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बहराइच में रेलवे फाटक 41-C बंद होने से 50,000 की आबादी परेशान है. 300 मीटर का रास्ता 4 किमी हो गया. स्थानीयों के अनुसार जिस अस्पताल या बाजार पहुंचने के लिए पहले महज 300 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, अब घूमकर जाने पर वही दूरी 3 से 4 किलोमीटर हो जाती है. साधन न मिलने पर लोगों को 1 से 1.5 घंटे तक स्टैंड पर इंतजार करना पड़ता है. फाटक बंद होने के कारण एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और स्कूली बच्चों की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पाती.
बहराइच: जिले के बक्सीपुरा मोहल्ले और आसपास के इलाकों चांदमारी, नौरैया, पहाड़ा पकड़ में रहने वाली लगभग 50,000 की आबादी बीते 8 से 10 वर्षों से एक बुनियादी रास्ते के लिए तरस रही है. रेलवे के आमान परिवर्तन बड़ी लाइन निर्माण के दौरान रेलवे फाटक संख्या 41-C को पूरी तरह बंद कर दिया गया था, जिसके बाद से क्षेत्रवासियों का जीवन नारकीय बन चुका है.
300 मीटर की दूरी बनी लगभग 4 किलोमीटर का चक्रव्यूह
स्थानीय निवासियों के अनुसार, जिस अस्पताल या बाजार पहुंचने के लिए पहले महज 300 मीटर की दूरी तय करनी पड़ती थी, अब घूमकर जाने पर वही दूरी 3 से 4 किलोमीटर हो जाती है. साधन न मिलने पर लोगों को 1 से 1.5 घंटे तक स्टैंड पर इंतजार करना पड़ता है. फाटक बंद होने के कारण एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और स्कूली बच्चों की गाड़ियां समय पर नहीं पहुंच पाती. स्थानीय लोगों का दावा है कि रास्ता बंद होने और इलाज में देरी के चलते अब तक 4 से 5 लोगों की मौत और कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. स्थानीय महिलाओं ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को झेलनी पड़ रही है. दैनिक राशन-बाजार, बच्चों को नस्कूल छोड़ना और इलाज जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए महिलाओं को रोजाना जोखिम उठाकर बंद क्रॉसिंग पार करनी पड़ती है.
पीएमओ से लेकर स्थानीय प्रतिनिधियों तक गुहार
राष्ट्रीय हिंदू रक्षा मंच के जिला कार्यकारी अध्यक्ष बृजेश सनातनी ने बताया हम आमान परिवर्तन के समय से ही यानी पिछले 10 सालों से संघर्ष कर रहे हैं. हमने सांसद, विधायक, रेल मंत्री, रेल मंत्रालय, पीएमओ तक अपना प्रतिनिधित्व भेज चुके है, लेकिन बार-बार की कोशिशों के बावजूद किसी ने मदद नहीं की। ऐसा लगता है जैसे इस आबादी को बेसहारा छोड़ दिया गया है.
जनता में आक्रोश
जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है और बीते दिनों लोगों ने धरने पर बैठकर अपना विरोध भी दर्ज कराया. बहराइच से रुपईडीहा तक अन्य जगहों पर तो अंडरपास और पास दिए गए, लेकिन इस 50 हजार की आबादी को आखिर इस सुविधा से क्यों वंचित रखा गया, यह सवाल आज भी अनुत्तरित है. यहां के रहने वाले निवासियों का कहना है कि जब इस फाटक को बंद किया गया तो दूर से एक रास्ता दिया गया लेकिन वह रास्ता भी स्थाई रूप से नहीं है. सकरा होने के साथ-साथ लोगों को उधर घूम कर भी जाना पड़ता है जिससे काफी समय लग जाता है. मांग एक ही है, 41-सी के नीचे से या ऊपर से फ्लावर के माध्यम से रास्ता दिया जाए जिससे बच्चों की स्कूल वैन आपातकालीन स्थिति में एंबुलेंस और दमकल की गाड़ियां आ जा सके.
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Rajnish Kumar Yadav is a digital journalist and content publisher with over seven years of experience in print and digital media. He is currently working with News18 Digital (Local18) as a Content Publisher, wh…
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