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अंतरिक्ष या ब्रह्मांड का अध्ययन कर रहे खगोलविज्ञानियों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. चिली की वेरा सी रुबिन ऑब्जर्वेटरी ने ब्रह्मांड की सबसे साफ तस्वीर जारी की है. इसमें 5 लाख गैलेक्सी और 50 हजार तारे दिख रहे हैं. यह दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल कैमरे से ली गई है.
5 लाख गैलेक्सी, 50 हजार सितारे एक ही तस्वीर में कैद, दुनिया के सबसे बड़े कैमरे ने दिखाया ब्रह्मांड का खूबसूरत नजारा
अंतरिक्ष और ब्रह्मांड का अध्ययन करने वाले खगोलशास्त्रियों को बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. चिली में स्थित वेरा सी रुबिन ऑब्जर्वेटरी ने आकाश के उस हिस्से की अब तक की सबसे साफ तस्वीर जारी की है, जिसका अध्ययन अभी तक सबसे ज्यादा बार किया गया है. इस गहरी और सबसे साफ तस्वीर के एक ही फ्रेम में करीब 5 लाख से ज्यादा गैलेक्सी और 50 हजार से ज्यादा तारे नजर आ रहे हैं. सबसे खास बात है कि कॉसमॉस के इस सबसे खूबसूरत नजारे को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल कैमरे ने कैद किया है.
ब्रह्मांड के खूबसूरत नजारों को समेटे यह तस्वीर रुबिन के 3.2 गीगापिक्सेल वाले एलएसएसटी कैमरे से बनाई गई है. यह कैमरा 8.4 मीटर के सिमोनयी सर्वे टेलीस्कोप पर लगा है. हालांकि भले ही इस तस्वीर में एक साथ इतने बड़े अंतरिक्ष को कवर किया गया है लेकिन दिलचस्प बात ये है कि यह तस्वीर आमतौर पर तस्वीरें खींचने के लिए इस्तेमाल होने वाले कैमरों की तरह नहीं ली गई, यानि एक ही झटके में फोटो नहीं ली गई.बल्कि वैज्ञानिकों ने सैकड़ों अलग-अलग तस्वीरों को एक के ऊपर एक रखकर उन्हें स्टैक किया. इससे दूर और कमजोर रोशनी वाली गैलेक्सी भी साफ दिखने लगीं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक तस्वीर में सर्पिल आकार की गैलेक्सी, चिकनी दीर्घवृत्ताकार गैलेक्सी, आपस में टकरा रही गैलेक्सी और बहुत दूर के ब्रह्मांड की हल्की लाल गैलेक्सी साफ नजर आ रही हैं. हालांकि हमारे आकाशगंगा के कुछ चमकीले तारे ही आगे दिख रहे हैं. इसमें बाकी सब दूर का ब्रह्मांड है.
वैज्ञानिकों की ओर से बताया गया कि यह इलाका कॉसमॉस फील्ड कहलाता है. खगोलविद पिछले दो दशक से इसे देख रहे हैं. 2003 में हबल टेलीस्कोप से इसकी शुरुआत हुई थी. तब से दुनिया के कई बड़े टेलीस्कोप रेडियो तरंगों से लेकर एक्स-रे तक इस हिस्से पर नजर गड़ाए हुए हैं.
कॉसमॉस फील्ड इसलिए खास है क्योंकि यह हमारी आकाशगंगा के घने हिस्से से दूर है. यहां पास के तारे और धूल कम हैं. इसलिए दूर की गैलेक्सी साफ दिखती हैं. इन गैलेक्सी की रोशनी अरबों साल पहले निकली थी. यानी यह तस्वीर ब्रह्मांड के पुराने समय का भी नजारा दिखाती है.
फिलहाल खगोलविज्ञानी से इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं और अब रुबिन ऑब्जर्वेटरी इस फील्ड को बार-बार फोटो खींचकर देखेगी. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह उसके 10 साल के लेगेसी सर्वे ऑफ स्पेस एंड टाइम (एलएसएसटी) मिशन का हिस्सा है. बार-बार देखने से सुपरनोवा जैसी अल्पकालिक घटनाएं भी पकड़ में आएंगी.
यह तस्वीर अर्ली डेटा प्रीव्यू-2 (ईडीपी2) का हिस्सा है. इसमें अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 तक के वैज्ञानिक अवलोकन शामिल हैं. इसमें करीब 3000 वर्ग डिग्री आकाश का डेटा है, जो दक्षिणी गोलार्ध के दिखने वाले हिस्से का लगभग छठा हिस्सा है.
रुबिन ऑब्जर्वेटरी के निदेशक बॉब ब्लम ने कहा कि कॉसमॉस की यह तस्वीर सिर्फ शुरुआत है. आने वाले सालों में बार-बार निरीक्षण से और भी कमजोर गैलेक्सी और छोटी-छोटी घटनाएं सामने आएंगी.यह परियोजना अमेरिकी नेशनल साइंस फाउंडेशन और एनर्जी डिपार्टमेंट के ऑफिस ऑफ साइंस के संयुक्त सहयोग से चल रही है.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …
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