मुख्य संवाददाता@सौरभ गोस्वामी….

हठधर्मी सरकारें लोकतंत्र का सम्मान नहीं करतीं। जब देश का युवा और छात्र सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होता है, तब समझ लेना चाहिए कि व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। उक्त बातें भारतीय अहिंसा सेवा संस्थान के अध्यक्ष विजय शंकर यादव ने कही।उन्होंने कहा कि
देश अघोषित आपात काल के स्थिति से गुजर रहा है।आन्दोलन आलोचनाओं का दमन क्रूरता से किया जा रहा है।यह स्वस्थ्य लोकतन्त्र के लिए बेहतर नही है।अघोषित आपातकाल स्लोगन पोस्टर को अपने दिन चर्या में शामिल कर विरोध करते श्री यादव ने कहा कि जंतर-मंतर पर पिछले लगभग तीन सप्ताह से छात्र और युवा अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं।
वावजूद इसके अभी तक सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि उनसे वार्ता करने नहीं पहुंचा। यह रवैया पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और हठधर्मिता का प्रतीक है। शिक्षा व्यवस्था पर उन्होंने कहा की शिक्षा विभाग युवाओं के भविष्य को लेकर कोई सकारात्मक विकल्प नहीं खोज पा रहा है।भूमिकाओं की भ्रम स्थिति यह हो गई है कि शिक्षा विभाग का कार्य अब रक्षा और पुलिस विभाग को सौंप दिया गया है,जो इस बात का प्रमाण है कि सरकार अपनी नाकामी स्वीकार कर चुकी है।जनता पुलिस की आवश्यकता है।

आंदोलनकारी छात्रों पर हो रहे पुलिसिया बल प्रयोग यह प्रमाण है कि पुलिस केवल सरकार की सुन रही है और छात्रों पर लाठियां बरसाई जा रही हैं।इससे युवाओं का आक्रोश और बढ़ेगा। लोकतंत्र में आंदोलन आम जनता की आवाज़ होती है। जब सरकारें संवेदनहीन हो जाती हैं, तो आवाम को सड़कों पर उतरना पड़ता है। सरकार को दमनकारी नीतियां छोड़कर तुरंत वार्ता के जरिए समाधान निकालना चाहिए।







