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Asmita Dey wins gold in commonwealth Games: अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिलाओं के 48 किग्रा जूडो इवेंट में स्वर्णिम इतिहास रच दिया. रोमांचक फाइनल में 1-1 की बराबरी के बाद, अस्मिता ने ‘गोल्डन स्कोर’ में गजब के धैर्य का परिचय दिया. उन्होंने ‘यूको’ से निर्णायक अंक हासिल कर मुकाबला 2-1 से जीता. यह जूडो में भारत का पहला पदक है. अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने वाली देश की पहली जूडोका बन गई हैं.
जूडोका अस्मिता राष्ट्रमंडल खेल में गोल्ड जीतने वाली देश की पहली जूडो खिलाड़ी बनीं.
नई दिल्ली. भारत की जूडोका अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में वो कमाल दिखाया है जो इससे पहले किसी भारतीय ने राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में नहीं किया था. अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं. भारत की प्रतिभाशाली जूडो खिलाड़ी अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम भारवर्ग में देश को स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया. बेहद रोमांचक और सांसें थमा देने वाले फाइनल मुकाबले में अस्मिता ने अपनी सूझबूझ, बेहतरीन तकनीक और गजब के धैर्य का परिचय देते हुए भारत का तिरंगा सबसे ऊपर फहराया. यह राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जूडो स्पर्धा के भीतर भारत का पहला मेडल है, साथ ही प्रतियोगिता के आज के दिन का भी यह भारत के लिए पहला पदक है.
अस्मिता डे (Asmita Dey) का यह फाइनल मुकाबला किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था. शुरुआत से ही दोनों ही जूडोकाओं के बीच एक-एक अंक के लिए जबरदस्त खींचतान देखने को मिली. निर्धारित समय (रेगुलेशन टाइम) का खेल खत्म होने तक दोनों खिलाड़ी 1-1 की बराबरी पर डटे रहे. दबाव अपने चरम पर था और स्वर्ण पदक का फैसला ‘गोल्डन स्कोर’ (अतिरिक्त समय) के जरिए होना तय हुआ. त्रिपुरा की 23 वर्ष की अस्मिता शुरूआत में पिछड़ गई थी और उन्हें पेनल्टी भी लगी. उन्होंने हालांकि शानदार वापसी करते हुए स्कोर 1-1 से हराकर किया. चार मिनट के मुकाबले में दोनों में से किसी को निर्णायक स्कोर नहीं मिल सका जिससे मुकाबला गोल्डन स्कोर में गया. इसमें पहले स्कोर करने वाले को विजेता घोषित किया जाता है. अस्मिता ने सडन डैथ में आक्रामक प्रदर्शन करके जीत दर्ज की.
गोल्डन स्कोर के दौरान अस्मिता ने अपनी मानसिक मजबूती का बेहतरीन प्रदर्शन किया. उन्होंने विरोधी खिलाड़ी के हर वार को निष्फल किया और सही मौके का इंतजार किया. आखिरकार, अस्मिता ने एक सटीक दांव लगाते हुए ‘यूको’ (Yuko) के जरिए निर्णायक अंक हासिल किया और मुकाबला 2-1 से अपने नाम कर लिया. उनके इस दांव के साथ ही भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई.
भारतीय जूड़ो के लिए एक ऐतिहासिक मोड़
अस्मिता की यह स्वर्णिम सफलता भारतीय जूडो के इतिहास में बेहद खास स्थान रखती है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जूड़ो जैसे कॉम्बैट स्पोर्ट्स में ऐसा जुझारूपन दिखाना आसान नहीं होता. जब मुकाबला बराबरी पर चल रहा था, तब अस्मिता का अटूट विश्वास और आक्रामक रणनीति ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी. उनकी यह जीत देश के युवाओं और उभरते हुए एथलीटों के लिए एक बड़ा प्रेरणास्रोत बनेगी.
आज रात दो और स्वर्ण पदकों की उम्मीद
अस्मिता डे की इस धमाकेदार जीत के साथ भारत का जश्न तो शुरू हो चुका है, लेकिन आज रात का रोमांच अभी बाकी है. भारतीय जूड़ो टीम के लिए आज का दिन और भी ऐतिहासिक हो सकता है क्योंकि दो और भारतीय जूड़ोका अपने-अपने फाइनल मुकाबलों में उतरने वाले हैं.
भारत के हर्ष सिंह और यामिनी मौर्या भी अपने-अपने भारवर्ग के गोल्ड मेडल मुकाबलों में जगह बना चुके हैं. अगर ये दोनों खिलाड़ी भी अस्मिता के पदचिह्नों पर चलते हुए जीत दर्ज करते हैं, तो भारत के लिए आज की रात जूड़ो के खेल में अब तक की सबसे यादगार रात बन जाएगी. पूरे देश की नजरें अब हर्ष और यामिनी के मुकाबलों पर टिकी हुई हैं.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…
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