कोन/सोनभद्र. @मिथिलेश जायसवाल…..

विकास खंड कोन के ग्राम पंचायत रोरवा में आवास योजना व मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत पर गुरुवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम गांव पहुंची और विभिन्न कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। टीम ने आवास योजना के लाभार्थियों के बयान दर्ज किए तथा मनरेगा के कार्यों का भी मौके पर जाकर सत्यापन किया।
ग्राम पंचायत रोरवा के शिकायतकर्ता राजेश भाटिया व प्रतीक गुप्ता ने मुख्यमंत्री पोर्टल और खंड विकास कार्यालय में कई बार शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतों पर सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने दिसंबर माह में जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर ग्राम प्रधान पति पर कई अनियमितताओं के आरोप लगाए थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता तथा जिला लेखा परीक्षा अधिकारी की तीन सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए थे।
जांच टीम ने गुरुवार को गांव पहुंचकर प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से पूछताछ की। लाभार्थी पनवा देवी ने टीम को बताया कि आवास निर्माण के लिए सामग्री उपलब्ध कराने के नाम पर उनसे पूरी धनराशि ले ली गई। वहीं प्रधान पति अरविंद सिंह ने जांच अधिकारियों के सामने कहा कि जितनी धनराशि ली गई, उतनी की सामग्री उपलब्ध करा दी गई है। उनका कहना था कि लाभार्थियों ने निर्धारित मानक से अधिक निर्माण करा लिया, जिसके कारण आवास अधूरा रह गया।
इसी तरह लाभार्थी प्रकाश के मामले में भी इसी प्रकार की बात सामने आई। शिकायतकर्ताओं ने टीम से सवाल उठाया कि जब कई आवास अभी पूर्ण नहीं हुए हैं तो उनका जियो टैग कैसे हो गया और तीनों किस्तों का भुगतान किस आधार पर जारी कर दिया गया।
इसके अलावा मनरेगा के तहत जलावरोधक निर्माण कार्य एक डिहवार बाबा स्थल के पास तथा दूसरा घोड़ा घाट नाले पर दिखाया गया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन स्थानों पर कार्य नहीं कराकर किसी अन्य स्थान पर निर्माण कराया गया है। टीम ने दोनों स्थानों का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया।
जांच के दौरान प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्री वाल की भी माप कराई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में रिबोर, वन ग्राम समेत कई कार्य ऐसे हैं जिनका भुगतान भले ही अभी नहीं हुआ है, लेकिन निर्माण कार्य पहले ही ध्वस्त हो चुका है, जिससे कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच टीम के अधिकारियों ने बताया कि मौके पर किए गए निरीक्षण और प्राप्त बयानों के आधार पर संबंधित फाइलों का भी परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद पूरी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।