संवाददाता@कृपा शंकर पांडेय……

मेड़र माता मंदिर परिसर में आयोजित सप्तदिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास पूज्य श्री दिलीप कृष्ण भारद्वाज महाराज ने माता सीता की विदाई का मार्मिक प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु भावुक हो उठे और कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
कथा के दौरान महाराज ने भगवान श्रीराम और केवट संवाद की भावपूर्ण व्याख्या करते हुए कहा कि प्रभु श्रीराम की लीलाएं केवल धार्मिक प्रसंग नहीं, बल्कि मानव जीवन को मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने श्रीराम के वनगमन प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का पालन ही जीवन की सबसे बड़ी सीख है।

संगीतमय शैली में प्रस्तुत कथा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। समय-समय पर “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में गूंजता रहा। अपने प्रवचन में महाराज ने कहा कि प्रभु श्रीराम कण-कण में विद्यमान हैं और जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा एवं निष्कपट भाव से उनका स्मरण करता है, उस पर प्रभु की कृपा अवश्य होती है।
उन्होंने श्रीरामचरितमानस को जीवन जीने की कला सिखाने वाला अमूल्य ग्रंथ बताते हुए कहा कि सनातन संस्कृति की जड़ें जितनी मजबूत होंगी, समाज उतना ही संस्कारित, संगठित और सशक्त बनेगा। भारत भूमि को देवभूमि एवं पुण्यभूमि बताते हुए उन्होंने राष्ट्रहित, राष्ट्ररक्षा, सेवा, संस्कार और समर्पण की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन और श्रीराम के जयघोष से पूरा मेड़र माता मंदिर परिसर आध्यात्मिक वातावरण में सराबोर रहा। श्रद्धालु देर रात तक कथा श्रवण कर भक्ति रस में डूबे रहे।

कार्यक्रम के आयोजक धर्माचार्य शिवकुमार पहाड़ी बाबा ने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रीराम कथा समाज में संस्कार, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना जागृत करने का सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम का संचालन सुनील सिंह ने किया।
इस अवसर पर संरक्षक राजा मिश्रा, नागेश्वर प्रसाद गोंड़, श्यामा चरण गिरी, संतोष साहनी, राजकुमार टपू, अजय साहनी, संदीप चौरसिया, राजेन्द्र जी, राजकुमार निषाद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। प्रतिदिन बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या क्षेत्र में धार्मिक आस्था और सनातन संस्कृति के प्रति लोगों के बढ़ते समर्पण को दर्शा रही है।






