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fifa world cup player of the match award rule changed for muslim players: फीफा वर्ल्ड कप में खेल भावना और धार्मिक आस्था के सम्मान की अनूठी मिसाल दिखी है. फीफा ने ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए मुस्लिम खिलाड़ियों के प्रेजेंटेशन से बियर ब्रांड ‘मिशेलोब अल्ट्रा’ की ब्रांडिंग को पूरी तरह हटा दिया है. अब इस्लाम में शराब के निषेध का सम्मान करते हुए उनके लिए विशेष ‘सुपीरियर प्लेयर ऑफ द मैच’ बैकड्रॉप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कमर्शियल हितों और खिलाड़ियों की धार्मिक मान्यताओं के बीच एक बेहतरीन संतुलन बना है.
फीफा वर्ल्ड कप में मुस्लिम खिलाड़ियों के लिए बदले नियम.
नई दिल्ली. फीफा वर्ल्ड कप से एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक बदलाव की खबर सामने आ रही है. खेल भावना और सांस्कृतिक सम्मान की एक अनूठी मिसाल पेश करते हुए, फीफा ने इस साल ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ अवॉर्ड प्रेजेंटेशन के नियमों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। इस नए नियम के तहत, यदि यह प्रतिष्ठित पुरस्कार किसी मुस्लिम खिलाड़ी को मिलता है, तो बैकड्रॉप और प्रेजेंटेशन से बियर ब्रांड ‘मिशेलोब अल्ट्रा’ की ब्रांडिंग को पूरी तरह से हटा दिया गया है.
फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) में हर मैच के बाद ऑनलाइन फैंस वोटिंग के आधार पर ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का चुनाव किया जाता है. इस साल इस अवॉर्ड का आधिकारिक प्रायोजक मशहूर बियर ब्रांड ‘मिशेलोब अल्ट्रा’ है. आमतौर पर, मैच खत्म होने के बाद विजेता खिलाड़ी को ट्रॉफी सौंपी जाती है और वह आधिकारिक तस्वीरों के लिए एक खास बैकड्रॉप के सामने पोज देता है, जिस पर स्पॉन्सर का लोगो और ब्रांडिंग साफ नजर आती है. इसके बाद इन तस्वीरों को फीफा वर्ल्ड कप के तमाम सोशल मीडिया हैंडल्स पर शेयर किया जाता है.
बदलाव की वजह
इस्लाम धर्म में शराब का सेवन और उसका प्रचार करना पूरी तरह प्रतिबंधित माना गया है, इसलिए फीफा ने मुस्लिम खिलाड़ियों की धार्मिक मान्यताओं और आस्था का सम्मान करने का फैसला किया. जब भी कोई मुस्लिम खिलाड़ी इस अवॉर्ड के लिए चुना जा रहा है, तो फीफा एक ‘वैकल्पिक बैकड्रॉप’ का इस्तेमाल कर रहा है. इस संशोधित बैकड्रॉप से मिशेलोब अल्ट्रा का नाम और लोगो गायब रहता है. इसकी जगह वहां फीफा वर्ल्ड कप का आधिकारिक लोगो और ‘सुपीरियर प्लेयर ऑफ मैच’लिखा होता है. हालांकि, ट्रॉफी का मूल स्वरूप वही रहता है, लेकिन प्रेजेंटेशन के दौरान शराब ब्रांड से जुड़ा कोई भी संदर्भ वहां दिखाई नहीं देता.
इन मुस्लिम खिलाड़ियों के लिए बदला गया बैकड्रॉप
2026 टूर्नामेंट के दौरान अब तक कई बेहतरीन मुस्लिम खिलाड़ियों को यह अवॉर्ड मिल चुका है, और उन सभी के लिए फीफा ने इस विशेष व्यवस्था का पालन किया है. इन खिलाड़ियों की लिस्ट में शामिल हैं इस्माइल कोने (कनाडा), महमूद अबुनादा (कतर), यान डियोमांडे (आइवरी कोस्ट), रामिन रजाएयान (इरान), इमाम अशूर (मिस्र), अली ओलवान (जॉर्डन), इस्माइल सैबारी (मोरक्को) और जोहान मंजाम्बी (सविट्जरलैंड). इन सभी खिलाड़ियों ने जब अपनी ट्रॉफी ली, तो उनके पीछे कोई बियर ब्रांडिंग नहीं थी, जिससे वे बिना किसी धार्मिक संकोच के अपनी इस कामयाबी का जश्न मना सके.
जब खिलाड़ी ने ठुकरा दिया था अवॉर्ड
फीफा वर्ल्ड कप और अल्कोहल ब्रांड्स का साथ काफी पुराना है. इससे पहले 2018 और 2022 के फीफा वर्ल्ड कप में ‘बडवाइजर’ प्लेयर ऑफ द मैच अवॉर्ड का आधिकारिक स्पॉन्सर था. इस दौरान साल 2018 के वर्ल्ड कप में एक बड़ा विवाद और चर्चा का विषय तब सामने आया, जब मिस्र के स्टार गोलकीपर मोहम्मद अल शनावी ने उरुग्वे के खिलाफ अपने शानदार प्रदर्शन के लिए मिला ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ का अवॉर्ड लेने से साफ इनकार कर दिया था. अल शनावी ने ऐसा इसलिए किया था क्योंकि वह ट्रॉफी एक अल्कोहल ब्रांड (बडवाइजर) द्वारा प्रायोजित थी और उनकी धार्मिक मान्यताएं इसकी इजाजत नहीं देती थीं.
व्यावसायिक हितों और धार्मिक सम्मान के बीच संतुलन
मोहम्मद अल शनावी की उस घटना और खिलाड़ियों की लगातार आ रही मांगों से सबक लेते हुए, फीफा ने 2026 वर्ल्ड कप में एक बीच का रास्ता निकाला है. फीफा का यह कदम दिखाता है कि वह अपने करोड़ों डॉलर के स्पॉन्सरशिप एग्रीमेंट को भी बचाए रखना चाहता है और साथ ही अपने खिलाड़ियों की भावनाओं और धार्मिक स्वतंत्रता को भी ठेस नहीं पहुंचाना चाहता. खेल विश्लेषकों का मानना है कि फीफा का यह कदम खेल की दुनिया में विविधता और समावेशिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रगतिशील कदम है। यह साबित करता है कि खेल का मैदान सिर्फ गोल करने या मैच जीतने की जगह नहीं है, बल्कि यह अलग-अलग संस्कृतियों और आस्थाओं का सम्मान करने का भी एक खूबसूरत मंच है.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें






