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Sonbhadra । मुहर्रम की नौवीं पर गुरुवार को जिलेभर में श्रद्धा और अकीदत के साथ विभिन्न स्थानों पर ताजिए बैठाए गए। देर रात तक ताजिया बैठाने का सिलसिला चलता रहा और ‘या अली-या हुसैन’ की सदाओं से पूरा माहौल गूंज उठा। अंजुमनों ने मातम, मर्सिया और नौहाख्वानी के जरिए करबला के शहीद इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश की, जबकि अखाड़ों के युवाओं ने अलम के साथ पारंपरिक कला-कौशल का प्रदर्शन किया।
ओबरा के चोपन रोड स्थित पुरानी बड़ी चौक पर भी ताजिया बैठाया गया। यहां दुलदुल का घोड़ा सभी के आकर्षण का केंद्र रहा। ताजियादार मोहम्मद परवेज आलम ने बताया कि दशकों से उनके यहां ताजिया चौक पर बैठाया जाता रहा है, यह नगर की पुरानी और बड़ी चौक है, इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि श्रवण गौड़, समाजसेवी रमेश सिंह यादव, सभासद अमित गुप्ता, हामिद भाई, कादिर जिलानी, हसरत अली, लियाकत अली सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

शुक्रवार को सभी ताजियों को निर्धारित करबला में दफ्न किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ भारी पुलिस बल लगातार संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त करता रहा।
इमाम हुसैन की शहादत को किया याद:
मुहर्रम के अवसर पर लोगों ने करबला की घटना को याद करते हुए इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत को नमन किया। अंजुमनों द्वारा नौहाख्वानी और मर्सिया पेश किए गए, जिन्हें सुनकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

अलम के जुलूस में दिखा पारंपरिक कौशल:
नगर के विभिन्न स्थानों से अलम के जुलूस निकाले गए। जुलूस नगर भ्रमण कर अपने अपने चौक और बैठाए, इस दौरान अखाड़े के युवाओं समेत सभी को जगह जगह शरबत से स्वागत किया गया, इसके बाद चौक पर गदका, लकड़ी, बनेठी, चक्कर समेत अन्य पारंपरिक युद्ध कलाओं का प्रदर्शन किया गया।
पुरानी बाजार सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी देर रात तक ताजिया बैठाने और अलम के जुलूस का क्रम चलता रहा। पूरे आयोजन के दौरान पुलिस बल शांति एवं कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद रहा।





