Last Updated:
खंडवा जिले के छोटे से गांव बोरगांव का नाम आज पूरे देश में गूंज रहा है। यहां के युवा पहलवान नीरज पटेल ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुकाम हासिल करते हुए एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत लिया है. 55 किलो वर्ग में खेलते हुए नीरज ने दमदार प्रदर्शन किया. जापान के पहलवान को हराकर मेडल अपने नाम किया.
खंडवा जिले के छोटे से गांव बोरगांव का नाम आज पूरे देश में गूंज रहा है। यहां के युवा पहलवान नीरज पटेल ने अपनी मेहनत और जुनून के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मुकाम हासिल करते हुए एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत लिया है. 55 किलो वर्ग में खेलते हुए नीरज ने दमदार प्रदर्शन किया. जापान के पहलवान को हराकर मेडल अपने नाम किया. उनकी इस उपलब्धि से पूरे खंडवा सहित प्रदेश में खुशी और गर्व का माहौल है.
नीरज पटेल की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. एक छोटे से गांव से निकलकर एशियन लेवल तक पहुंचना आसान नहीं होता है. लेकिन उन्होंने यह कर दिखाया. नीरज बचपन से ही कुश्ती से जुड़े हुए है. महज 8 साल की उम्र से उन्होंने दांव-पेच सीखना शुरू कर दिया था. गांव के ही उनके गुरु जगदीश काका ने उन्हें मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती सिखाई और वहीं से उनकी मजबूत नींव तैयार हुई.
नीरज पटेल ने जीता मेडल
नीरज बताते हैं कि उन्होंने पहले गांव के अखाड़े में मिट्टी पर कुश्ती सीखी, फिर धीरे-धीरे मैट पर अभ्यास शुरू किया। लगातार मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने नेशनल लेवल पर 10 से 12 मेडल जीते और अब तक चार बार इंटरनेशनल स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे थाईलैंड में भी देश के लिए खेल चुके हैं और अंडर-20 व अंडर-23 कैटेगरी में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं.नीरज पटेल कहते ने लोकल 18 से कहा कि गांव से निकलकर यहां तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन परिवार का पूरा साथ मिला. उनके पिता विट्ठल पटेल ने हमेशा उन्हें खेल के लिए प्रेरित किया. नीरज का कहना है कि अगर बच्चों को सही दिशा. सपोर्ट मिले तो वे देश का नाम जरूर रोशन कर सकते हैं.
बोरगांव पहलवानों का गांव
नीरज ने एक अहम बात भी कही कि गांव में कई ऐसे पहलवान हैं. जिन्होंने नेशनल स्तर तक मेडल जीते, लेकिन आगे अवसर नहीं मिल पाने के कारण वे खेल छोड़कर दूसरे काम करने लगे. उनका मानना है कि सरकार को खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं और प्रदर्शन के आधार पर नौकरी के अवसर देने चाहिए, ताकि गांव के टैलेंट को आगे बढ़ने का मौका मिल सके. बोरगांव की खास बात यह है कि यहां लगभग हर घर में एक पहलवान है. गांव को लोग पहलवानों का गांव भी कहते हैं. यहां छोटे बच्चों से लेकर बड़े तक रोज अखाड़े में अभ्यास करते हैं. खंडवा शहर के कई बच्चे भी आकर कुश्ती सीखते हैं. यही माहौल नीरज जैसे खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.
अब नीरज पटेल का सपना और भी बड़ा है. वे आने वाले समय में ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करना चाहते हैं. उनकी यह सफलता न सिर्फ खंडवा बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है.






