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चूड़ी कारखानों में काम करने वाले बच्चों के हाथों में थमाई किताब, हजारों बच्चों को फ्री में पढ़ा रहा ये टीचर

Admin by Admin
September 5, 2026
in उत्तर प्रदेश
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चूड़ी कारखानों में काम करने वाले बच्चों के हाथों में थमाई किताब, हजारों बच्चों को फ्री में पढ़ा रहा ये टीचर


Last Updated:September 05, 2026, 14:35 IST

Firozabad News: फिरोजाबाद में एक शिक्षक चूड़ियों का काम करने वाले बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहा है. कोमल पाठशाला के जरिए इन बच्चों का भविष्य बदल रहा है, जिससे वे शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे. आइए इस अनोखी पहल के बारे में जानते हैं.

फिरोजाबाद: शिक्षा जीवन के अंधकार को दूर कर एक नया उजाला लेकर आती है. लेकिन हमारे समाज में ऐसे भी परिवार हैं जो आर्थिक तंगी और मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं. इतना ही नहीं, उस परिवार के बच्चे भी स्कूलों से दूर रहते हैं. ऐसे लोगों के लिए कई समाजसेवी अपनी मुहिम के जरिए शिक्षा का प्रकाश फैलाते हैं. ऐसी ही एक कहानी फिरोजाबाद में रहने वाले एक व्यक्ति की है, जो कई सालों से फिरोजाबाद में एक संगठन के जरिए बच्चों को फ्री शिक्षा दे रहा है.

चूड़ियों के शहर में मजदूरी करने वाले बच्चों के भविष्य को प्रकाशित करने के लिए कई सेंटर बनाकर बच्चों को फ्री शिक्षा दे रहा है. इसके लिए व्यक्ति ने एक संस्था का गठन किया है. वहीं फ्री शिक्षा की मुहिम के लिए उनको सरकार की ओर से सम्मान भी मिल चुका है.

14 साल पहले शुरू की थी संस्था
फिरोजाबाद में कोमल फाउंडेशन संस्था चलाने वाले अश्वनी कुमार राजौरिया ने लोकल 18 से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होने एक दिन मोहल्ले में छोटे-छोटे मासूम बच्चों को चूड़ियों का काम करते देखा तो उनसे पढ़ाई-लिखाई के बारे में पूछा. लेकिन बच्चों ने पढ़ने-लिखने के लिए मना कर दिया. फिर उन्होने बच्चों के परिजनों से बातचीत की तो पता चला कि उनके पास परिवार का खर्च चलाने तक के लिए पैसे नहीं है. ऐसे में वह बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए कैसे भेजें. यहां घर पर चूड़ी का काम करेंगे तो कुछ पैसे भी मिलेगे, जिससे घर का खर्च चलाने में मदद मिलेगी.

इसी को देखते हुए उन्होने कोमल फाउंडेशन नाम की एक संस्था बनाई और एक फ्री कोचिंग सेंटर की शुरुआत की और कोचिंग में चूड़ी लगाने वाले, रिक्शा चलाने वाले परिवारों के बच्चों को पढ़ाना शुरू कराया. शुरुआत में कोचिंग में सिर्फ दस बच्चे पढ़ने आते थे. फिर धीरे-धीरे उन्होने शहर में एक-दो नई फ्री कोचिंग शुरू की, जहां बच्चों को पढ़ाई के साथ बैग, कॉपी, किताब भी बांटना शुरू किया. इससे गरीब और बेसहारा परिवारों के बच्चे भी अपने सपनों को पूरा करने लगे.

यूपी सरकार से मिल चुका है युवा सम्मान
अश्वनी राजौरिया ने बताया कि उनकी अलग-अलग कोचिंग में हजारों गरीब परिवारों के बच्चे फ्री पढ़ाई कर चुके हैं. पहले शहर में उनके एक या दो सेंटर थे, लेकिन अब लगभग चार से पांच सेंटर चल रहे हैं. इसके अलावा आसपास के जिलों जैसे एटा, मेनपुरी और इटावा में भी कोचिंग सेटर की शुरुआत की गई है. वहीं उन्होने बताया कि इस कार्य के लिए उन्हें यूपी सरकार की ओर से स्वामी विवेकानंद युवा सम्मान पुरस्कार भी मिल चुका है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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Location :

Firozabad,Uttar Pradesh

First Published :

September 05, 2026, 14:35 IST



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