नई दिल्ली: रांची में हुए फेडरेशन कप में नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने वाले स्प्रिंटर गुरिंदरवीर सिंह इन दिनों पूरे देश में छाए हुए हैं. गुरिंदरवीर ने 100 मीटर की रेस में नेशनल रिकॉर्ड को तोड़कर तहलका मचा दिया. 100 मीटर के स्प्रिंटिंग में गुरिंदरवीर ने सिर्फ 10.20 सेकंड का समय लिया और भारत के सबसे तेज धावक बन गए. गुरिंदरवीर की ये उपलब्धि देश भर के लाखों युवाओं को एथलेटिक्स में आने के लिए प्रेरित करेगा. इसके अलावा उन्होंने बताया कि नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने से पहले वह दिन भर क्या कर रहे थे. इसी को लेकर उन्होंने ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए एक इंटरव्यू में अपनी सफलता के बारे में बताया और साथ ही आने वाले युवा एथलीटों को खास संदेश भी दिया.
इटरव्यू में गुरिंदरवीर सिंह ने क्या-क्या कहा?
सवाल- क्या आप उम्मीद करते हैं कि इस प्रदर्शन से पंजाब के और युवा एथलेटिक्स अपनाने के लिए प्रेरित होंगे, खासकर तब जब पंजाब एक ऐसा राज्य है जो ड्रग्स की गंभीर समस्या से जूझ रहा है?
गुरिंदरवीर: इसका आने वाली पीढ़ी पर प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन उन लोगों पर नहीं जो पहले से ड्रग्स में शामिल हैं. जो लोग इसमें शामिल हैं वे तो यह भी नहीं जानते कि गुरिंदरवीर सिंह कौन है. रांची कहां है या एथलेटिक्स क्या होता है, लेकिन मुझे लगता है कि यह दौड़ आने वाली पीढ़ी को यह बता सकती है कि उन्हें कौन सा रास्ता चुनना चाहिए.
सवाल: पंजाब हाल के सालों में थ्रोअर्स और इतिहास में क्वार्टर-मिलर्स पैदा करने के लिए जाना जाता है. पंजाब से एक स्प्रिंटर होने के क्या मायने हैं?
गुरिंदरवीर: पहले यहां थ्रोअर्स होते थे या 400 मीटर के धावक होते थे. वे ज्यादातर थ्रो इवेंट्स को चुनते थे. अब मैंने 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ना चुना है और मुझे लगता है कि लोग मुझे देखकर कहेंगे कि अगर यह कर सकता है तो मैं भी करूंगा.
सवाल: कल रात से आपने कितनी रील्स देखी हैं? क्योंकि दौड़ से एक दिन पहले तो आपको फोन छूने की भी अनुमति नहीं थी.
गुरिंदरवीर: मैं सिर्फ अपनी ही रील्स देख रहा हूं. हर दूसरी या तीसरी रील मेरे बारे में ही है. यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि पूरा देश मेरे बारे में बात कर रहा है. यह पांच दिनों तक अच्छा लगेगा और फिर उसके बाद दोबारा ट्रेनिंग की उसी कड़ी मेहनत पर लौटना होगा.
सवाल: आपने एक दिन पहले भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था, लेकिन एनिमेश ने तुरंत इसे वापस अपने नाम कर लिया. आपको उस समय कैसा लगा?
गुरिंदरवीर: मैं एनिमेश के लिए खुश था और मैंने खुद पर कोई तनाव नहीं लिया. मैं अपने पूरे फ्लो में था. मैंने स्ट्रेचिंग की, रात को चार घंटे सोया और फिर अगले दिन पूरा दिन सोया. इसके बाद उठा, स्टेडियम आया और राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया. अपने अंडर-16 के दिनों में वहां कई अधिक उम्र के लड़के प्रतिस्पर्धा कर रहे होते थे और मैं उनसे डर जाता था. तब मेरे मामाजी ने मुझसे कहा था, शेर एक ही होता है जंगल में बकरियां बहुत फिरती हैं. हां तू शेर बनके खेल.
सवाल: यह पहली बार नहीं है जब आपने राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा है. आपने इसे पिछले साल भी किया था, लेकिन उसके बाद आपको संघर्ष करना पड़ा. क्या हुआ था?
गुरिंदरवीर: किसी ने मेरे रूप-रंग को लेकर कुछ कहा था और वह भी सीधे मेरे मुंह पर. पिछले साल मैं उस बात से बहुत परेशान था. मैंने शीशे में खुद को देखना बंद कर दिया था. मैं नीचे देखकर चलता था. मैंने सामने सीधे देखना बंद कर दिया था. मुझे लगता था कि अगर मैं खुद को किसी और की आंखों में देखूंगा तो वह भी मेरे बारे में वही सोच रहा होगा. इस वजह से मैंने अपना बहुत सारा आत्मविश्वास खो दिया था. मैं आपको वे शब्द नहीं बता सकता, लेकिन वे बहुत दर्दनाक थे.
सवाल: आप उस भावना से बाहर कैसे आए? किसने आपकी मदद की?
गुरिंदरवीर: इसमें मैंने खुद की मदद की और मेरे कोच हिलियर ने. उन्होंने मेरे साथ कुछ बहुत अच्छी बातचीत की. उन्होंने मुझे बहुत सी चीजें सिखाईं. जब मैं थोड़ा निराश था तो मैंने उन्हें बताया कि मुझे समस्या हो रही है. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं इतना धीमा नहीं दौड़ सकता. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या हुआ है. मैंने उन्हें बताया कि मैं बहुत दबाव में हूं और खुद को हल्का महसूस नहीं कर पा रहा हूं. तब उन्होंने मुझसे कहा कि स्टार्टिंग लाइन पर मेरे लिए कोई और खड़ा नहीं होगा, मुझे खुद ही वहां खड़ा होना होगा. मुझे प्रेरित करने के लिए कोई और नहीं आएगा मुझे स्टार्टिंग लाइन पर खुद को खुद ही प्रेरित करना होगा. मुझे जीवन में भी खुद को खुद ही प्रेरित करना होगा. कोई भी मुझे परेशान करने के लिए कुछ भी कह सकता है.
