Last Updated:
इस बार फीफा वर्ल्ड कप फुटबॉल सबसे छोटा देश आया है. जो आबादी और क्षेत्रफल दोनों के लिहाज से क्वालीफाई करने वाला अब तक का सबसे छोटा देश है. इस देश की आबादी केवल 1.5 लाख से लेकर 1.7 लाख है यानि हमारे देश के किसी भी शहर की आबादी से आमतौर पर कम. जानते हैं इस देश के बारे में…और ये भी इतने छोटे देश ने कैसे इतनी शानदार टीम बना डाली.

इस देश छोटे से देश का नाम कराकाओ है. ये कैरिबियाई द्वीपों में स्थित है. इसकी आबादी डेढ़ लाख से कुछ ही ज्यादा होगी. क्षेत्रफल है 444 वर्ग किमी यानि दिल्ली (1,483 वर्ग किमी) से तिहाई छोटा. एक जमाने में ये नीदरलैंड्स का उपनिवेश था. फीफा वर्ल्ड कप में क्वालिफाई करने वाला ये अब तक का सबसे छोटा देश है. इस देश में भारत से गए लोगों की एक छोटी सी आबादी भी रहती है. (AI Photo)

कुराकाओ ने अपने छोटे आकार के बाद भी देश में गजब की मजबूत फुटबॉल संस्कृति विकसित की है. कैरेबियन सागर में स्थित यह छोटा सा द्वीप वेनेजुएला के तट से 40 मील दूर है. ये शीर्ष बेसबॉल खिलाड़ियों को पैदा करने के लिए जाना जाता है. एक तरह से ये अब भी नीदरलैंड के ही अधीन है, क्योंकि इसके सैन्य एवं विदेश मामलों का संचालन नीदरलैंड्स की राजधानी हेग से होता है. सभी कुराकाओवासियों के पास डच पासपोर्ट हैं. (AI Photo)

आमतौर पर कुराकावो के लोग अपनी फुटबाल को नीदरलैंड में ही जाकर और बेहतर करते हैं. कुराकाओ के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी यूरोप और वहां की शीर्ष स्तरीय फुटबॉल लीगों और अकादमियों की ओर रुख करते हैं. इसे फीफा की सदस्यता 2011 में मिली. शुरुआत में बेहद कमजोर रहने वाली यह टीम कैसे विश्व कप तक पहुंची, इसकी कहानी बहुत दिलचस्प है. कुराकावो की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र उसकी खेल नर्सरी में नहीं, बल्कि नीदरलैंड में छिपा था. कुराकावो मूल के करीब 1.35 लाख लोग नीदरलैंड में रहते हैं. (AI Photo)
Add News18 as
Preferred Source on Google

वो वहां की विश्व स्तरीय फुटबॉल अकादमियों में पले-बढ़े. डच लीग में खेलने वाले पेशेवर खिलाड़ियों को कुराकावो फुटबॉल फेडरेशन (FFK) ने अपनी राष्ट्रीय टीम से खेलने के लिए राजी किया. मौजूदा टीम के लगभग सभी खिलाड़ी डच फुटबॉल सिस्टम की देन हैं, जिनके माता-पिता या दादा-दादी कुराकावो से थे. (AI Photo)

2023 से पहले पैसे की कमी के कारण यूरोप में खेल रहे खिलाड़ी कैरेबियन आकर मैच खेलने से कतराते थे लेकिन डच-तुर्की ट्रैवल कंपनी के साथ हुए एक बड़े स्पॉन्सरशिप सौदे ने पूरी तस्वीर बदल दी. खिलाड़ियों के लिए चार्टर फ्लाइट्स, बेहतर ट्रेनिंग कैंप्स और सुविधाओं का इंतजाम किया गया, जिससे टीम पूरी तरह पेशेवर बन गई. (AI Photo)

फीफा ने अपने डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत कुराकावो फुटबॉल फेडरेशन को लगभग 16 मिलियन डॉलर की मदद दी. इससे वहां एक आधुनिक टेक्निकल सेंटर, हाई-क्वालिटी फ्लडलाइट पिच और डोमेस्टिक लीग का ढांचा तैयार हुआ. इसने स्थानीय स्तर पर भी ‘फुटबॉल नर्सरी’ को जिंदा किया और अब वहां के बच्चे गलियों में फुटबॉल खेल रहे हैं. (AI Photo)

कुराकावो कैरेबियन सागर में स्थित एक छोटा और बेहद खूबसूरत द्वीपीय देश है. यह देश नीदरलैंड साम्राज्य का एक स्वायत्त हिस्सा है. अपनी अनूठी संस्कृति और खूबसूरत समुद्री तटों के लिए ये फेमस है. यहां मुख्य रूप से पपियामेंटू, डच और अंग्रेजी बोली जाती है. यहां के लोगों की जीवनशैली में एक खास दर्शन झलकता है जिसे वो “पोको पोको” कहते हैं, जिसका मतलब है “धीरे-धीरे, आराम से जीवन का आनंद लो.” वे संगीत, डांस और कार्निवल के बहुत शौकीन होते हैं. (AI Photo)

कुराकावो एक बहु-सांस्कृतिक समाज है, जहां करीब 55 अलग-अलग देशों के मूल निवासी एक साथ रहते हैं, जिसमें करीब 100 साल भारत से गए लोग भी शामिल हैं, जो मुख्यतौर पर वहां व्यापार करने गए थे, इसमें सिंधी और गुजराती ज्यादा हैं. कुराकावो में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 1500 से 2000 के बीच है. यहां के लोग स्वभाव से बेहद मिलनसार और बहुभाषी होते हैं. आम नागरिक भी आसानी से चार भाषाएं बोल लेता है, जिसमें उनकी स्थानीय क्रियोल भाषा ‘पपियामेंटू’ शामिल है. (AI Photo)

कैरेबियन क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में कुराकावो की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत और विकसित है. विश्व बैंक इसे ‘हाई-इनकम इकोनॉमी’ यानी उच्च आय वाली अर्थव्यवस्था के रूप में वर्गीकृत करता है. यहां प्रति व्यक्ति आय करीब $21,000 से $27,000 अमेरिकी डॉलर के बीच है. जीवन स्तर के मामले में पूरे कैरेबियन क्षेत्र में शीर्ष देशों में गिना जाता है. (AI Photo)

साल 2018 में वहां की बड़ी तेल रिफाइनरी बंद होने के बाद से पर्यटन यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है. वर्तमान में जीडीपी में इसका योगदान 23% से अधिक है. नीदरलैंड, अमेरिका और कोलंबिया से हर साल लाखों पर्यटक यहां आते हैं.यहां सड़कें, इंटरनेट और स्वास्थ्य सुविधाएं यूरोपीय स्तर की हैं. हालांकि महंगाई ज्यादा है. अमीर-गरीब के बीच आर्थिक असमानता भी है. (AI Photo)






