संवाददाता@विशाल टंडन…….
— बरसात में बढ़े सर्पदंश के खतरे पर एडवाइजरी जारी, समय पर एंटी-स्नेक वेनम से बच सकती है जान

बरसात के मौसम में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) सोनभद्र ने लोगों से अंधविश्वास छोड़कर तत्काल अस्पताल पहुंचने की अपील की है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि सर्पदंश का प्रभावी उपचार केवल एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) है। झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार में समय गंवाना मरीज की जान के लिए घातक हो सकता है।
जिला आपदा विशेषज्ञ अरुण यादव ने बताया कि बारिश के दिनों में सांपों के बिलों में पानी भरने से उनके आबादी वाले क्षेत्रों में आने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने लोगों से रात में टॉर्च का उपयोग करने, घास-झाड़ियों में सावधानी बरतने, मजबूत जूते पहनने तथा घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने की सलाह दी। किसी भी आपात स्थिति में 112 या जिला कंट्रोल रूम 1077 पर संपर्क करने को कहा गया है।
मेडिकल कॉलेज लोढ़ी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. राहुल सिंह ने बताया कि सर्पदंश होने पर काटे गए स्थान पर कसकर पट्टी न बांधें, जख्म को काटकर या मुंह से जहर चूसने की कोशिश न करें। हल्दी, मिट्टी, गोबर, तेल या अन्य देसी उपचार से भी बचें। मरीज को शराब, चाय, कॉफी या अन्य नशीले पदार्थ न दें तथा उसे अनावश्यक चलने-फिरने न दें, क्योंकि इससे जहर तेजी से फैल सकता है।

उन्होंने बताया कि काटे गए अंग को स्थिर रखें, तंग कपड़े, अंगूठी या घड़ी हटा दें और बिना देर किए मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं। डॉ. सिंह ने कहा कि हर सांप जहरीला नहीं होता, फिर भी हर सर्पदंश को गंभीरता से लेना चाहिए। यदि दर्द, सूजन, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। समय पर एएसवी उपचार मिलने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।





