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Ghazipur News: गाजीपुर, उत्तर प्रदेश के मिश्रा बाजार में स्थित “एक ताखे की मस्जिद” अपनी अनोखी बनावट के कारण पूरे भारत में मशहूर है. करीब 200-300 साल पुरानी यह धरोहर NCERT की किताबों और UPSC जैसे प्रतिष्ठित परीक…और पढ़ें
200 साल पुरानी मजार से मस्जिद तक का सफर
स्थानीय बुज़ुर्गों की मानें तो, इस स्थान पर पहले से ही एक पुरानी मजार हुआ करती थी. करीब 200–300 साल पुरानी इस मजार को देखते हुए लोगों ने यहां एक मस्जिद बनाने का निर्णय लिया. मस्जिद को पूरी तरह बनने में 70 से 80 साल का समय लग गया.
“एक ताखे की मस्जिद” की सबसे बड़ी विशेषता (खासियत) यही है कि पूरे भारत में इस तरह की मस्जिद और कहीं नहीं मिलती. इसकी इसी विलक्षण बनावट और एतिहासिक महत्व के चलते इसका ज़िक्र NCERT की पाठ्यपुस्तकों में किया गया है और यह मस्जिद UPSC सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी चर्चा का विषय रही है.
स्थानीयों की ज़ुबानी
मेडिकल स्टोर चलाने वाले मियां भाई, जो इस मस्जिद के पास ही रहते हैं बताते हैं, ‘मैंने पिछले 70 सालों से इस मस्जिद को अपनी आंखों के सामने देखा है. यह गाज़ीपुर की शान है और हमारे लिए फक्र की बात है. हर शुक्रवार को यहां जुमे की नमाज़ अदा की जाती है.’
भीड़-भाड़ में छिपी हुई विरासत
आज यह मस्जिद चारों ओर मेडिकल दुकानों से घिरी हुई है. कई बार तो राहगीरों को इसका अस्तित्व भी पता नहीं चलता. एक तरफ यह धरोहर गाज़ीपुर की पहचान है, तो दूसरी ओर बढ़ती शहरी भीड़ और अनियोजित निर्माण ने इसे लगभग छिपा दिया है.

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें

