What is Commonwealth Games: इस समय चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स पर दुनिया भर की नजरें हैं. खेलों की एनर्जी की ऐसे चुंबक की तरह होती है, जिसमें हर देखने वाले की आंखें चिपक जाती हैं. घर से लेकर दफ्तरों तक की स्क्रीन पर चल रहे गेम्स को देखकर लोग पल भर के लिए ठहर जा रहे हैं. इनमें एथलेटिक्स से लेकर स्विमिंग, जिम्नास्टिक से लेकर कुश्ती, भाला फेंक से लेकर साइक्लिंग और जूडो तक के स्पोर्ट्स शामिल हैं. जब भी खेलों के महाकुंभ की बात होती है तो ओलंपिक और एशियाई खेलों का नाम सबसे पहले जेहन में आता है. लेकिन इनके अलावा एक और बड़ा टूर्नामेंट होता है, जिसे कॉमनवेल्थ गेम्स या फिर राष्ट्रमंडल खेल कहा जाता है. भारत के खिलाड़ी भी इसमें पूरी ताकत से हिस्सा लेते हैं और कई मेडल देश के नाम करते हैं. अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि आखिर ये कॉमनवेल्थ खेल क्या होते हैं, इनका नाम ऐसा क्यों पड़ा और ये बाकी खेलों से कैसे अलग हैं? तो आइए समझते हैं इससे जुड़ी हर एक बात.
कॉमनवेल्थ खेल क्या होते हैं?
कॉमनवेल्थ गेम्स एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता है, जिसमें सिर्फ वही देश हिस्सा लेते हैं जो कभी ब्रिटिश साम्राज्य के गुलाम रहे थे. इंग्लैंड के शासन के अधीन रहे देश बाद के दौर में Commonwealth यानी राष्ट्रमंडल का हिस्सा बन गए. ओलंपिक के बाद इसको दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मल्टी-स्पोर्ट्स इवेंट माना जाता है. ओलंपिक की तरह यह खेल भी हर चार साल के अंतराल पर आयोजित किए जाते हैं.
कहां से आया कॉमनवेल्थ नाम?
ब्रिटिश राज के दौरान अंग्रेजों ने दुनिया के तमाम देशों पर कब्जा कर रखा था. समय बीतने के साथ जब ये देश अंग्रेजों के शासन से आजाद हुए तो आपसी सहयोग और शांति बनाए रखने के लिए उन्होंने मिलकर एक संगठन तैया किया, जिसे राष्ट्रमंडल यानी Commonwealth of Nations का नाम दिया गया.
राष्ट्रमंडल खेलों में भारत
इन सभी देशों का इतिहास चूंकि ब्रिटिश शासन से जुड़ा हुआ था, इसलिए जब इन देशों के बीच खेल प्रतियोगिता शुरू हुई तो उसका नाम ‘ब्रिटिश एम्पायर गेम्स’ रखा गया, जो आगे चलकर बदलते-बदले कॉमनवेल्थ गेम्स बन गया. आज के समय में इसमें कुल 74 देश शामिल हैं लेकिन मजेदार बात यह है कि इसमें से कई ऐसे देश भी खेलते हैं जो कभी ब्रिटेन के गुलाम नहीं रहे थे.
ओलंपिक और एशियाड से यह कैसे अलग है?
तीनों को ही खेलों का महाकुंभ माना जाता है लेकिन इनमें काफी फर्क होता है.
- ओलंपिक गेम्स: यह दुनिया में खेलों का सबसे बड़ा आयोजन है. मॉडर्न ओलंपिक गेम्स की शुरुआत 1896 से हुई लेकिन इसकी शुरुआत करीब 3 हजार साल पहले प्राचीन ग्रीक सभ्यता के समय से ही मानी जाती है. अभी इसमें दुनिया भर के लगभग सभी देश यानी 200 से ज्यादा ही हिस्सा लेते हैं. इसमें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं.
- कॉमनवेल्थ गेम्स: इसमें दुनिया के सारे देश हिस्सा नहीं ले सकते. इसमें सिर्फ वही देश खेलते हैं जो कॉमनवेल्थ संगठन के सदस्य हैं जैसे भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान, कनाडा. इस बार के कॉमनवेल्थ खेलों में देशों की संख्या 74 तक है. इसमें खिलाड़ियों की संख्या और खेलों के प्रकार ओलंपिक के मुकाबले कम होते हैं.
- एशियन गेम्स: इसके बारे में तो नाम से ही साफ हो रहा है कि इस टूर्नामेंट में सिर्फ एशिया महाद्वीप के देश ही आपस में मुकाबला करते हैं. इसमें ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया से मान्यता प्राप्त 45 देश हिस्सा लेते हैं. इसमें भारत और पड़ोसी देशों के साथ ही मिडिल ईस्ट के इराक, ईरान, सीरिया से लेकर सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया और चीन, जापान तक हिस्सा लेते हैं.
किन खेलों में भारत का प्रदर्शन है सबसे अच्छा?
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का दबदबा: भारत के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स सबसे सफल टूर्नामेंट्स में से एक रहे हैं. यहां का कॉम्पिटिशन ओलंपिक जितना कठिन नहीं होता, इसलिए भारत यहां हमेशा से शानदार प्रदर्शन करता आया है. भारत ने अब तक कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल मिलाकर 500 से ज्यादा मेडल (गोल्ड, सिल्वर, ब्रॉन्ज सब मिलाकर) जीते हैं. शूटिंग, बैडमिंटन, वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग और कुश्ती में भारतीय खिलाड़ी यहां सबसे आगे रहते हैं.
एशियाड खेल: एशियाई खेलों में भी भारत का प्रदर्शन लगातार सुधरा है. हाल के सालों में भारत ने एशियन गेम्स में अपने अब तक के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन यानी 100 से ज्यादा मेडल्स का रिकॉर्ड बनाया है. एथलेटिक्स, शूटिंग और नीरज चोपड़ा जैसे खिलाड़ियों की बदौलत भारत, एशिया की बड़ी खेल ताकत के तौर पर बनकर उभरा है.
ओलंपिक गेम्स: ओलंपिक में भारत का सफर थोड़ा संघर्ष भरा रहा है. हॉकी को छोड़ दें तो इंडिविजुअल खेलों में भारत को मेडल के लिए बहुत पसीना बहाना पड़ता है. हालांकि पिछले कुछ ओलंपिक से नीरज चोपड़ा, पी.वी. सिंधु, मीराबाई चानू और मनु भाकर जैसे खिलाड़ियों ने भारत के लिए ओलंपिक में गोल्ड और दूसरे मेडल जीतकर इतिहास बदला है लेकिन कुल पदकों के मामले में ओलंपिक में भारत का रिकॉर्ड कॉमनवेल्थ और एशियाड के मुकाबले अभी काफी पीछे हैं.






