संवाददाता@अनिल अग्रहरी……

मझवार, तुरैहा समेत निषाद समाज की विभिन्न जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) का प्रमाणपत्र जारी किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार को निजात पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गौड़ को उनके आवास पर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, मुख्यमंत्री समेत अन्य संबंधित अधिकारियों को संबोधित किया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 में वर्ष 2016 और 2017 में किए गए संशोधनों के बाद निषाद, केवट, मल्लाह, कश्यप, कहार, धीमर, बिंद, बाथम, तुरहा, गोड़िया, मांझी एवं मछुआ सहित कई जातियों को पिछड़ा वर्ग की सूची से हटाया गया था। इसके बावजूद जिला एवं तहसील स्तर पर इन समुदायों के लोगों को अब भी अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) का प्रमाणपत्र जारी किए जाने का आरोप लगाया गया है।

ज्ञापन में 10 अगस्त 1950 की राष्ट्रपति अधिसूचना, 1961 की जनगणना पुस्तिका, 29 अगस्त 1977 के भारत सरकार के शासनादेश तथा विभिन्न राजस्व अभिलेखों का हवाला देते हुए दावा किया गया कि मझवार, तुरैहा एवं उनकी पर्यायवाची जातियां अनुसूचित जाति समूह में सूचीबद्ध हैं। साथ ही यह भी उल्लेख किया गया कि देश के कई राज्यों में इन समुदायों को अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि वर्ष 2016 एवं 2017 के शासनादेशों का प्रदेशभर में प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए, संबंधित जातियों को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया रोकी जाए तथा पात्र व्यक्तियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र और उससे संबंधित सभी संवैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इसके अलावा उत्तराखंड की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी आवश्यक विधायी एवं प्रशासनिक प्रावधान कर मझवार, तुरैहा एवं अन्य संबंधित जातियों की स्पष्ट परिभाषा निर्धारित करने तथा सभी उप जिलाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की गई।
इस दौरान जिलाध्यक्ष अनिकेत निषाद, प्रदेश महासचिव दयाशंकर निषाद, जिला संयोजक शिवेंद्र निषाद, छोटेलाल साहनी, राम सुंदर, मुनिया देवी, पिंटू, प्रदीप, फूलचंद चौधरी, विनय, राकेश, लाल साहब, लालजी, विनोद चौधरी, राज नारायण सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।






