मुख्यालय/सोनभद्र.@विशाल टंडन…….

जिले के विद्युत विभाग में कार्यरत संविदा कर्मियों ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अधीक्षण अभियंता कार्यालय, रॉबर्ट्सगंज पर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। धरने की अध्यक्षता मंडल सचिव निलेश मौर्य के नेतृत्व में की गई, जिसमें जिले भर के बड़ी संख्या में संविदा कर्मी शामिल हुए। धरने में जिलाध्यक्ष ज्योति कुमार, जिला सचिव अभय पांडेय, कोषाध्यक्ष हरिशंकर द्विवेदी, उपाध्यक्ष गिरीन्द्र यादव, मुन्ना लाल, राजनारायण सिंह, रामप्रीत यादव, हेमंत त्रिपाठी, मोहन विश्वकर्मा, सद्दाम और अवधेश शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी मौजूद रहे।
धरना स्थल पर वक्ताओं ने विभागीय नीतियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संविदा कर्मियों से सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए दबाव बनाकर कार्य कराया जा रहा है। इसके चलते पूर्व में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और वर्तमान में भी कर्मियों की सुरक्षा खतरे में है।
उन्होंने कहा कि जिले के अधिकांश विद्युत उपकेंद्रों पर आवश्यक सुरक्षा उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है। जिलाध्यक्ष ज्योति कुमार ने बताया कि विद्युत वितरण खंड रॉबर्ट्सगंज और पिपरी में कार्यरत संविदा कर्मियों के साथ मनमानी की जा रही है।
वहीं जिला सचिव अभय पांडेय ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ महीनों में कई कर्मियों को बिना पूर्व सूचना के कार्य से हटा दिया गया और उनके द्वारा किए गए कार्य का वेतन भी रोक लिया गया, जो कि श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन है। संविदा कर्मियों ने अपनी प्रमुख मांगों में बकाया वेतन का तत्काल भुगतान, हटाए गए कर्मियों की पुनः बहाली, सभी उपकेंद्रों पर पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, दुर्घटनाग्रस्त कर्मियों को मुआवजा, सभी कर्मियों को ईएसआईसी कार्ड व पहचान पत्र उपलब्ध कराना तथा कुशल एवं अकुशल कर्मियों की संख्या स्पष्ट करने की मांग शामिल की।
संगठन के पदाधिकारियों ने अधीक्षण अभियंता, विद्युत वितरण मंडल सोनभद्र से मांग की है कि 5 अप्रैल 2026 तक वार्ता कर समस्याओं का समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समय सीमा तक मांगें पूरी नहीं की गईं, तो 6 अप्रैल 2026 से सभी संविदा कर्मी कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
संविदा कर्मियों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के दौरान यदि किसी प्रकार की औद्योगिक अशांति उत्पन्न होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी विभागीय प्रबंधन की होगी।