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Asian Boxing Championship: भारतीय मुक्केबाजों ने एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया. मेंस कैटेगरी में भारत ने 5 गोल्ड सहित 16 मेडल जीते जबकि वुमेंस कैटेगरी में भारत की झोली में 10 मेडल गिरे. विश्वनाथ सुरेश ने गोल्ड जीतकर भारत के लिए आखिरी दिन यादगार बना दिया.

विश्नाथ सुरेश ने एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड.
उलानबटोर (मंगोलिया). भारत ने एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में पुरुषों के 50 किलोग्राम वर्ग में विश्वनाथ सुरेश के स्वर्ण पदक के साथ अपने यादगार अभियान का समापन किया. विश्वनाथ ने फाइनल में जापान के दाइची इवाई को 5-0 से हराया. सचिन (60 किलोग्राम) ने कड़े मुकाबले में रजत पदक जीता जिससे पुरुषों की टीम का प्रदर्शन शानदार रहा. भारत पदक तालिका में पांच स्वर्ण पदक के साथ दूसरे स्थान पर रहा. कजाकिस्तान ने भारत से एक स्वर्ण पदक ज्यादा जीता और तालिका में पहले स्थान पर रहा. हालांकि कुल मिलाकर सबसे ज्यादा (16) पदक भारत ने ही जीते.
इस प्रदर्शन की सबसे बड़ी खासियत भारतीय महिला टीम का ऐतिहासिक प्रदर्शन रहा जिसमें उन्होंने 10 पदक जीतकर तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया. इन 10 पदकों में चार स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक शामिल थे जो महाद्वीपीय स्तर पर उनके अब तक के सबसे अच्छे प्रदर्शन में से एक है. राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए विश्वनाथ ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया जो मुक्केबाजी की दुनिया में उनकी तेजी से बढ़ती लोकप्रियता और सफलता का एक अहम पड़ाव है.
विश्नाथ सुरेश ने एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीता गोल्ड.
विश्वनाथ ने अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी मजबूत पहचान बना ली है. उलानबटोर में उनका अभियान खास तौर पर प्रभावशाली रहा जिसमें फाइनल तक पहुंचने के दौरान उन्होंने दुनिया के नंबर एक मुक्केबाज को हराकर उलटफेर किया. टीम के प्रदर्शन पर बात करते हुए भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अध्यक्ष अजय सिंह ने कहा, ‘भारतीय मुक्केबाजी और हमारी महिला मुक्केबाजों के लिए यह एक शानदार अभियान रहा है. हमारी महिलाओं ने चार स्वर्ण पदक जीतकर पदक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया है. हमारी पुरुष टीम का प्रदर्शन भी एक बार फिर शानदार रहा, खास तौर पर युवा विश्वनाथ का जिन्होंने स्वर्ण पदक जीता.
उनका प्रदर्शन हमारी ‘पाइपलाइन’ यानी भविष्य के खिलाड़ियों की तैयारी की मजबूती को दिखाता है.’ उन्होंने कहा, ‘खास बात यह है कि हमारे यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. पिछली विश्व चैंपियनशिप के बाद टीम में कई बदलाव होने के बावजूद इस टीम ने जबरदस्त जुझारूपन और क्षमता का प्रदर्शन किया है और महाद्वीप के कुछ बेहतरीन मुक्केबाजों को हराकर खिताब अपने नाम किए हैं.’ सिंह ने कहा, ‘हम उभरती हुई प्रतिभाओं की एक नई लहर और कई पदक दावेदारों को बड़े मंच पर आगे आते देख रहे हैं.’
महिला टीम के लिए मीनाक्षी हुड्डा (48 किलोग्राम), प्रीति पंवार (54 किलोग्राम), प्रिया घंघास (60 किलोग्राम) और अरुंधति चौधरी (70 किलोग्राम) ने स्वर्ण पदक जीते जबकि जैस्मीन लंबोरिया (57 किलोग्राम) और अल्फिया पठान (80 किलोग्राम से ज्यादा) ने रजत पदक हासिल किए. इनके अलावा चार मुक्केबाजों ने कांस्य पदक भी जीते.
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करीब 15 साल से पत्रकारिता में सक्रिय. दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई. खेलों में खासकर क्रिकेट, बैडमिंटन, बॉक्सिंग और कुश्ती में दिलचस्पी. IPL, कॉमनवेल्थ गेम्स और प्रो रेसलिंग लीग इवेंट्स कवर किए हैं. फरवरी 2022 से…और पढ़ें
