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Sonbhadra । जिले में आंगनवाड़ी भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पारदर्शिता और जीरो टॉलरेंस नीति के सरकारी दावों के बीच असनहर प्रथम केंद्र की भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जांच में तथ्य स्पष्ट होने के बावजूद पीड़िता को न्याय न मिलने से वह दर-दर भटकने को मजबूर है।
पूरा मामला असनहर गांव स्थित आंगनवाड़ी केंद्र के रिक्त पद से जुड़ा है, जहां गांव की मूल निवासी बबिता गुप्ता ने नियमानुसार आवेदन किया था। आरोप है कि गांव के प्रधान ने अपने प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए अपनी पुत्री सुनीता, जिसकी शादी वर्षो पूर्व छत्तीसगढ़ में हो चुकी है, को लाभ पहुंचाने के लिए स्थानीय लेखपाल से मिलीभगत कर फर्जी निवास प्रमाण पत्र तैयार कराया और उसे भर्ती सूची में शामिल करवा दिया।

पीड़िता बबिता गुप्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साक्ष्य एकत्र कर जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) कार्यालय में प्रस्तुत किए, जिसमें विवाह प्रमाण पत्र, ग्राम प्रतिनिधियों के बयान एवं अन्य दस्तावेज शामिल थे। हालांकि, आरोप है कि DPO स्तर से उचित कार्रवाई करने के बजाय पीड़िता को तहसील स्तर पर टाल दिया गया।
मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद जांच टीम गठित की गई। नायब तहसीलदार जितेंद्र कुमार की जांच में स्पष्ट पाया गया कि सुनीता की शादी छत्तीसगढ़ में चार वर्ष पूर्व हो चुकी है तथा वह असनहर गांव की वास्तविक निवासी नहीं है। जांच रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट हुआ कि प्रस्तुत निवास प्रमाण पत्र अवैध रूप से निर्गत किया गया था।

इसके बावजूद जांच रिपोर्ट के अनुसार आवश्यक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई गई और प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के बजाय लंबित रखा गया। इससे पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद धुंधली होती दिख रही है।
पीड़िता का आरोप है कि जांच में सत्य सामने आने के बावजूद अधिकारियों द्वारा मामले को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है और भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करने की बात कहकर उसे गुमराह किया जा रहा है।
पीड़िता बबिता गुप्ता ने अब नवागत जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से न्याय की गुहार लगाई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रमुख सवाल: जांच रिपोर्ट में फर्जीवाड़ा स्पष्ट होने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?, फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करने वालों पर मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया?, क्या पूरी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित कर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है?, यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।






