मुख्यालय संवाददाता@विशाल टंडन…
..विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मेडिकल कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम, मरीजों को अकेला न छोड़ने की अपील

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर शनिवार को स्वायत्तशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें चिकित्सकों ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, मानसिक रोगों के लक्षण, कारण और उपचार की जानकारी देते हुए लोगों से मानसिक समस्याओं को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी कमजोरी नहीं है और समय पर मदद लेना भी कमजोरी का संकेत नहीं है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आईजेन भट्टाचार्य ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की पहल पर हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मानसिक बीमारियों से जुड़े भ्रम को दूर करना है। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी हमेशा दिखाई नहीं देती। कई लोग लंबे समय तक परेशानी झेलते रहते हैं और उचित मदद नहीं मिलने पर उनकी स्थिति गंभीर हो सकती है।

प्राचार्य ने बताया कि पहले मनोरोग विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 10 से 12 मरीज आते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर करीब 80 से 90 तक पहुंच रही है। इसे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को अकेला महसूस न होने दें, उसे प्रोत्साहित करें और जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में लाकर विशेषज्ञों से परामर्श कराएं।

मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. जितेश गुप्ता ने कहा कि विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ही मानसिक रोगों से जुड़े कलंक और भेदभाव को समाप्त करना है।
मानसिक स्वास्थ्य का मतलब केवल मानसिक बीमारी का न होना नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की सोच, भावनाओं, व्यवहार और परिस्थितियों से सामंजस्य बनाने की क्षमता से भी जुड़ा है।

उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति की सोच, भावनाओं या व्यवहार में लगातार बदलाव आने लगे और इससे उसकी पढ़ाई, नौकरी, रिश्ते या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इसे मानसिक समस्या का संकेत मानकर गंभीरता से लेना चाहिए। मानसिक समस्याओं के पीछे जैविक, आनुवंशिक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारणों की संयुक्त भूमिका हो सकती है।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि मानसिक बीमारियों का प्रभावी उपचार उपलब्ध है। उचित इलाज, काउंसलिंग और नियमित फॉलोअप से व्यक्ति परिवार, कामकाज और सामाजिक जीवन में सामान्य रूप से आगे बढ़ सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति की बात ध्यान से सुनें, उसे दोष न दें और न ही उसका मजाक बनाएं।

डॉ. जितेश गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देने पर जोर दिया। उन्होंने पर्याप्त नींद लेने, नियमित दिनचर्या अपनाने, संतुलित खानपान रखने, परिवार और मित्रों से जुड़े रहने तथा नशे से दूर रहने की सलाह दी। तनाव को स्वस्थ तरीके से संभालना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने डब्ल्यूएचओ की इस वर्ष की थीम “जीवित अनुभवों की सुनी जाए, वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव”का उल्लेख करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से गुजर चुके लोगों के अनुभवों को सुनना और समझना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विकास में भी उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कार्यक्रम में डॉ. डीके सिंह, सीएमएस डॉ. वीके श्रीवास्तव, एमएस डॉ. सौम्य चक्रवर्ती, डॉ. मुक्ता सिंह, डॉ. आशीष सहित अन्य चिकित्सक ने भी सम्बोधित किया। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर,कर्मचारी, मरीज और उनके परिजन उपस्थित रहे।
