संवाददाता@रामबली मिश्रा…..

विगत कई दिनों से जिला विद्यालय निरीक्षक सोनभद्र के द्वारा जारी किए गए नोटिस पर क्षेत्र में महासंग्राम छिड़ा हुआ है। लोगों के द्वारा आरोप प्रत्यारोप लगाते हुए ऐसा कयास लगातार लगाए जा रहे हैं कि शासनादेश का दुरुपयोग करते हुए शिक्षा विभाग के द्वारा अपने चहेतों को दरकिनार करते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया की जा रही है, जो उच्चस्तरीय जांच का विषय है।
इतने बड़े क्षेत्र में मात्र दस विद्यालय ही महोदय को दिखाई दिए, जिसपर कार्रवाई की संस्तुति की गई है, जबकि हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। लोगों की बातों पर गौर करें तो जिन विद्यालयों पर कार्रवाई की गई है, उनके बगल में बिना मान्यता के संचालित अन्य विद्यालय क्यों नहीं नजर आए।
जहां तक उत्तर प्रदेश सरकार की बात करें तो एक मान्यता पर एक जगह ही विद्यालय संचालित हो सकता है, जबकि हकीकत इसके परे है। न्याय पंचायत जरहां में बीजपुर से बखरीहवां के बीच लगातार कई वर्षों से ऐसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनकी मान्यता प्राप्त संस्थाएं अन्यत्र स्थित हैं। लोगों की चर्चाओं पर गौर करें तो एक विद्यालय ऐसा भी है जो विगत 15 वर्षों से भी अधिक समय से चेतवा राजों रोड में संचालित है, जिसकी मान्यता अन्यत्र का है।
चर्चा यह भी है कि क्षेत्र में ऐसे विद्यालयों के संचालन को बढ़ावा देने वाला पहला विद्यालय है। हास्यास्पद है कि जनपद में ऐसे विद्यालयों को अनदेखा करते हुए मुख्य मार्ग से कोसों दूर स्थित पिंडारी के चार विद्यालय जांच टीम को नजर आ गए और उसी बगल बंका मोड पर नर्सरी से बारहवीं तक बिना मान्यता संचालित विद्यालय जांच अधिकारी के नजर नहीं आए, शासन के नियमों को ताख पर रखकर शिक्षा क्षेत्र को कलंकित करने वाले ऐसे विद्यालयों पर कभी कार्रवाई क्यों नहीं होती।
अब देखना यह है कि जिला विद्यालय निरीक्षक के द्वारा इसका संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की जाती है, अथवा खानापूर्ति कर मामले को रफा दफा कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।