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Varanasi Traffic Update | वाराणसी के इन चौराहों पर निकलने से पहले सोच लें, फंस सकते हैं जाम में, 1 KM का सफर तय करने में लगते हैं 45 मिनट

Admin by Admin
September 27, 2026
in उत्तर प्रदेश
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Varanasi Traffic Update | वाराणसी के इन चौराहों पर निकलने से पहले सोच लें, फंस सकते हैं जाम में, 1 KM का सफर तय करने में लगते हैं 45 मिनट


Last Updated:September 27, 2026, 12:37 IST

Varanasi Traffic Jam Update: वाराणसी के कुछ इलाके ऐसे हैं, जहां दिनभर वाहनों और लोगों की भारी भीड़ के कारण जाम की स्थिति बनी रहती है. मैदागिन, गोदौलिया और बांसफाटक जैसे इलाकों में बाजार, मंदिर और पर्यटकों की आवाजाही के कारण कई बार थोड़ी दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है. लंका में बीएचयू अस्पताल आने वाले मरीजों की वजह से ट्रैफिक दबाव रहता है, वहीं विशेश्वरगंज की बड़ी गल्ला मंडी और काल भैरव मंदिर के कारण यहां भी भीड़ रहती है. कैंट और सिगरा में भी पीक टाइम पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं. जानिए वाराणसी के कौन-कौन से इलाके जाम के लिहाज से सबसे ज्यादा व्यस्त हैं और यहां जाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें.

वाराणसी में रोज बड़ी संख्या में लोग खरीदारी, मंदिरों में दर्शन और दूसरे कामों के लिए एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं. शहर के कुछ इलाके ऐसे हैं जहां बाजार, मंडियां, मंदिर और पर्यटकों की भीड़ के कारण वाहनों का दबाव ज्यादा रहता है. ऐसे में इन जगहों पर कभी भी लंबा जाम लग सकता है. अगर आप इन इलाकों में जाने की सोच रहे हैं, तो कार या दूसरी फोर व्हीलर की जगह बाइक से जाना आपके लिए आसान हो सकता है.

वाराणसी का मैदागिन चौराहा शहर के अतिव्यस्त चौराहों में से एक है. इस चौराहे के आसपास कई होलसेल मंडियां और बाजार हैं. इसके अलावा यहां हर समय गाड़ियों का शोर और आवाजाही देखने को मिलती है. भारी भीड़ वाले इस इलाके में कभी भी लंबा जाम लग सकता है. अगर आपको इस इलाके में जाना है, तो फोर व्हीलर छोड़कर बाइक का इस्तेमाल करना आसान हो सकता है.

वाराणसी का गोदौलिया चौराहा भी ट्रैफिक के लिहाज से काफी संवेदनशील इलाका है. इस चौराहे पर सुबह से रात तक 15 लाख से ज्यादा लोगों का फुटफॉल रहता है. इसे शहर का हृदय स्थल भी कहा जाता है. आम दिनों में भी यहां पैदल चलना मुश्किल हो जाता है. दोपहर और शाम के वक्त अगर आप बाइक से भी यहां जा रहे हैं, तो जाम में फंसने की परेशानी हो सकती है. गोदौलिया इलाके से होकर हर दिन लाखों पर्यटक काशी विश्वनाथ मंदिर और दशाश्वमेध घाट की ओर जाते हैं. दशाश्वमेध घाट पर ही विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती होती है. इसे देखने के लिए भी हजारों लोगों की भीड़ पहुंचती है. ऐसे में इस रास्ते पर वाहनों और लोगों का दबाव बना रहता है, जिसके कारण यहां कभी भी लंबा जाम लग सकता है.

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बांसफाटक इलाके में भी कई बार लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ सकता है. इसी इलाके में काशी विश्वनाथ मंदिर का मुख्य द्वार है. मंदिर होने के कारण यहां वीवीआईपी का आवागमन भी लगा रहता है. इसके अलावा बड़ी संख्या में शिव भक्त भी यहां पहुंचते हैं. अगर मंदिर के गेट के करीब वीआईपी की गाड़ी खड़ी हो जाए तो ट्रैफिक पर असर पड़ सकता है. कई बार लोगों को सिर्फ 1 किलोमीटर का सफर तय करने में 35 से 45 मिनट तक का समय लग जाता है.

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शहर का लंका इलाका भी जाम के लिहाज से काफी संवेदनशील है. पास में बीएचयू अस्पताल होने के कारण बिहार और झारखंड से भी मरीज यहां आते हैं. इसके चलते इस इलाके में गाड़ियों का दबाव बना रहता है और अक्सर जाम की स्थिति देखने को मिल जाती है. कई बार लोग इस जाम में 15 से 25 मिनट तक फंसे रहते हैं. वहीं भीड़ ज्यादा होने पर यही सफर तय करने में 35 से 45 मिनट तक का समय लग सकता है.

इन इलाकों के अलावा सिगरा भी शहर के काफी व्यस्त इलाकों में से एक है. यहां भी कई बार गाड़ियों का लंबा जाम नजर आता है. जाम की वजह से लोगों को कुछ समय के लिए रास्ते में फंसना पड़ता है. हालांकि सिगरा जैसे प्रमुख चौराहों पर पुलिस की तैनाती रहती है, जिससे जाम को समय रहते नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है और लोगों को राहत मिलती है.

शहर का विशेश्वरगंज इलाका भी भारी ट्रैफिक और जाम के लिए जाना जाता है. यहां पूर्वांचल की सबसे बड़ी गल्ला मंडी है. इसके साथ ही इसी के करीब बाबा काल भैरव का मंदिर भी है. इन दोनों वजहों से यहां हर वक्त वाहनों की आवाजाही बनी रहती है. कई बार गाड़ियां यहां दौड़ती नहीं बल्कि रेंगती नजर आती हैं. इसी वजह से लोगों को जाम में फंसना पड़ता है. इस इलाके में आने-जाने के लिए टू व्हीलर ज्यादा सुविधाजनक है.

इसके अलावा शहर के कैंट इलाके में भी सुबह से देर रात तक वाहनों की भीड़ रहती है. कभी-कभी यहां गाड़ियां धीरे-धीरे चलती हैं तो कई बार रुक भी जाती हैं. कैंट से चौकाघाट तक के सफर में जाम की वजह से कई बार लोगों को करीब 20 मिनट तक का समय लग जाता है.

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First Published :

September 27, 2026, 12:32 IST



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