मुख्य संवाददाता@सौरभ गोस्वामी….

पुलिस सुधार को लेकर भारतीय अहिंसा सेवा संस्थान ने एक सजग मुहिम की सुरुआत कि है। संगठन के अध्यक्ष छात्र नेता जनतासेवक विजय शंकर यादव ने कहा कि आजादी के बाद से पुलिस के कार्य शैली में बहुत बदलाव नही हो सका। पुलिस अमूनन सरकार के निर्देश को ही सब कुछ मान लेती है जिससे उसकी स्वयं कि पहचान निरन्तर धूमल पड़ती गई अब तो ऐसी स्थित देखने को मिलती है कि पुलिस इस पहचान को ही सब कुछ मान चूंकि है सरकार बदलते ही पुलिस के नाम पहचान कार्य शैली सब बदल जाती है।
अमूनन कहा जाय तो अमुक सरकार की पुलिस अमुक सरकार कि पुलिस यह नाम मिलता है पुलिस का! हम जनता कि पुलिस बनाने के लिए संकल्पित कदम बढ़ाते हुए प्रयासरत रहेंगे। समय लगेगा कामयाबी मिलेगी जनता कि पुलिस बनेगी सरकार के फैसलों का अवलोकन मूल्यांकन करने के स्थिति में पुलिस कि मजबूत कार्यशैली बन सकेगी।

जिसकी सरकार उसकी पुलिस, बेहतर तो ये है, सरकार किसी भी दल की पुलिस जनता की हो!!! DGP PS के नियुक्तियों में सरकार व विपक्ष कि सयुक्त सहमति हो लोकतंत्र में पक्ष विपक्ष दो प्रमुख्य होते है। पुलिस सत्ता पक्ष का ज्यादत्तर सुनती है या कहे कि उसकी ही सुनती है विपक्ष सदैव पुलिस पर आरोप लगाते नजर आता है।
यदि पुलिस के बड़े अधिकारियों के नियुक्ति में DGP पुलिस महानिदेशक एवम P S Principal Secretary (प्रमुख्य सचिव) DM SP के पोस्टिंग ट्रांसफर में सत्ता पक्ष एवम प्रमुख्य विपक्ष कि सयुक्त सहमति से नियुक्ति होती है तो पुलिस पर मनमानी करने का आरोप नही लगेगा।
सवैधानिक रूप से पुलिस जनता के सेवक है पर कार्य शैली के रूप में वो सिर्फ सत्ता के साथ खड़ी देखने को मिलती है। पुलिस बेहतर हो सके सरकार विपक्ष सामाजिक संगठनों राजनैतिक संगठनों को एक सार्थक पहल करने कि आवश्यकता है। संगठन इस संदर्भ में नेता जी चौक पर पोस्टर लेकर मांग व लोगो को जागरूक किया। देश माननीय प्रधानमंत्री राष्ट्रपति महोदय जी को पत्र भी प्रेषित किया।






