संवाददाता@बद्री प्रसाद……
— रिकवरी प्रबंधन एवं ट्रैफिक पुलिस द्वारा किया जा रहा परेशान

जनपद में बेरोज़गारी का दंश झेल रहे आटो रिक्शा संचालकों का एक ओर जहां पुलिस प्रशासन चालान के नाम पर आर्थिक दोहन एवं मानसिक उत्पीड़न कर रही है,वहीं दूसरी ओर आटो फाइनेंस करने वाली फाइनेंसर कंपनी से जुड़े लोग भी किश्त जमा करने के नाम पर अत्यधिक तंग कर रहे हैं। जिसके कारण आटो रिक्शा संचालक एवं चालक मानसिक और आर्थिक रूप से काफी परेशान रहते हैं।
बताते है कि जनपद के आटो रिक्शा एजेंसी के संचालक कुछ धनराशि अग्रिम जमा कराकर तीन वर्ष तक मासिक किस्त पर आटो रिक्शा लेने वालों को उपलब्ध करा देते है। विषम परिस्थितियों में आटो रिक्शा मालिक समय से एक या दो किस्त नहीं भर पाए तो आटो रिक्शा एजेंसी के रिकवरी (फाइनेंसर) प्रबंधन द्वारा बिना किसी नोटिस जारी किए आटो रिक्शा अपने गैरेज में उठवा ले जा रहे हैं और वही आटो रिक्शा पुनः रुपए लेकर बिना पहले वाले मालिक का नाम निरस्त किए दूसरे को बेच दे रहे हैं।

ऐसी दशा में आटो रिक्शा स्वामियों में असंतोष व्याप्त है। सूत्रों की माने तो आटो रिक्शा वालों को पुलिस द्वारा भी भारी भरकम जुर्माना चालान के नाम पर आर्थिक दोहन किया जा रहा है। जिसके कारण आटो रिक्शा स्वामियों को एक तरफ जहां किस्त जमा करने का बोझ रहता है वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक पुलिस द्वारा अनावश्यक रूप से बार -बार चालान कर भारी भरकम जुर्माना लगाया जा रहा है।
जिसके कारण बेरोजगार युवाओं को अत्यंत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।इस तरह की दोहरी मार से आटो रिक्शा चालक एवं संचालक सभी काफी परेशान हैं।बेरोजगारी दूर होने को कौन कहे अपना खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। ऐसी दशा में जनपद के लोक प्रिय जिलाधिकारी चर्चित गौंड का ध्यान इस तरफ आकृष्ट कराते हुए समुचित निराकरण कराए जाने की मांग किया गया है ताकि ऑटो संचालक राहत की सांस ले सकें।





