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Mirabai Chanu tears: मीराबाई चानू ने ग्लासगो 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल 190kg वजन उठाकर भारत की झोली में पहला स्वर्ण पदक डाला. 48kg वर्ग में लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडल अपने नाम करते ही जब पोडियम पर राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गूंज उठा, तो देश की ‘गोल्डन गर्ल’ की आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली. शुरुआती असफलताओं को पछाड़ते हुए रिकॉर्ड कायम करने वाली मीराबाई के ये आंसू सिर्फ एक जीत के नहीं, बल्कि सालों के संघर्ष, दर्द और अटूट देशभक्ति की कहानी बयां कर रहे थे.
मीराबाई चानू पोडियम पर खड़े होकर खूब रोईं.
नई दिल्ली. पोडियम पर सबसे ऊंचे पायदान पर खड़ी 31 साल की मीराबाई चानू के गले में जैसे ही कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल पहनाया गया, स्टेडियम में एक सन्नाटा सा छा गया. और फिर गूंज उठी राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की वो पावन धुन जिसने पूरे देश के दिल को गर्व से भर दिया. लेकिन इस पल में जब भारत का राष्ट्रध्वज धीरे-धीरे ऊपर चढ़ रहा था, मीराबाई का चेहरा केवल मुस्कान से नहीं, बल्कि आंखों से बहते झर-झर आंसुओं से भीगा हुआ था. वे आंसू सिर्फ एक जीत की खुशी के नहीं थे. उन आंसुओं में छिपा था वर्षों का अथक परिश्रम, चोटों से जूझने का दर्द, देश की उम्मीदों का भारी बोझ और फिर से साबित करने की एक खामोश जंग. जब कोई खिलाड़ी तिरंगे को ऊपर उठते देखता है और उसकी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकलती है, तो समझ लीजिए कि उस पदक के पीछे की कहानी केवल 190 किलोग्राम वजन उठाने भर की नहीं है.
मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) के लिए यह सिर्फ एक और पदक नहीं था. यह उनके करियर की सबसे बड़ी भावनाओं की परीक्षा थी. 2014 के इसी ग्लासगो शहर में एक मासूम सी युवा लड़की के रूप में उन्होंने अपना पहला कॉमनवेल्थ गेम्स (सिल्वर) जीता था. आज, 12 साल बाद, उसी ग्लासगो की मिट्टी पर उन्होंने इतिहास रच दिया लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडल! जब वे पोडियम पर रो रही थीं, तो मानो वे उन दिनों को याद कर रही थीं जब मणिपुर की गलियों से उठकर उन्होंने विश्व मंच तक का सफर तय किया था. वे आंसू उस हर उस दिन का जवाब थे जब किसी ने उन पर शक किया था, हर उस रात का हिसाब थे जब दर्द की वजह से वे सो नहीं पाई थीं.
This is the Real Youth… This legend Named Mirabai Chanu represents India not the filth girls of Jantar Mantar! pic.twitter.com/aB4JupHPjO






