Last Updated:
who is Aronyak Ghosh: कोलकाता के अरण्यक घोष बैंकॉक चेस क्लब ओपन 2026 में अपना अंतिम नॉर्म हासिल कर भारत के 95वें ग्रैंडमास्टर बन गए हैं. नेशनल रैपिड चैंपियन अरण्यक ने 9 में से 7 अंक जुटाकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की. उनके पिता मृणाल घोष और वकील माता के निरंतर बलिदानों ने इस कठिन सफर को मुमकिन बनाया. वर्ल्ड स्टेज पर विश्व कप में चमक बिखेरने वाले अरण्यक की यह सफलता भारतीय शतरंज के स्वर्णिम दौर में एक और गौरवशाली अध्याय है.

अरण्यक घोष के पिता वर्तमान में अंपायर हैं जबकि मां वकी हैं.
नई दिल्ली. भारतीय शतरंज प्रेमियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा. युवा खिलाड़ी अरण्यक घोष ने बैंकॉक चेस क्लब ओपन में अपना अंतिम जीएम नॉर्म हासिल कर भारत के 95वें ग्रैंडमास्टर बनने का गौरव हासिल किया. भारतीय शतरंज के लिए यह सप्ताह किसी उत्सव से कम नहीं रहा. जहां एक ओर आर. वैशाली ने फिडे महिला विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया और ए. एस. शर्वणिका ने अंडर-12 रैपिड खिताब जीता, वहीं अरण्यक की इस उपलब्धि ने भारतीय शतरंज की सफलता में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया.
अरण्यक घोष (Aronyak Ghosh) का सफर आसान नहीं था. उन्होंने 9 में से 7 अंक हासिल कर बैंकॉक में संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया. उनके ग्रैंडमास्टर बनने की नींव बहुत पहले रखी जा चुकी थी. उन्होंने पहला नॉर्म सैंट्स ओपन (2023) में हासिल किया था जबकि दूसरा नॉर्म एनेमासे मास्टर्स (2024) में प्राप्त किया था.वहीं तीसरा और आखिरी नॉर्म बैंकॉक ओपन (2026) में हासिल की. वर्तमान में 2533 की स्टैंडर्ड रेटिंग और दुनिया में 401वीं रैंक रखने वाले अरण्यक ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी धमक दिखाई है. 2025 के फिडे विश्व कप में उन्होंने पोलैंड के माटुज बार्टेल को हराकर सबको चौंका दिया था, हालांकि बाद में उन्हें दिग्गज लेवोन अरोनियन से हार का सामना करना पड़ा.
अरण्यक घोष के पिता वर्तमान में अंपायर हैं जबकि मां वकी हैं.
संघर्ष और समर्पण की कहानी
अरण्यक की सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट बलिदान छिपा है. उनके पिता, मृणाल घोष, जो खुद एक पूर्व खिलाड़ी और अब अंपायर (आर्बिटर) हैं, ने अपने बेटे के सपनों के लिए अपनी जमा-पूंजी और पारिवारिक सामान तक बेच दिया. वहीं पेशे से वकील उनकी मां साये की तरह उनके साथ हर टूर्नामेंट में सफर करती रही हैं.
अरण्यक की अनूठी रणनीति
जहां कई बड़े खिलाड़ी घरेलू स्तर पर कम रेटिंग वाले खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने से कतराते हैं, अरण्यक इसे एक चुनौती और अवसर की तरह देखते हैं. अपनी अद्भुत निरंतरता के दम पर उन्होंने कम रेटिंग वाले प्रतिद्वंद्वियों को मात देने की कला में महारत हासिल की है, जिसके कारण उनकी रेटिंग 2550 तक जा पहुंची है.
About the Author

करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
