदी में कथित अवैध बालू खनन और बड़ी मशीनों के उपयोग के विरोध में निषाद समाज एवं क्षेत्रीय ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि खनन गतिविधियों के कारण नदी की प्राकृतिक जलधारा बाधित हो रही है, जिससे निषाद समुदाय की आजीविका और पर्यावरण दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जिलाधिकारी से मुलाकात के बाद प्रदर्शनकारियों को जांच और कार्रवाई का आश्वासन मिला।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रोहित बिंद ने कहा कि निषाद समाज के लोग वर्षों से सोन नदी में खेती और मत्स्य पालन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते आ रहे हैं। उनका आरोप है कि खनन माफियाओं द्वारा नदी की धारा को प्रभावित कर बड़े पैमाने पर बालू की लोडिंग की जा रही है। इससे नावों का संचालन बाधित हो रहा है और नदी किनारे खेती करने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर बालू निकासी की जा रही है तथा कई खनन स्थलों पर बड़ी लिफ्टर मशीनों के माध्यम से नदी को बांधकर कार्य कराया जा रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है।

वहीं राजबली उर्फ सनी ने आरोप लगाया कि अघोरी क्षेत्र की बालू साइटों पर लिफ्टर मशीनों और जेसीबी के जरिए अवैध खनन किया जा रहा है। उनका कहना था कि नदी के बीच मशीनें लगाकर खनन करने की कोई वैधानिक अनुमति नहीं है। उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों के कारण निषाद समाज के लोगों के आवागमन में कठिनाई बढ़ गई है तथा नदी क्षेत्र में खेती करने वालों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि खनन के चलते मछलियों, कछुओं और अन्य जलीय जीवों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। उनका दावा है कि कई बार जलीय जीव मृत अवस्था में पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दी गई थीं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिला।
निषाद समाज और ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन में संलिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा नदी की प्राकृतिक धारा और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।





