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cwg 2026: बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता जुडोका तुलिका मान को पिछले 12 महीनों में तीन बार ठिकाने बताने में विफल रहने के कारण राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) द्वारा अनंतिम निलंबन दिए जाने के बाद चल रहे ग्लासगो संस्करण से हटा दिया गया है. मान ने 2022 संस्करण में +78 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता था और वह ग्लासगो में भी एक मजबूत पदक की दावेदार थीं
भारत की स्टार जूडो खिलाड़ी तुलिका मान डोप टेस्ट में फेल
नई दिल्ली. ग्लासगो में चल रहे खेल आयोजन से भारतीय खेल जगत के लिए बेहद निराशाजनक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. लगातार दूसरे दिन भारतीय दल को एक बड़ा झटका लगा है, जिसने देश की खेल साख पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) के बाद अब जूडो में भी भारत की उम्मीदों को करारा झटका लगा है. भारत की स्टार जूडो खिलाड़ी तुलिका मान डोप टेस्ट में फेल हो गई हैं. खेल शुरू होने के पहले ही दिन जहाँ एक वेटलिफ्टर के प्रतिबंधित दवाओं के सेवन का मामला सामने आया था, वहीं अगले ही दिन तुलिका मान के डोपिंग टेस्ट के नतीजों ने भारतीय खेल प्रेमियों को गहरे सदमे में डाल दिया है.
बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता जुडोका तुलिका मान को पिछले 12 महीनों में तीन बार ठिकाने बताने में विफल रहने के कारण राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) द्वारा अनंतिम निलंबन दिए जाने के बाद चल रहे ग्लासगो संस्करण से हटा दिया गया है. मान ने 2022 संस्करण में +78 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता था और वह ग्लासगो में भी एक मजबूत पदक की दावेदार थीं.
डोपिंग का दोहरा वार टूटी भारत की उम्मीदें
ग्लासगो की धरती पर भारतीय खिलाड़ियों से पदक और गौरव की उम्मीद की जा रही थी. इसके विपरीत, शुरुआती दो दिनों में ही बैक-टू-बैक डोपिंग मामलों ने पूरे दल के मनोबल को तोड़ दिया है. भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) के एक होनहार खिलाड़ी का डोप टेस्ट पॉजिटिव आया. बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की रजत पदक विजेता जूडोका तुलिका मान भी जांच में विफल रहीं. टूर्नामेंट की शुरुआत में ही इन दो मामलों के सामने आने से भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (NADA) की तैयारियों और दावों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.
तुलिका मान का डोप टेस्ट में फेल होना एक बड़ा झटका क्यों?
तुलिका मान भारतीय जूडो का एक जाना-माना नाम हैं उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कई पदक जीते हैं. खेल विशेषज्ञों का मानना था कि ग्लासगो में तुलिका भारत के लिए पदक की सबसे मजबूत दावेदार थीं. उनका डोप टेस्ट में फेल होना न केवल व्यक्तिगत रूप से उनके करियर के लिए एक बड़ा दाग है, बल्कि इससे जूडो स्पर्धा में भारत की झोली में आने वाला एक संभावित पदक भी छिन गया है. एक जूडो कोच ने नाम न छापने की शर्त पर पीटीआई को बताया, “उन्होंने 12 महीने की अवधि में तीन बार ठिकाने बताने में विफलता की है और नाडा ने उन्हें नोटिस भेजा है. इसलिए, उन्हें टीम से हटा दिया जाएगा.” गुरुवार को, एक अन्य जुडोका, अरुण कुमार (-73 किग्रा) को प्रतियोगिता से बाहर डोप टेस्ट में विफल रहने के कारण हटा दिया गया था. भारतीय जूडो टीम अभी तक खेलों के लिए रवाना नहीं हुई है क्योंकि उनकी प्रतियोगिता का कार्यक्रम 31 जुलाई को शुरू होगा. किसी बड़े बहु-खेल आयोजन में लगातार दो दिनों में दो अलग-अलग खेलों के खिलाड़ियों का फेल होना बेहद चिंताजनक है.
तैयारी पर सवाल
क्या खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों और प्रतिबंधित दवाओं की सूची (WADA List) के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई थी? राष्ट्रीय स्तर पर कैंपों के दौरान खिलाड़ियों की नियमित जांच और उनके सप्लीमेंट्स की निगरानी में कहां चूक हुई?पदक जीतने के अत्यधिक मानसिक और सामाजिक दबाव के कारण क्या खिलाड़ी गलत रास्ता चुन रहे हैं?ग्लासगो से आ रही इन खबरों ने भारत में खेल प्रशंसकों को निराश कर दिया है. सोशल मीडिया से लेकर खेल गलियारों तक इस बात की चर्चा है कि इस तरह की घटनाओं से देश की वैश्विक खेल छवि धूमिल होती है. ग्लासगो का यह झटका भारतीय खेल प्रशासन के लिए एक वेक-अप कॉल है यदि अब भी कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को और अधिक शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है.
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मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…
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