मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। इनमें हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं भी आम हैं। खासकर 45 वर्ष की उम्र के बाद हड्डियों की मजबूती, खान-पान और शारीरिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है।

समय रहते सावधानी बरतने से हड्डियों की कमजोरी और उससे जुड़ी कई परेशानियों से बचाव किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज बी-ब्लॉक के नोडल डॉ. अवनीश शाह के अनुसार, हड्डियों में होने वाली परेशानी को केवल बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉ. अवनीश शाह बताते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का घनत्व कम हो सकता है। इससे हड्डियां कमजोर और भुरभुरी होने लगती हैं। इसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मामूली चोट या गिरने पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।

इसके अलावा ऑस्टियोआर्थराइटिस यानी जोड़ों में घिसाव की समस्या भी उम्र बढ़ने के साथ देखने को मिलती है। इसमें खासकर घुटनों, कूल्हों और हाथ-पैर के अन्य जोड़ों में दर्द, अकड़न और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।

कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी भी हड्डियों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। इसकी वजह से हड्डियों और मांसपेशियों में कमजोरी, दर्द और थकान जैसी समस्याएं महसूस हो सकती हैं।

हड्डियों और जोड़ों की समस्या बढ़ने पर व्यक्ति को रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी होने लगती है। लंबे समय तक खड़े रहना, सीढ़ियां चढ़ना, पैदल चलना, जमीन पर बैठना या उठना मुश्किल हो सकता है। कई बार दर्द के कारण लोग शारीरिक गतिविधियां कम कर देते हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और समस्या और बढ़ सकती है।

डॉ. शाह के अनुसार हड्डियों को मजबूत रखने के लिए संतुलित भोजन जरूरी है। दूध, दही, पनीर जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों के साथ हरी सब्जियां, दालें, तिल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। विटामिन-डी शरीर में कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इसके लिए उचित मात्रा में धूप लेना उपयोगी हो सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति में विटामिन-डी या कैल्शियम की कमी है या नहीं, यह चिकित्सकीय सलाह और जरूरत पड़ने पर जांच से तय किया जाना चाहिए।

हड्डियों को मजबूत रखने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण है। अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुसार रोज पैदल चलना, हल्का व्यायाम और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां लाभकारी हो सकती हैं। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना चाहिए। वहीं धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन हड्डियों की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

लगातार कमर या जोड़ों में दर्द, बार-बार गिरना, मामूली चोट में फ्रैक्चर होना, चलने-फिरने में लगातार परेशानी या शरीर के झुकाव में बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। खासकर महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों की कमजोरी का जोखिम बढ़ सकता है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।

डॉ. शाह की सलाह: 45 वर्ष के बाद हड्डियों की मजबूती के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त धूप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। बिना चिकित्सकीय सलाह के कैल्शियम या विटामिन-डी की दवाएं लंबे समय तक न लें।