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UP 69000 Teacher Bharti: उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद करीब छह साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चयनित शिक्षकों की ओर से ऐसी दलील दी गई, जिसने इस भर्ती से नौकरी पाने वाले हजारों शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है. वकील ने कहा कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा गया तो करीब 10 हजार ऐसे शिक्षक प्रभावित हो सकते हैं जो पिछले छह साल से नौकरी कर रहे हैं. अब इस मामले में अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी.
UP 69000 Teacher Recruitment, up teacher Bharti: यूपी टीचर भर्ती मामले की सुनवाई.
UP 69000 Teacher Bharti: उत्तर प्रदेश की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती का विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में चर्चा के केंद्र में है. भर्ती प्रक्रिया पूरी होने और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के नौकरी पाने के बावजूद इस मामले का कानूनी विवाद खत्म नहीं हुआ है. मौजूदा सुनवाई में चयनित अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकीलों ने अपनी दलीलें रखीं और भर्ती की मेरिट, आरक्षण तथा पहले से नौकरी कर रहे शिक्षकों के भविष्य से जुड़े सवाल कोर्ट के सामने रखे.
चयनित अभ्यर्थियों की तरफ से दलील दी गई कि अगर लखनऊ हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा जाता है तो करीब 10 हजार ऐसे शिक्षक नौकरी से बाहर हो सकते हैं जो पिछले छह साल से सेवा कर रहे हैं. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अंतिम फैसला मामले में जो कानूनी रूप से सही होगा उसी आधार पर लिया जाएगा यानी इस मामले में अब सवाल सिर्फ नई मेरिट लिस्ट बनने या पुराने चयन को बनाए रखने तक सीमित नहीं है. एक तरफ ऐसे अभ्यर्थी हैं जो आरक्षण और मेरिट के आधार पर अपने अधिकार की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ पहले से चयनित होकर नौकरी कर रहे शिक्षकों की सेवा पर भी संभावित असर का मुद्दा उठाया जा रहा है.
आरक्षण को लेकर कोर्ट में क्या दलील दी गई?
सुनवाई के दौरान चयनित अभ्यर्थियों की ओर से पेश वकील ने आरक्षण को लेकर भी सवाल उठाया. उनकी दलील थी कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पहले ही टीईटी यानी शिक्षक पात्रता परीक्षा में आरक्षण का लाभ मिल चुका था और इसके बाद सहायक अध्यापक भर्ती की प्रक्रिया में भी वे आरक्षण का लाभ ले रहे हैं.वकील की ओर से इसे एक ही भर्ती प्रक्रिया में दो बार आरक्षण का लाभ मिलने के तौर पर पेश किया गया हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर सवाल किया कि टीईटी भर्ती परीक्षा नहीं बल्कि पात्रता परीक्षा है. ऐसे में टीईटी में मिलने वाली छूट को मुख्य भर्ती में आरक्षण के बराबर कैसे माना जा सकता है?यहीं से मामले का एक अहम कानूनी सवाल सामने आता है कि पात्रता परीक्षा में आरक्षित वर्ग को मिली छूट और मुख्य चयन प्रक्रिया में आरक्षण के लाभ को किस तरह देखा जाए.
हाईकोर्ट का फैसला लागू हुआ तो 817 अनारक्षित अभ्यर्थियों की बात
चयनित अभ्यर्थियों की तरफ से कोर्ट में यह भी दलील दी गई कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के आधार पर आगे की प्रक्रिया बढ़ती है तो केवल 817 अनारक्षित अभ्यर्थियों को ही नौकरी मिलने की स्थिति बन सकती है.वकील ने कोर्ट के सामने यह तर्क रखा कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या इससे काफी ज्यादा है इसलिए केवल 817 अनारक्षित अभ्यर्थियों को नौकरी देने से पूरी भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दूसरे अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं.इस पर सुप्रीम कोर्ट ने यह बात सामने रखी कि जिन अभ्यर्थियों का चयन होने का अधिकार बनता है उन्हें भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए. मामले में अदालत को अलग-अलग पक्षों के दावों और लागू नियमों के आधार पर आगे फैसला करना है.
आरक्षण की छूट लेकर सामान्य वर्ग में जाने का सवाल
सुनवाई में चयनित अभ्यर्थियों की ओर से वकील शोभा गुप्ता ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के सामान्य वर्ग में माइग्रेशन के मुद्दे पर भी दलील रखी.उनका सवाल था कि अगर किसी अभ्यर्थी ने भर्ती प्रक्रिया के दौरान आरक्षण से जुड़ी छूट का लाभ लिया है तो बाद में ज्यादा अंक आने पर वह सामान्य यानी अनारक्षित वर्ग में कैसे जा सकता है. उनकी दलील थी कि जिसने आरक्षण की छूट का फायदा लिया है उसे बाद में सामान्य वर्ग की सीट पर माइग्रेट करने का दावा नहीं करना चाहिए.इस दौरान उन्होंने अपने पक्ष के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के पिछले कुछ फैसलों का भी हवाला दिया हालांकि यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है और अलग-अलग पक्षों की दलीलें सुनी जा रही हैं इसलिए इन दलीलों को सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.
अगली सुनवाई में आरक्षण से प्रभावित अभ्यर्थियों का पक्ष
मौजूदा सुनवाई में चयनित अभ्यर्थियों की ओर से दलीलें रखी गई हैं. अब अगली सुनवाई में उन अभ्यर्थियों के वकीलों की दलील सुनी जाएगी जो आरक्षण से जुड़े विवाद के कारण प्रभावित हुए हैं. मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होनी है. इसके बाद यह साफ होगा कि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों और कानूनी आधार को किस तरह कोर्ट के सामने रखते हैं.फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आया है इसलिए 69 हजार शिक्षक भर्ती में चयनित अभ्यर्थियों की नौकरी और नई सूची से जुड़े किसी भी अंतिम परिणाम को अभी तय मानना सही नहीं होगा.
आखिर क्या है 69 हजार शिक्षक भर्ती का पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश में 5 दिसंबर 2018 को 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया गया था.इस भर्ती के लिए करीब 4 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने आवेदन किया था. इसके बाद 6 जनवरी 2019 को परीक्षा आयोजित की गई.परीक्षा के बाद 12 मई 2020 को परिणाम जारी हुआ. इस रिजल्ट में करीब 1.47 लाख अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए थे.भर्ती में कटऑफ को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी.सामान्य वर्ग की कटऑफ 67.11 फीसदी और ओबीसी वर्ग की कटऑफ 66.73 फीसदी रही थी.इसके बाद भर्ती की चयन प्रक्रिया और आरक्षण से जुड़े सवालों को लेकर मामला अदालतों तक पहुंचा और विवाद कई साल तक चलता रहा.
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वर्तमान में न्यूज़18 हिंदी (Network18 Digital)में असिस्टेंट एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पिछले 16 वर्षों से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इस दौरान प्रिंट, डिजिटल और टेलीविजन मीडिया में काम कर…
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