रेणुकूट/सोनभद्र. @अमिताभ मिश्रा……
— रेंजर राघवेंद्र कुमार ने 3 वर्षों में वन अपराधों से जुर्माने के रूप जमा कराया

रेणुकूट वन प्रभाग क्षेत्र के पिपरी वन रेंज में तैनात रेंजर राघवेंद्र कुमार ने बीते लगभग तीन वर्षों के दौरान अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उल्लेखनीय कार्य किया है। उनके व्यक्तिगत प्रयासों से अवैध कटान, अवैध अतिक्रमण, अवैध कोयला परिवहन, अवैध रूप से गिट्टी-बालू का भंडारण, वन क्षेत्र में राख गिराने सहित कई मामलों में कार्रवाई कर अब तक कुल 19,30,500 रुपये का राजस्व जमा कराया गया है।
जो पूरे सोनभद्र जिले की वन रेंजों में वन अपराधों से वसूले गए जुर्माने में सर्वाधिक बताया जा रहा है। रेंजर राघवेंद्र कुमार द्वारा वन माफियाओं के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जाता रहा है। इसी क्रम में उन्होंने खैर की लकड़ी से लदे दो ट्रकों को भी जब्त किया, एवं चार अंतराज्यीय खैर तस्करों को जेल भेजा ,जिसके बाद से क्षेत्र के वन माफियाओं में हड़कंप की स्थिति है।
उनकी सख्ती के कारण अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगा है और वन माफियाओं की मनमानी नहीं चल पा रही है। बताया जाता है कि रेंजर की सख्ती से परेशान कुछ लोग उनके खिलाफ गलत आरोप लगाकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि विभागीय सूत्रों का कहना है कि रेंजर अपने दायित्वों का पालन करते हुए वन संपदा की सुरक्षा के लिए नियमों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं।
वन संरक्षण एवं वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ रेंजर राघवेंद्र कुमार सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते हैं। वे समय-समय पर अपने वन रेंज क्षेत्र के आदिवासी और जरूरतमंद ग्रामीणों के बीच आवश्यक सामग्री का वितरण करते रहते हैं। इसके अलावा विभाग के निचले वर्ग के कर्मचारियों को भी जाड़े के मौसम में उन्होंने व्यक्तिगत रूप से शाल, कंबल और कोट वितरित कर सहयोग किया है।
इसी क्रम में मुर्धवा के समीप नेशनल हाईवे के किनारे करोड़ों की बहुमूल्य लगभग 10 बीघा वन भूमि को अवैध अतिक्रमण से मुक्त कराकर वहां ‘काकोरी वन’ का निर्माण कराया गया है एवं अपने व्यक्तिगत प्रयासों से नगर वासियों के लिए 50 हैक्टेयर में नगर वन की शुरुआत की गई ,हालांकि कुछ लोगों द्वारा यह आरोप लगाया गया कि वन भूमि पर अवैध कब्जा कराया जा रहा है, जिसे विभागीय अधिकारियों और स्थानीय जानकारों ने निराधार बताया है।
उनका कहना है कि यह कार्य वन विभाग की नगर वन योजना के तहत कराया गया है और कुछ लोग गलत जानकारी देकर उच्च अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर की सख्ती से वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर रोक लगी है और वन संपदा की बेहतर सुरक्षा हो रही है।