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— जिला अधिकारी से उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

Sonbhadra । दुद्धि तहसील क्षेत्र में संचालित खोखा बालू साइड पर अवैध खनन और रात्रिकालीन संचालन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर जिलाधिकारी को शिकायत पत्र सौंपकर उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मे० मंगल स्टोन प्रा० लि०, रायगढ़ के नाम आराजी संख्या-01, रकबा 11.336 हेक्टेयर पर 12 अप्रैल 2023 से 11 अप्रैल 2028 तक बालू खनन की स्वीकृति दी गई है, लेकिन निर्धारित शर्तों और स्वीकृत सीमा से अधिक खनन किए जाने की आशंका है। शिकायत में कहा गया है कि खनन कार्य पर्यावरणीय एवं प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन करते हुए संचालित किया जा रहा है।

रात्रिकालीन खनन का आरोप–
शिकायत में कहा गया है कि लीज शर्तों एवं वन विभाग की एनओसी के अनुसार खनन कार्य केवल सूर्योदय से सूर्यास्त तक किया जाना चाहिए, लेकिन कथित रूप से रातभर भारी मशीनों और वाहनों के जरिए खनन व परिवहन किया जा रहा है। इसके अलावा वन क्षेत्र के रास्तों के उपयोग, बिना वैध परमिट वाहनों की आवाजाही, वन कर वसूली में सीसीटीवी निगरानी के अभाव तथा जिला पंचायत बैरियरों की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
आईजीआरएस शिकायत पर कार्रवाई से असंतोष–
शिकायतकर्ता के अनुसार इस मामले में पूर्व में आईजीआरएस पोर्टल पर संदर्भ संख्या 40020026002584 दिनांक 17 फरवरी 2026 के तहत शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि संबंधित विभागों ने बिना समुचित जांच के तथ्यविहीन आख्या प्रस्तुत कर शिकायत का निस्तारण कर दिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि क्षेत्रीय अधिकारियों ने मौखिक रूप से रात्रिकालीन खनन को एनओसी की शर्तों के विपरीत बताया था।
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल–
शिकायत में थाना हाथीनाला पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि स्थानीय पुलिस प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई करती तो कथित रूप से बड़े पैमाने पर रात्रिकालीन अवैध खनन और परिवहन संभव नहीं होता।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग–
जिलाधिकारी से मांग की गई है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में खनन स्थल, परिवहन मार्ग, निकासी की वास्तविक मात्रा, वन विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका की पड़ताल शामिल की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक रात्रिकालीन खनन एवं परिवहन पर तत्काल रोक लगाने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और पट्टेदार के खिलाफ कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो वह न्याय की मांग को लेकर उच्च न्यायालय, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) अथवा अन्य सक्षम न्यायिक मंच का दरवाजा खटखटाएगा।





