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CWG 2026: कॉमवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत 23 जुलाई से हो रही है. प्रतियोगिता का आयोजन ग्लास्गो में किया जा रहा है. इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 126 भारतीय एथलीटों का जत्था हिस्सा लेगा. इसके अलावा 51 अधिकारी और कोच भी इस दल के साथ ग्लास्गो जाएंगे. ऐसे में 10 पॉइंट में आइए जानते हैं कॉमनवेल्थ गेम्स से जुड़ी कुछ अहम जानकारियां.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत इसी महीने 23 जुलाई से हो रही है और इसका समापन 2 अगस्त को होगा. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में होगा. हालांकि, ग्लास्गो से पहले ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में इस प्रतियोगिता का आयोजन होना था, लेकिन भारी भरकम खर्च के कारण विक्टोरिया ने मेजबानी छोड़ दी जिसके बाद ग्लास्गो को नया मेजबान चुना गया.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 126 सदस्यीय एथलीटों का दल भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए तैयार है. इसके अलावा 51 टीम अधिकारी और कोच भी शामिल हैं. भारत की तरफ से इस दल में 78 पुरुष और 48 महिला खिलाड़ी अलग-अलग खेलों में तिरंगे का मान बढ़ाने ग्लास्गो में उतरेंगे.
कॉमवेल्थ गेम्स के इतिहास की बात करें तो यह पहुत ही पुराना है. पहली बार इसकी शुरुआत साल 1930 में हुई थी. शुरुआत में इसे ब्रिटिश एम्पायर गेम्स कहा जाता था लेकिन साल 1978 में इसका नाम कॉमनवेल्थ गेम्स कर दिया गया. कॉमनवेल्थ को पहली बार कनाडा के हैमिल्टन शहर में आयोजित किया गया था. पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में सिर्फ 11 देशों के 400 एथलीटों ने हिस्सा लिया था. यह हर 4 साल में एक बार आयोजित किया जाता है.
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कॉमनवेल्थ गेम्स में मुख्य रूप से वे देश हिस्सा लेते हैं जो कभी ब्रिटेन के उपनिवेश रहे हैं. इसके राष्ट्रमंडल देश भी जाता है. मौजूदा समय में कॉमवेल्थ फेडरेशन में कुल 56 देश शामिल हैं, लेकिन इसमें कुल 74 टीमें हिस्सा लेती है. इसके पीछे का कारण ये है कि यूनाइटेड किंगडम के तहत आने वाले स्कॉटलैंड, वेल्स, इंग्लैंड और उत्तरी आयरलैंड जैसी टीमें अलग-अलग हिस्सा लेती हैं.
भारत की बात करें तो उसने 1934 में पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लिया था. उसके बाद से भारत ने इस खेल प्रतियोगिता में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उपलब्धि की बात करें तो अब कुल 564 मेडल जीते हैं, जिसमें 203 गोल्ड, 190 सिल्वर और 171 ब्रॉन्ज मेडल है. भारत के लिए अबतक सबसे बेहतरीन कॉमनवेल्थ 2010 में दिल्ली रहा था, जिसमें भारतीय एथलीटों ने 101 मेडल जीते थे.
पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स की बात करें ये बर्मिंघम में आयोजित किया गया था. इस कॉमनवेल्थ गेम्स ने भारतीय एथलीटों ने कुल 61 मेडल जीते थे. इन मेडल्स में 22 गोल्ड, 16 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज थे. बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत मेडल टैली ने चौथे स्थान पर रहा था.
अंतिम समय पर मेजबान बदलने के कारण इस बार के कॉमनवेल्थ गेम्स में सिर्फ 10 मुख्य खेलों को ही शामिल किया गया है. इससे भारत को काफी नुकसान हुआ है. क्योंकि, भारत के सबसे ज्यादा मेडल दिलाने वाले खेल जैसे कुश्ती, शूटिंग, हॉकी और बैडमिंटन को इस बार हटा दिया गया है.
कुश्ती और शूटिंग नहीं होने से इस बार सबसे बड़ी उम्मीद एथलेटिक्स टीम पर टिकी है. भारत ने 32 सदस्यीय मजबूत एथलेटिक्स टीम भेजी है. ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा गोल्ड मेडल के सबसे बड़े दावेदार हैं. उनके अलावा अविनाश साब्ले, पारुल चौधरी और तेजस्विन शंकर से भी देश को पदक की पूरी उम्मीद है.
एथलेटिक्स के अलावा वेटलिफ्टिंग और बॉक्सिंग कॉमनवेल्थ गेम्स में हमेशा से भारत के मजबूत गढ़ रहे हैं. वेटलिफ्टिंग में टोक्यो ओलंपिक की सिल्वर विजेता मीराबाई चानु भारत की तरफ से मेडल की सबसे बड़ी उम्मीद हैं. वहीं बॉक्सिंग में लवलीना बोरगोहेन जैसी दिग्गज खिलाड़ी देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने के इरादे से रिंग में उतरेंगी.







