फुटबॉल के वर्ल्ड कप में सेमिफाइनल का टाइम आ गया है, लेकिन यहां ज्यादातर पब्लिक को अंदाजा नहीं कि एक सेमिफाइनल ऐसा होने जा रहा है जिसमें जानी दुश्मन आमने-सामने हैं, और कहते हैं फैसला खुद भगवान करते हैं. खेल-खेल की दुश्मनी नहीं है वो. जंग का इतिहास है और बात भगवान तक पहुंच गई थी. सौ बात की एक बात ये कि फुटबॉल में दिलचस्पी ना भी हो तब भी ये पता होना चाहिए कि इंग्लैंड और अर्जेंटीना का वर्ल्ड कप में सेमिफाइनल मैच कोई आम मैच नहीं है. ये वो मैच होता है जिसमें एक बार भगवान ने गोल किया था. जी, भगवान ने. और ये मैच जंग से कम नहीं माना जाता है.
जो फुटबॉल के शौकीन हैं उनमें भी ज्यादातर पब्लिक को पता नहीं कि ये जानी दुश्मनों की जंग क्यों कही जाती है. क्योंकि इनके बीच ख़ूनी जंग हुई थी 1982 में जिसने दोनों देशों का इतिहास बदल दिया था. और उससे पहले भी फुटबॉल के मैदान में बड़ा ड्रामा हो चुका है इनके बीच और उसके बाद भी हो चुका है. और बीच में ख़ुद भगवान तक को घसीट दिया गया था. अर्जैंटीना है दक्षिण अमेरिका में ये तो आप जानते ही हो. दक्षिण अमेरिका में युरोप से लोग गए थे बसने और अलग-अलग देश वहां बना लिये थे. तो अर्जेंटीना में स्पेन का राज होता था. वहां स्पैनिश भाषा ही बोली जाती है.
अर्जेंटीना के तट से 480 km दूर समुद्र में छोटे-छोटे टापुओं का एक समूह है. जिनको अर्जेंटीना के लोग कहते हैं माल्वीनास. और ब्रिटेन के लोग कहते हैं फॉकलैंड आइलैंड्स. अर्जेंटीना का दावा रहा है कि वो भी स्पेन के साम्राज्य का हिस्सा होते थे 19वीं सदी में, इसलिये वो अर्जेंटीना का हिस्सा हैं. जबकि ब्रिटेन का कहना है कि 1833 से तो ब्रिटेन का राज है वहां पर, तो ना तो वो स्पेन के थे औऱ ना ही अब अर्जेंटीना के हैं, वो तो ब्रिटेन का हिस्सा हैं.
1982 में अर्जेंटीना में मिलिटरी का शासन होता था. मिलिटरी डिक्टेटर थे जनरल लियोपोल्दो गाल्तियेरी. आर्थिक संकट आया हुआ था अर्जेंटीना में. गरीबी और महंगाई से हाहाकार मचा था. ऐसा माहौल में अर्जेंटीना के सेना ने फिर से फॉकलैंड टापुओं का मुद्दा उठा दिया और फिर से अपना दावा ठोक दिया. ब्रिटेन में प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर का शासन था. अर्जैंटीना की सेना ने शायद सोचा था कि ब्रिटेन 12,000 km दूर है तो प्रधानमंत्री थैचर फैसले नहीं ले पाएंगी और ब्रिटेन की सेना मुकाबला नहीं कर पाएगी उनके इलाके में. तो 2 अप्रैल 1982 को अचानक अर्जेंटीना ने फॉकलैंड टापुओं पर हमला कर दिया. और कब्जा कर लिया टापुओं पर. लेकिन मार्गरेट थैचर ने अपनी नौसेना भेज दी और जंग शुरू हो गई.
1982 में फॉकलैंड आईलैंड पर कब्जे को लेकर ब्रिटेन और अर्जेंटीना में भीषण युद्ध हुआ था.
समुद्र में भयानक जंग चली, हवाई हमले हुए, मिसाइलें चलीं, टापुओं पर सैनिक जमीन पर आमने-सामने तक आ गए. हफ्ते बीतते गए. प्रधानमंत्री थैचर का सबसे बड़ा इम्तिहान थी ये जंग. क्योंकि ये ब्रिटेन से 12,000 km दूर समुद्र में लड़ी जा रही थी. और फिर बड़ा मोड़ जंग में तब आया जब ब्रिटेन की एक पनडुब्बी ने पानी के अंदर-अंदर वार कर के अर्जेंटीना का जहाज डुबो दिया. 300 नौसेनिक बर्फीले समुद्र में डूब गए. याद रखिये अर्जेंटीना पृथ्वी के दक्षिण में है. तो वहां मौसम उत्तर के हिस्से से उल्टा होता है. मई-जून में सर्दी होती है. तो बर्फीले पानी में 300 नौसेनिक डूब गए अर्जेंटीना के. अर्जेटीना की नौसेना ने ब्रिटेन के कई युद्धपोतों पर मिसाइलों से जवाबी हमला जरूर किया था. लेकिन ब्रिटेन की नौसेना ने आख़िर अर्जेंटीना की नौसेना को घेर लिया और अर्जैंटीना को सरेंडर करना पड़ा था. 14 जून 1982 को अर्जैटीना की सेना ने शर्मनाक सरेंडर किया.
74 दिन तक युद्ध चला और पूरी दुनिया इस युद्ध से हिल गई थी. 649 सैनिक अर्जेटीना के मारे गए थे और 255 ब्रिटेन के. लेकिन जैसे बांग्लादेश युद्ध ने इंदिरा गांधी को सबसे ताकतवर बना दिया था. इसी तरह इस युद्ध के बाद मार्गरेट थैचर बहुत ताकतवर बन कर उभरी थीं. और अर्जैंटीना की सेना का तो तख़्तापलट ही हो गया था युद्ध के बाद. और वहां नई सरकार आई थी. लेकिन इस युद्ध के बाद फिर फुटबॉल वर्ल्ड कप आया. लेकिन उसकी बात करने से उससे पहले की बात भी समझनी जरूरी है. दोनों देशों का युद्ध फुटबॉल वर्ल्ड कप में पहले भी हो चुका था.
इंग्लैंड ने वर्ल्ड कप एक ही बार जीता है, 60 साल पहले 1966 में. तब वर्ल्ड कप इंग्लैंड में ही हुआ था. क्वॉर्टर फाइनल में मुकाबला अर्जैटीना के साथ था. तब क्या होता था कि ये येलो कार्ड और रेड कार्ड वाला सिस्टम नहीं होता था. मैच में जर्मनी के रेफरी ने अर्जेंटीना के कप्तान ऐंतोनिया रत्तिन को बहस करने के आरोप में मैदान से बाहर जाने का आदेश दे दिया. अर्जेंटीना के कप्तान का कहना था कि उनको रेफरी की भाषा नहीं समझ में आ रही और वो वहीं अड़े रहे मैदान में. रेफरी ने पुलिस बुला कर कप्तान को उठवा कर मैदान से बाहर करवा दिया. और इंग्लैंड ने 10 खिलाड़ियों के ख़िलाफ वो मैच जीत लिया. और फिर आगे चल कर तो वर्ल्ड कप ही जीत लिया था.
अर्जैंटीना मानता है कि इंग्लैंड ने वो चीटिंग कर के जीता था क्वॉर्टर फाइनल और उनके कप्तान को ही बाहर कर के जीता था. तो अर्जेंटीना मानता ही नहीं कि इंग्लैंड उस वर्ल्ड कप का हकदार ही नहीं था. तो वो खटास थी. उसके बाद तो 1982 में फॉकलैंड द्वीप पर जंग ही हो गई और अर्जेंटीना जंग में बुरी तरह हार गया था. उसके बाद आया 1986 का वर्ल्ड कप. मेक्सिको में हो रहा था वर्ल्ड कप. और 1986 में क्वॉर्टर फाइनल में फिर अर्जेंटीना और इंग्लैंड आमने-सामने आ गईं. युद्ध की यादें अभी भी ताजा थीं, इसलिए मैदान पर माहौल बहुत तनावपूर्ण था. दोनों तरफ के फैंस भावुक थे, जैसे पुराना बदला लेने का मौका मिल गया हो.
मैराडोना का हैंड ऑफ गॉड फुटबॉल की दुनिया का सबसे चर्चित और विवादस्पद गोल माना जाता है.
अर्जेंटीना की टीम में एक जादुई खिलाड़ी था. डिएगो माराडोना, नाम तो सुना होगा आपने. छोटा कद, लेकिन फुटबॉल के जादूगर जैसा. वो गरीब परिवार से आया था और पूरे अर्जेंटीना का हीरो बन चुका था. मैच शुरू हुआ. दूसरे हाफ में कुछ देर बाद माराडोना गेंद लेकर आगे बढ़े. अचानक गेंद इंग्लैंड के लंबे गोलकीपर पीटर शिल्टन के पास पहुंची. दोनों कूदे, शिल्टन हाथ ऊपर करके गेंद रोकने की कोशिश कर रहे था. माराडोना भी उछले और सर से गेंद को गोल की तरफ धकेला. और एक जबरदस्त हेडर से गोल कर दिया. लेकिन इंग्लैंड के खिलाड़ी आगबबूला हो गए.
लोगों को समझ में नहीं आया हुआ क्या था. आजकल जैसी तकनीक नहीं होती थी उस टाइम. रेफरी ने गोल दे दिया था. लेकिन टीवी रीप्ले में दिखा कि माराडोना ने सर के साथ हाथ भी लगाया था बॉल को और मुट्ठी से गेंद को जोर से पंच मारकर गोल में डाला था. लेकिन रेफरी ये देख नहीं पाए थे. गोल दे दिया गया. गोल हाथ से हुआ था. लेकिन गोल दे दिया गया. अर्जेंटीना 1-0 से आगे हो गया.
माराडोना ने बाद में पता है क्या कहा था? ये गोल कैसे हुआ? बोले थोड़ा मेरे सिर से, थोड़ा ‘द हैंड ऑफ गॉड’, भगवान के हाथ से. यानी वो जानते थे कि गोल हाथ से हुआ है. हालांकि कुछ ही मिनट बाद माराडोना ने वो कमाल कर के दिखाया था कि पूरी दुनिया दंग रह गई. अपनी टीम के आधे मैदान से वो गेंद लेकर दौड़े. एक के बाद एक चार-पांच इंग्लैंड के खिलाड़ियों को चकमा देते हुए आगे बढ़े, जैसे वो मैदान में खड़े ही न हों. जैसे गेंद उनके पैरों से चिपकी हुई हो. और आखिर में अकेले गोलकीपर के सामने पहुंचे और खूबसूरती से गेंद को गोल में ठोक दिया.
वो गोल फुटबॉल इतिहास का अब तक का सबसे शानदार गोल माना जाता है. उससे बहतर गोल आज तक कोई नहीं माना जाता. अर्जेंटीना ने मैच 2-1 से जीत लिया था और बाद में वर्ल्ड कप जीत लिया था. और माराडोना ने बाद में खुलकर कहा कि हाथ वाला गोल युद्ध में मारे गए अर्जेंटीना के उन युवा सैनिकों का बदला था जिन्होंने अपनी जान दी.
अर्जैंटीना के लोगों के लिए वो 1966 के इंग्लैंड की वर्ल्ड कप का भी बदला था और 1982 के युद्ध का भी बदला था. 1998 वर्ल्ड कप में दोनों टीमें मिलीं, डेविड बेकहम को उस मैच में रेड कार्ड मिला, पेनल्टी शूटआउट में अर्जैंटीना जीता था. 2002 में भी मिलीं टीमें और इंग्लैंड ने जीत हासिल की. लेकिन पिछले 24 साल से दोनों टीमें आमने-सामने नहीं आई हैं वर्ल्ड कप में. आग अभी तक धधक रही है दोनों में. अब 2026 विश्व कप का सेमीफाइनल है. जो जीतेगा फाइनल में जाएगा. लेकिन इन दोनों टीमों के बीच का मैच सिर्फ मैच नहीं होता. जंग से भी ज्यादा होता है. पब्लिक ही नहीं देखती, माराडोना ने तो भगवान को ही घसीट लिया था इस जंग में. जानी दुश्मन फिर आमने-सामने हैं. सौ बात की एक बात.






