घोरावल/सोनभद्र. @विजय अग्रहरी…..

श्री उमामहेश्वर मंदिर शिवद्वार के प्रांगण में आयोजित में 7 दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ बुधवार को विशाल भंडारे के साथ संपन्न हो गया। महायज्ञ के आखिरी दिन यज्ञाचार्य मनीष पांडेय ने भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया और पूर्णाहुति की प्रक्रिया संपन्न कराया। व्यास पीठ से श्री राधे अच्युतानंद शुक्ल ने भगवान के कल्कि अवतार और सुदामा कृष्ण मिलन का भावपूर्ण एवं सुंदर वर्णन किया।
उन्होंने कहा मित्रता का आदर्श रूप है भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा जी की मित्रता। पत्नी के आग्रह पर सुदामा अपने सखा द्वारिकाधीश के महल के द्वार पर पहुंचे। द्वारपाल से सुदामा के आने की बात सुनते ही श्रीकृष्ण बेसुध होकर सुदामा सुदामा पुकारते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे और सुदामा को अपने सीने से लगा लिया। यह देख सभी लोग अचंभित हो गए। कृष्ण सुदामा को अपने राज सिंहासन पर बैठाया। उन्होंने कहा कि ज्ञान, भक्ति, उत्तम चरित्र और धर्म के अनुसरण से मानव अपने जीवन का कल्याण कर सकता है।
श्री शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को भागवत महापुराण सात दिन के अंदर सुना कर उन्हें श्रीहरि विष्णु के परम धाम का अधिकारी बनाया। भागवत महापुराण का सदा श्रवण करना चाहिए, बार-बार करना चाहिए यह भगवान की अनंत कथा है, जो निरंतर चलती रहती है। उन्होंने कहा कि कलियुग में भगवान के नाम का जाप कल्याण का सर्वश्रेष्ठ साधन है।
इस मौके पर सुनील कुमार दुबे, यादवेंद्र शुक्ला, उमाशंकर पाठक, सुरेश गिरी, बैकुंठ शुक्ल, विनीत तिवारी, ग्राम प्रधान सियाराम यादव, विमलेश चौबे, नीरज चौरसिया, सुभाष गिरी,सुनील शुक्ला, अजय गिरी, शिवराज गिरी इत्यादि मौजूद रहे।