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5 oldest footballers hattrick records world cup: फुटबॉल की दुनिया में फीफा वर्ल्ड कप को सबसे बड़ा मंच माना जाता है.इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में गोल करना हर खिलाड़ी का सपना होता है, लेकिन ‘हैट्रिक’ लगाना किसी भी फुटबॉलर के करियर का सबसे यादगार और जादुई पल होता है. विश्व कप के इतिहास में कई महान खिलाड़ियों ने अपनी कलाबाज़ी और फुर्ती से मैदान पर इतिहास रचा है. अक्सर माना जाता है कि फुटबॉल जैसे रफ़्तार और दमखम वाले खेल में बढ़ती उम्र के साथ खिलाड़ियों का प्रदर्शन धीमा होने लगता है. लेकिन इतिहास गवाह है कि जब बात अनुभव, सूझबूझ और क्लास की आती है, तो उम्र महज़ एक संख्या बनकर रह जाती है. दुनिया के कई दिग्गज फुटबॉलरों ने अपनी ढलती उम्र में भी मैदान पर ऐसा जलवा बिखेरा कि बड़े-बड़े युवा खिलाड़ी देखते रह गए।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम 33 साल से ज्यादा उम्र में वर्ल्ड कप में हैट्रिक लगाने का रिकॉर्ड है.
नई दिल्ली. पुर्तगाल के सर्वकालिक महान फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम फुटबॉल इतिहास के अनगिनत रिकॉर्ड दर्ज हैं, लेकिन साल 2018 के फीफा वर्ल्ड कप में उन्होंने जो किया, वह सदियों तक याद रखा जाएगा. रोनाल्डो ने वर्ल्ड कप इतिहास में हैट्रिक लगाने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया. उन्होंने यह अद्भुत कारनामा 33 साल 130 दिन की उम्र में करके दुनिया को हैरान कर दिया था. यह मुकाबला पुर्तगाल और उसके चिर-प्रतिद्वंद्वी स्पेन के बीच था. ग्रुप स्टेज के इस बेहद रोमांचक और हाई-वोल्टेज मैच में रोनाल्डो अकेले ही स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए. उनकी इस जादुई हैट्रिक के दम पर पुर्तगाल की टीम स्पेन के खिलाफ 3-3 से ड्रा खेलने में सफल रही थी.
इस मैच की शुरुआत से ही क्रिस्टियानो रोनाल्डो (Cristiano Ronaldo) बेहद आक्रामक मूड में नजर आ रहे थे. मुकाबले के चौथे मिनट में ही पुर्तगाल को पेनल्टी मिली. रोनाल्डो ने बिना कोई गलती किए गेंद को नेट में डाल दिया और टीम को 1-0 से आगे कर दिया. इसके बाद स्पेन ने वापसी की, लेकिन 44वें मिनट में रोनाल्डो ने फिर अपना जादू दिखाया. उन्होंने स्पेनिश गोलकीपर डेविड डी गेया को छकाते हुए एक बेहतरीन गोल किया और हाफ-टाइम से ठीक पहले पुर्तगाल को 2-1 की बढ़त दिला दी. इसके बाद दूसरे हाफ में स्पेन ने शानदार वापसी की और लगातार दो गोल दागकर मैच में 3-2 की बढ़त बना ली. ऐसा लग रहा था कि पुर्तगाल यह मैच हार जाएगा। समय बीतता जा रहा था और 87 मिनट हो चुके थे. तभी 88वें मिनट में पुर्तगाल को स्पेन के गोल पोस्ट से करीब 25 गज की दूरी पर एक फ्री-किक मिली. मैदान पर सन्नाटा था. रोनाल्डो ने गहरी सांस ली, दौड़ लगाई और एक ऐसा हैरतअंगेज शॉट खेला कि गेंद स्पेन के दीवार जैसे खिलाड़ियों के ऊपर से घूमती हुई सीधे गोल पोस्ट के टॉप कॉर्नर में जा धंसी. इस अविश्वसनीय फ्री-किक गोल के साथ ही रोनाल्डो ने न केवल अपनी हैट्रिक पूरी की, बल्कि अपनी टीम को 3-3 की बराबरी पर लाकर हार से बचा लिया.
रॉब रेनसेनब्रिंक ने 20 साल 335 दिन की उम्र में दागा था हैट्रिक
फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में सबसे उम्रदराज हैट्रिक लगाने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में नीदरलैंड्स के दिग्गज रॉब रेनसेनब्रिंक का नाम भी बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है. साल 1978 के फीफा वर्ल्ड कप के दौरान उन्होंने 30 साल 335 दिन की उम्र में एक बेमिसाल हैट्रिक लगाई थी. ग्रुप स्टेज के इस मुकाबले में नीदरलैंड्स का सामना ईरान की टीम से था.रेनसेनब्रिंक उस दिन अलग ही लय में थे और उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत नीदरलैंड ने ईरान के खिलाफ 3-0 से एकतरफा जीत दर्ज की थी. दिलचस्प बात यह है कि इस मैच में उन्होंने पेनल्टी का बखूबी इस्तेमाल किया. मुकाबले के 40वें मिनट में नीदरलैंड्स को पेनल्टी मिली, जिसे रॉब रेनसेनब्रिंक ने आसानी से गोल में बदलकर अपनी टीम का खाता खोला. इसके बाद मैच के 62वें मिनट में उन्होंने मैदान पर बेहतरीन मूव बनाते हुए अपना दूसरा गोल दागा और टीम की बढ़त को दोगुना (2-0) कर दिया. ईरान की टीम अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाई थी कि 79वें मिनट में नीदरलैंड्स को एक और पेनल्टी मिल गई. रेनसेनब्रिंक ने एक बार फिर ठंडे दिमाग से पेनल्टी को गोल में तब्दील किया और अपनी हैट्रिक पूरी करते हुए टीम को 3-0 से शानदार जीत दिला दी.
पेड्रो सेआ ने 1930 के वर्ल्ड कप में बिखेरी थी चमक
फुटबॉल इतिहास के सबसे पहले फीफा वर्ल्ड कप (1930) को भला कौन भूल सकता है. इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट में उरुग्वे के स्टार खिलाड़ी पेड्रो सेआ ने अपनी चमक बिखेरी थी. उन्होंने 29 साल 329 दिन की उम्र में उरुग्वे की तरफ से खेलते हुए यूगोस्लाविया के खिलाफ एक यादगार हैट्रिक लगाई थी. यह कोई आम मैच नहीं था, बल्कि साल 1930 के फीफा वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मुकाबला था, जहां दबाव चरम पर था। इस बेहद महत्वपूर्ण मैच को उरुग्वे ने पेड्रो के दम पर 6-1 के बड़े अंतर से अपने नाम किया था. मैच की शुरुआत उरुग्वे के लिए अच्छी नहीं रही थी और यूगोस्लाविया ने शुरुआती बढ़त बना ली थी. लेकिन मुकाबले के 19वें मिनट में पेड्रो ने एक बेहतरीन गोल दागते हुए अपनी टीम को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया. इस गोल ने उरुग्वे की टीम में नया जोश भर दिया. इसके बाद उरुग्वे के खिलाड़ियों ने मैच पर पूरी तरह नियंत्रण बना लिया. पेड्रो यहीं नहीं रुके, उन्होंने मैच के दूसरे हाफ में यूगोस्लाविया के डिफेंस को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया. उन्होंने 66वें मिनट में अपना दूसरा और फिर 72वें मिनट में अपना तीसरा गोल दागकर न केवल अपनी हैट्रिक पूरी की, बल्कि उरुग्वे की 6-1 से ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित कर टीम को फाइनल में पहुंचा दिया.
गैब्रियल बतिस्तुता सबसे खतरनाक फॉरवर्ड माने जाते थे
अर्जेंटीना के महान स्ट्राइकर गैब्रियल बतिस्तुता, जिन्हें फैंस प्यार से ‘बतिगोल’ भी कहते थे, अपने दौर के सबसे खतरनाक फॉरवर्ड माने जाते थे. फीफा वर्ल्ड कप 1998 के ग्रुप स्टेज मुकाबले में उन्होंने जमैका के खिलाफ अपनी खतरनाक फॉर्म का नजारा पेश करते हुए एक शानदार हैट्रिक लगाई थी. इस मैच में अर्जेंटीना ने जमैका को 5-0 से शिकस्त दी थी. इस मुकाबले की शुरुआत अर्जेंटीना के एक और स्टार खिलाड़ी एरियल ओर्टेगा के जलवे से हुई थी. ओर्टेगा ने मैच के 32वें मिनट में पहला गोल दागा और फिर 55वें मिनट में दूसरा गोल करके अर्जेंटीना को 2-0 से आगे कर दिया. इसके बाद शुरू हुआ गैब्रियल बतिस्तुता का असली तूफान. बतिस्तुता ने मैच के आखिरी 15 मिनटों में जमैका के डिफेंस को तहस-नहस कर दिया. उन्होंने सबसे पहले 73वें मिनट में एक जोरदार शॉट के साथ अपना पहला गोल किया. इसके ठीक 5 मिनट बाद, यानी 78वें मिनट में उन्होंने गेंद को फिर से जाल में उलझाकर टीम का स्कोर 4-0 कर दिया. जमैका की टीम अभी संभल भी नहीं पाई थी कि 83वें मिनट में बतिस्तुता ने अपना तीसरा गोल दागकर अपनी हैट्रिक पूरी की और अर्जेंटीना को 5-0 से एकतरफा और भव्य जीत दिला दी.
टिओफिलो कुबिल्यास ने यूं अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया
पेरू के फुटबॉल इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार टिओफिलो कुबिल्यास ने भी वर्ल्ड कप के इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया है. उन्होंने साल 1978 के फीफा वर्ल्ड कप में 29 साल 95 दिन की उम्र में यह ऐतिहासिक कारनामा किया था. ग्रुप स्टेज के इस बेहद अहम मैच में पेरू का सामना ईरान से था. कुबिल्यास की जादुई हैट्रिक की बदौलत पेरू ने ईरान के खिलाफ 4-1 से एक बड़ी और शानदार जीत दर्ज की थी. इस मैच में पेरू ने शुरुआत से ही दबदबा बना लिया था. मैच के 36वें मिनट में पेरू को पेनल्टी मिली, जिसे कुबिल्यास ने बेहद खूबसूरती से गोल में बदला. इसके ठीक तीन मिनट बाद, यानी 39वें मिनट पर पेरू को एक और पेनल्टी मिल गई. कुबिल्यास ने एक बार फिर अपनी क्लास दिखाते हुए गेंद को गोल पोस्ट में डाल दिया और टीम का स्कोर 3-0 कर दिया. हालांकि, इसके बाद ईरान के हसन रौशन ने 41वें मिनट में एक गोल करके अपनी टीम की वापसी कराने की कोशिश की और स्कोर 3-1 हो गया. लेकिन दूसरे हाफ में कुबिल्यास ने ईरान की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. मैच के 79वें मिनट में उन्होंने फील्ड से एक शानदार गोल दागते हुए न केवल अपनी हैट्रिक पूरी की, बल्कि पेरू की 4-1 से जीत पर मुहर लगा दी.
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कमलेश राय वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर कार्यरत हैं. 17 वर्षों से अधिक के अपने सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में उन्होंने डिजिटल मीडिया की बारीकियों और खबरों की गहरी समझ के साथ एक विशिष्ट पहचान बनाई ह…और पढ़ें






