संवाददाता@विशाल टंडन…….

अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर जिला अस्पताल परिसर में बाल विवाह मुक्त भारत योजना के अंतर्गत एक वृहद जन-जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को समाप्त करना तथा महिलाओं एवं बच्चों को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का संचालन परियोजना समन्वयक मुकेश कुमार सिंह के नेतृत्व में किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में आम नागरिक, स्वास्थ्य कर्मी एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। मुकेश सिंह ने बताया कि यह योजना वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ संचालित की जा रही है। इसके तहत ग्राम स्तर पर निगरानी समितियों का गठन एवं निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर प्रशासन विशेष सतर्कता बरतता है क्योंकि इस दौरान बाल विवाह के मामलों की संभावना बढ़ जाती है। कार्यक्रम में बाल श्रम रोकथाम और शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के अंतर्गत बच्चों को 6 से 14 वर्ष की आयु में मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा की जानकारी भी दी गई।
बाल कल्याण समिति के सदस्य अमित सिंह चंदेल ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की जानकारी देते हुए बताया कि लड़कियों की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़कों की 21 वर्ष निर्धारित है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह में संलिप्तता या सहयोग करने पर 2 वर्ष तक का कारावास और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। कार्यक्रम में चाइल्ड हेल्पलाइन टीम की सीमा शर्मा, सुधा गिरी, सत्यम चौरसिया, अंशु गिरी, अनिल यादव सहित स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने बाल विवाह मुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
अंत में नागरिकों को आपात स्थिति में सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबरों
1098 (चाइल्ड हेल्पलाइन), 112 (आपात सेवा), 1090 (वीमेन पावर लाइन), 1076 (मुख्यमंत्री हेल्पलाइन)की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने अपील की कि बाल विवाह या बाल श्रम की किसी भी घटना की सूचना तुरंत इन नंबरों पर दें, सूचना देने वाले की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।