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who is Caleb Yirenkyi: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप एल में घाना ने पनामा को एक्स्ट्रा टाइम में 1-0 से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. इस रोमांचक मुकाबले के महानायक बने 20 वर्षीय कैलेब यिरेंकी, जिन्होंने विजयी गोल दागकर फीफा इतिहास में एक्स्ट्रा टाइम में गोल करने वाले सबसे युवा फुटबॉलर बनने का रिकॉर्ड बनाया. एक गरीब कारपेंटर के बेटे कैलेब ने मैदान पर उतरकर अपने पिता के भरोसे को सच कर दिखाया. घाना के कोच कार्लो क्यूरोज ने इसे ‘दिमाग की जीत’ बताया, जिसके बाद टोरंटो की सड़कों पर फैंस का जश्न उमड़ पड़ा.
घाना के 20 साल के फुटबॉलर के पिता किसी दूसरे की दुकान में कारपेंटर का काम करते हैं.
नई दिल्ली. कहते हैं कि सपने देखने के लिए किसी आलीशान महल या बड़ी हैसियत की जरूरत नहीं होती. हौसले अगर बुलंद हों, तो एक छोटी सी दुकान में लकड़ी को तराशने वाले हाथ भी इतिहास लिखने की नींव रख सकते हैं. फीफा वर्ल्ड कप के ग्रुप एल के एक बेहद रोमांचक मुकाबले में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जिसने न सिर्फ फुटबॉल जगत को झकझोर कर रख दिया, बल्कि एक पिता और बेटे के अटूट विश्वास की एक ऐसी कहानी बयां की जो सदियों तक याद रखी जाएगी. यह कहानी है 20 साल के युवा फुटबॉलर कैलेब यिरेंकी की. घाना की राष्ट्रीय टीम से खेल रहे कैलेब के पिता कोई मशहूर हस्ती या अमीर बिजनेसमैन नहीं हैं. वह एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं और पेट पालने के लिए कारपेंटर का काम करते हैं. उनके पास खुद की कोई दुकान भी नहीं है. वह रोजाना किसी दूसरे की दुकान पर जाकर दिनभर पसीना बहाते हैं और लकड़ी के टुकड़ों को नया आकार देते हैं.
लेकिन जब बात उनके बेटे कैलेब यिरेंकी (Caleb Yirenkyi) की आई, तो इस साधारण से कारपेंटर का दिल किसी बादशाह से कम नहीं था. पनामा के खिलाफ होने वाले घाना के इस महामुकाबले को लेकर उनके भीतर जो उत्साह था, वह शब्दों से परे था। मैच शुरू होने से पहले ही, उन्होंने गर्व से उस दुकान पर अपने बेटे कैलेब का एक बड़ा सा पोस्टर लगा दिया था जहां वह काम करते थे. दुकान मालिक और वहां आने वाले हर शख्स को वह मुस्कुराते हुए अपने बेटे की तस्वीर दिखाते थे. उनके दिल में एक उम्मीद थी, एक गहरा विश्वास था कि उनका बेटा इस बार कुछ बड़ा करेगा.
घाना के 20 साल के फुटबॉलर के पिता किसी दूसरे की दुकान में कारपेंटर का काम करते हैं.
90 मिनट का सूखा और एक्स्ट्रा टाइम का रोमांच
मैच की शुरुआत से ही मैदान पर जबरदस्त तनाव और रोमांच देखने को मिल रहा था. घाना और पनामा दोनों ही टीमें ग्रुप एल में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जी-जान लगा रही थीं. खेल जैसे-जैसे आगे बढ़ा, पनामा के डिफेंस ने घाना के फॉरवर्ड खिलाड़ियों को बांधे रखा. पनामा के गोलकीपर ने कुछ बेहतरीन सेव किए, तो वहीं घाना की अग्रिम पंक्ति भी लगातार हमले बोल रही थी. देखते ही देखते निर्धारित 90 मिनट का खेल खत्म हो गया, लेकिन स्कोरबोर्ड अभी भी 0-0 पर अटका हुआ था. दोनों में से कोई भी टीम गोल करने में कामयाब नहीं हो सकी थी. मैच गोल रहित रहने के बाद अब मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में खिंच चुका था. खिलाड़ियों के चेहरे पर थकान साफ दिख रही थी, और करोड़ों प्रशंसकों की सांसें थमी हुई थीं. घाना को इस गतिरोध को तोड़ने के लिए किसी चमत्कार की जरूरत थी.
कैलेब यिरेंकी के बूट से निकला ऐतिहासिक गोल
और फिर वह ऐतिहासिक पल आया, जिसका इंतजार घाना के फैंस और टोरंटो में मैच देख रहे लाखों लोग कर रहे थे. एक्स्ट्रा टाइम के दौरान, खेल के अंतिम क्षणों में घाना को एक बेहतरीन मौका मिला. गेंद कैलेब यिरेंकी के पास आई. 20 साल के इस युवा खिलाड़ी के कंधों पर उस वक्त न सिर्फ अपनी टीम की उम्मीदें थीं, बल्कि उस कारपेंटर पिता का भरोसा भी था जिसने दुकान पर उनका पोस्टर लगाया था. कैलेब ने बिना कोई गलती किए, अपनी पूरी ताकत और सूझबूझ का इस्तेमाल करते हुए गेंद को पनामा के नेट में डाल दिया. गोल! स्कोर 1-0. यह सिर्फ एक गोल नहीं था, बल्कि घाना की जीत की मुकम्मल स्क्रिप्ट थी. इस इकलौते विजयी गोल के साथ ही घाना ने पनामा को 1-0 से शिकस्त दे दी. लेकिन इस गोल के मायने इससे कहीं ज्यादा बड़े थे. पनामा के खिलाफ इस जादुई गोल को दागते ही 20 वर्षीय कैलेब यिरेंकी ने फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा लिया. वह फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में एक्स्ट्रा टाइम में गोल करने वाले सबसे युवा फुटबॉलर बन गए हैं.
पिता की उम्मीदों पर खरे उतरे कैलेब
कैलेब ने मैदान पर जो कारनामा किया, उसने उनके पिता के सिर को फख्र से ऊंचा कर दिया. उनके पिता ने जिस उम्मीद और जोश के साथ उस कारपेंटर शॉप पर अपने बेटे की तस्वीर लगाई थी, कैलेब उस पर शत-प्रतिशत खरे उतरे. कैलेब के इस गोल ने साबित कर दिया कि जब आपके माता-पिता का आशीर्वाद और अटूट विश्वास आपके साथ हो, तो दुनिया का कोई भी मैदान छोटा पड़ जाता है. मैच के बाद घाना के मुख्य कोच (बॉस) कार्लो क्यूरोज (Carlos Queiroz) इस ऐतिहासिक जीत से बेहद गदगद नजर आए। उन्होंने टीम की तारीफ करते हुए कहा, ‘यह जीत सिर्फ शारीरिक क्षमता की नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से ‘दिमाग से हासिल की गई जीत’थी. खिलाड़ियों ने आखिरी मिनट तक अपना आपा नहीं खोया और सही समय पर सही फैसला लिया.’
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें






