संवाददाता@रामबली मिश्रा……
श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस भक्ति, वैराग्य और ईश्वर प्राप्ति का किया वर्णन

ग्राम पंचायत डोडहर पुनर्वास-2 में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के तृतीय दिवस परम पूज्य पंडित नंदकिशोर जी पांडेय ने भक्ति, वैराग्य और ईश्वर प्राप्ति के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों का मार्मिक वर्णन किया। उनकी ओजस्वी वाणी से कथा पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

कथा के दौरान पंडित नंदकिशोर जी पांडेय ने कहा कि जिस प्रकार अंधकार के बिना प्रकाश का वास्तविक बोध नहीं होता, उसी प्रकार निर्गुण के ज्ञान के बिना सगुण स्वरूप की अनुभूति संभव नहीं है। श्रीमद्भागवत के मर्म को समझाते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन तभी सार्थक होता है, जब उसका मन सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर परमात्मा की भक्ति में लीन हो जाता है।

वैराग्य की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि मनुष्य को जीवन में चार परिस्थितियों में वैराग्य का अनुभव होता है। इनमें मां के गर्भ में रहने की अवस्था, पुराण एवं धर्मग्रंथों का श्रवण, रोगग्रस्त अवस्था तथा श्मशान भूमि शामिल हैं। इन परिस्थितियों में मनुष्य संसार की नश्वरता को समझकर मोह-माया से दूर रहने का संकल्प लेता है, लेकिन परिस्थितियां सामान्य होते ही वह पुनः सांसारिक आकर्षणों में उलझ जाता है।

उन्होंने कहा कि केवल वैराग्य की भावना रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे अपने आचरण में उतारना भी आवश्यक है। ईश्वर की प्राप्ति का सर्वोपरि साधन भक्ति है। निर्मल, निष्कपट और अहंकाररहित मन से की गई भक्ति ही मनुष्य को माया के बंधन से मुक्त होने का मार्ग दिखाती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को श्रद्धा, विश्वास और पवित्र अंतःकरण से प्रभु का स्मरण करना चाहिए।