[ad_1]
यूपी में विशिष्ट हैचरी स्थापना योजना के लिए पांच लाभार्थियों के चयन का लक्ष्य है। अभी तक शासन स्तर से तीन का चयन किया गया है। इनमें गोरखपुर से सत्यभामा का नाम शामिल है। 50 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत और पुरुष लाभार्थी को 40 प्रतिशत अुनदान दिया जाएगा।
गोरखपुर, राहुल श्रीवास्तव। यूपी में पहली बार शुरू हुई मोती पालन और विशिष्ट हैचरी स्थापना योजना में जिले में चयन के बाद भी पात्र लाभार्थियों को काम शुरू करने के लिए धनराशि का इंतजार करना पड़ रहा है। शासन स्तर से सत्यापन के बाद करीब 36 जिलों के लिए एक करोड़ रुपये का बजट जारी हो गया है। गोरखपुर जिले में 30 सितंबर को सत्यापन के बाद पात्र लाभार्थियों का चयन होने के बाद धनराशि आने में देरी हो रही है। हालांकि, जिला मत्स्य विभाग का दावा है कि तीन से चार दिन में पात्र लाभार्थियों की धनराशि आ जाएगी।
प्रदेश में विशिष्ट हैचरी स्थापना योजना के लिए पांच लाभार्थियों के चयन का लक्ष्य है। अभी तक शासन स्तर से तीन का चयन किया गया है। इनमें गोरखपुर से सत्यभामा का नाम शामिल है। 50 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना के तहत महिला लाभार्थियों को 60 प्रतिशत और पुरुष लाभार्थी को 40 प्रतिशत अुनदान दिया जाएगा। वहीं सिद्धार्थनगर और बहराइच से एक-एक पुरुष लाभार्थी का चयन हुआ है। सिद्धार्थनगर से पंगेशियस मछली के लिए जय प्रकाश चौधरी और बहराइच से देवेंद्र प्रताव राव का तिलापिया मछली के लिए चयन हुआ है। शासन स्तर से दो लोगों का चयन किया जाना अभी बाकी है। इसके लिए दोबारा आवेदन मांगे गए हैं।
मोती पालन के प्रथम चरण में तीन करोड़ का बजट
जिला मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अुनसार, उत्तर प्रदेश में सीप पालन की अपार संभावनाओं और दूसरे राज्यों में मांग को देखते हुए शासन ने मई में योजना का प्रारूप जारी किया था। इसके तहत गोरखपुर जिले से 23 पात्र लाभार्थियों का चयन किया गया है। प्रथम चरण में तीन श्रेणियां बनाकर तीन करोड़ की धनराशि का प्राविधान किया गया है। इसमें 2000, 5000 और 15000 सीपों का निवेश किया जाएगा। मछली पालन वाले तालाब में ही मोती पालन भी कर सकेंगे। इससे मत्स्य पालकों को एक से 10 लाख रुपये का करीब छह महीने में शुद्ध लाभ होगा।
सत्यापन में विलंब से हो रही देरी
उपनिदेशक मत्स्य बृजेश कुमार ने बताया कि शासन की मंशा मत्स्य बीज उत्पादन में दूसरे राज्यों पर निर्भरता खत्म करने की है। गोरखपुर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के स्थानांतरण के चलते पात्र लाभाथिर्यों के सत्यापन में देरी हुई। इसके चलते पात्र लाभार्थियों की सूची शासन को भेजने में विलंब हुआ। आगामी तीन से चार दिन में लाभार्थियों के खाते में धनराशि आ जाएगी।
[ad_2]
Source link

