संवाददात@विशाल टंडन…..
— परशुराम प्रतिमा शिला पूजन के साथ सम्पन्न हुआ विशेष आयोजन, शंकराचार्य जी ने किया पूजन-अर्चन

सनातन वैदिक परम्परा, गौसंरक्षण एवं धर्मजागरण के दिव्य उद्देश्य को लेकर संचालित “गविष्ठी यात्रा” के अंतर्गत ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन आगमन रविवार को सोनभद्र नगर स्थित श्री राम जानकी मंदिर न्यास परिसर में अत्यन्त श्रद्धा, भक्ति एवं वैदिक मंगलध्वनियों के मध्य सम्पन्न हुआ।
जगद्गुरु शंकराचार्य जी के आगमन पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं, गौभक्तों एवं सनातन धर्मावलम्बियों ने शंखनाद, घड़ियाल एवं घंटियों की गूंज के साथ उनका भव्य एवं भावपूर्ण स्वागत किया। मंदिर के मुख्य द्वार पर महिलाओं द्वारा मंगल कलश के साथ उनका अभिनन्दन किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा एवं भक्ति भाव से ओतप्रोत हो उठा।
पूज्यपाद शंकराचार्य जी ने श्रीराम-जानकी सरकार सहित मंदिर परिसर में विराजमान समस्त देवी-देवताओं का विधिवत पूजन-अर्चन कर राष्ट्र, धर्म एवं गौसंरक्षण की मंगलकामना की। इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार और हरिनाम संकीर्तन से पूरा परिसर भक्तिमय बना रहा। कार्यक्रम के अंतर्गत प्रस्तावित भगवान श्री परशुराम जी की प्रतिमा स्थापना हेतु शिला पूजन का भी पावन अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। वैदिक विधि-विधान से सम्पन्न इस अनुष्ठान में धर्म, शौर्य एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया गया।
मंदिर न्यास के अध्यक्ष डॉ. मार्कण्डेय राम पाठक द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य जी की पादुका पूजन कर उनका विधिवत स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। वहीं प्रबंधक आशुतोष पाठक ने स्वागताध्यक्ष के रूप में समस्त व्यवस्थाओं का संचालन किया। सनातन परम्परा के अनुसार सूर्यास्त के पश्चात मौन-व्रत की मर्यादा का पालन होने के कारण शंकराचार्य जी द्वारा सार्वजनिक संबोधन नहीं दिया गया।
तथापि उनके सहचर संतों एवं आचार्यों द्वारा उपस्थित श्रद्धालुओं को “गविष्ठी संकल्प” दिलाया गया, जिसमें गौमाता के संरक्षण, भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं धर्मजागरण हेतु समाज को संगठित रहने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम में रामानंद पाण्डेय, कौशलेश पाठक, धीरज पाण्डेय, शशांक मिश्रा, मृदुल मिश्रा, मोनू पाण्डेय, अभिषेक चौबे, जितेन्द्र देव, जीतू उमर वैश्य, संदीप शुक्ला, विनोद, कैलाश नाथ, रोहिल मिश्रा, प्रांजल, अनुपम, राजेश द्विवेदी, अरविन्द सिंह, विकास, सुशील पाठक, शैलेन्द्र चतुर्वेदी, बद्रीनारायण पाठक, राजीव त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गौभक्त उपस्थित रहे। सम्पूर्ण आयोजन भक्तिभाव, वैदिक संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य जी के दर्शन एवं संकल्प प्राप्त कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।